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अख़बारनामा: ‘राजस्थान पत्रिका’ युद्ध के पक्ष में सबसे आगे

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संजय कुमार सिंह

पाकिस्तान पर भारत के हवाई हमले के बाद कल के अखबारों के शीर्षक इस तरह थे :

हिन्दुस्तान – जैश का जोश जमींदोज
नवभारत टाइम्स – शहीदों की तेरहवीं से पहले बदला 
नवोदय टाइम्स – जोश में इंडिया
दैनिक जागरण – पुलवामा का हिसाब पूरा
अमर उजाला – पाकिस्तान में घुसकर जैश के तीन बड़े ठिकाने तबाह।
राजस्थान पत्रिका – पाकिस्तान में घुसकर मारा
दैनिक भास्कर – एयरफोर्स ने 48 साल बाद पाकिस्तान की सरहद लांघी, आंतकी अड्डा तबाह।

इसके बाद कल की घटनाएं और अपील तथा एक भारतीय विंग कमांडर पाकिस्तान के कब्जे में है और पाकिस्तान ने कहा है कि वह युद्ध नहीं चाहता और उसने हमला कर दिखा दिया है कि वह भी सक्षम है। पर हमले से नुकसान न हो इसलिए उसने लक्ष्य से दूर बम गिराया। इसपर भारत सरकार की जो प्रतिक्रिया होगी सो होगी, अखबारों की प्रतिक्रिया दिलचस्प है। इसमें ढूंढ़िए कि पाकिस्तान का पक्ष कहां-कितना है। उसके बिना युद्ध की खबरें इन अखबारों से कितनी और कैसी मिलेंगी।

आज के अखबारों से लगता है कि राजस्थान पत्रिका अभी भी युद्ध के पक्ष में सबसे आगे है। मुख्य खबर का फ्लैग शीर्षक है, “पहले घुसकर मारा, अब वे घुसे तो मारा : खुले में गिरे दुश्मन के बम”। मुख्य शीर्षक है, “एलओसी लांघते ही मार गिराया पाकिस्तानी हमलावर विमान।” लीड के साथ टॉप में दो कॉलम की खबर है, “पाक कैद में हमारा पायलट, अभद्रता पर भारत ने जताई आपत्ति, कहा फौरन रिहा करें”। पहले पन्ने पर ब्यूरो की विशेष खबर पढ़िए, “देश में गुस्सा : सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नुकसान का पहले से सोचकर नहीं हटा जा सकता है पीछे।” मेरे ख्याल से ऐसे सुरक्षा विशेषज्ञ को हमला विशेषज्ञ कहना उपयुक्त होगा।

अखबार ने इमरान खान की अपील को शीर्षक दिया है, “दोमुंहापन : वार्ता के लिए किया आमंत्रित”। मुख्य शीर्षक है, “एक तरफ हवाई हमला तो दूसरी तरफ शांति का राग।”। यहां यह उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान ने कल कहा था कि उसने जानबूझकर ऐसा हमला किया है जिससे पता चले कि वह सक्षम है और उसपर जवाबी कार्रवाई का आरोप नहीं लगे क्योंकि वह युद्ध नहीं चाहता है। इसके बावजूद राजस्थान पत्रिका के तेवर देखने लायक हैं। अखबार ने अंदर विशेष जयहिन्द की सेना भी छापा है।

दैनिक भास्कर आज भी संतुलित है। मौके से रिपोर्टिंग भी यही अखबार कर रहा है। अखबार ने मुख्य खबर टॉप पर छापी है। शीर्षक है, “आतंकी अड्डे की तबाही से बौखलाए पाक ने हमारे सैन्य ठिकानों पर हमला किया।” लेकिन लीड बनाया है, राष्ट्र को अभिनंदन चाहिए। अखबार ने इमरान खान की अपील को भी पहले पन्ने पर रखा है। फ्लैग शीर्षक है, इमरान के सुर नरम। मुख्य शीर्षक है, जंग छोड़ें, वार्ता से मुद्दे हल करने को तैयार हैं।

हिन्दुस्तान की मुख्य खबर का शीर्षक है, हमलावर पाक को करारा जवाब। इसके साथ अखबार ने वित मंत्री अरुण जेटली की फोटो छापी है और उनका बयान, “मुझे याद है कि जब अमेरिका ने पाकिस्तान में घुसकर ओसामा बिन लादेन को मारा था तब हम ऐसा करने की सिर्फ सोचते थे। आज भारत के लिए यह संभव है” – छापा है। इसके साथ तीन खबरें हैं, दिल्ली में हाई अलर्ट, पाक उच्चायुक्त तलब और सफेद झूठ पकड़ा गया तो पाक पलटा। अखबार ने विंग कमांडर अभिनंदन के पाकिस्तान के कब्जे में होने की खबर अलग, चार कॉलम में, सबसे नीचे यानी बॉटम बनाकर छापी है।

नवभारत टाइम्स की मुख्य खबर है, “पाकिस्तान के कब्जे में पायलट, भारत ने चेताया – हाथ न लगाना”। इसके साथ बॉक्स में दो खबरें अगल बगल है, “बर्बरता से पिटाई का वीडियो वायरल” और “छुड़ाने के लिए सेनाओं को छूट”। इसके नीचे एक तरफ सुषमा स्वराज का बयान है और दूसरी तरफ इमरान खान की अपील का अंश। इमरान खान की अपील की चर्चा पहले है अब देखते हैं सुषमा स्वराज ने क्या कहा है, भारत तनाव नहीं बढ़ाना चाहता है, लेकिन जिम्मेदारी और संयम से कार्रवाई जारी रखेगा। इसके साथ अखबार ने अंदर के पन्नों की छह खबरें पहले पन्ने पर संक्षेप में छापी है। शीर्षक है, भारत-पाक तनाव के बीच ये खबरें भी अहम । इनमें विपक्ष के साझा बयान की खबर भी है। इसका शीर्षक है विपक्ष ने साधा निशाना।

नवोदय टाइम्स का मुख्य शीर्षक है, थल से नभ तक युद्ध जैस हालात। उपशीर्षक है, हमारा पायलट लौटाओ : भारत। एक दूसरी खबर का शीर्षक है, पाक से कहा – नुकसान न पहुंचे हमारे पायलट को। अखबार ने इमरान खान की अपील को छोटा ही सही, पहले पन्ने पर छापा है। लेकिन विपक्ष का साझा बयान यहां भी पहले पन्ने पर नहीं है। नवोदय टाइम्स ने पहले पन्ने पर डबल कॉलम में एक और खास खबर छापी है, पीएम ने दी सशस्त्र बलों को खुली छूट, दो बार बैठक की।

दैनिक जागरण की आज की पहली खबर का फ्लैग शीर्षक है, बढ़ा तनाव : वायु सेना ने मार गिराया पाक का एफ-16, हमने खोया – मिग 21, एक पायलट पाक के कब्जे में। मुख्य शीर्षक है, पाक पर और बड़ी कार्रवाई के संकेत। इसके साथ दो कॉलम की खबर है, “हम निर्णायक फैसला करने को तैयार : भारत”। जागरण ब्यूरो की इस खबर की शुरू की 16 लाइनों का एक पूरा पैराग्राफ पढ़ने के बाद भी यह पता नहीं चला कि भारत की ओर से यह बात कितने कही है। इसके साथ फोटो पाकिस्तान के उप उच्चायुक्त की है और जाहिर है बयान उनका नहीं है। जागरण के दूसरे शीर्षक भी वीर रस से ओत-प्रोत हैं। चार कॉलम का शीर्षक है, बेबस इमरान ने फिर की बातचीत की पेशकश। पांच कॉलम में बॉटम का शीर्षक है, अगर युद्ध छिड़ा तो कंगाल हो जाएगा पाकिस्तान। विपक्ष का साझा बयान पहले पन्ने पर नहीं है।

अमर उजाला में मुख्य खबर का शीर्षक है, नापाक इरादे से घुसे पाकिस्तानी एफ-16 को उड़ाया। तीन उपशीर्षक है, “भारत ने मिग खोया : हमारा विंग कमांडर भी पाकिस्तान की गिरफ्त में है” दूसरा उपशीर्षक है, “भारत ने चेताया : अभिनंदन सुरक्षित चाहिए, जांबाज को कोई आंच न आए” और तीसरा “रंग बदलता रहा पड़ोसी : हिमाकत के बाद शाम को अमन की गुहार।” इसके साथ अखबार ने मोदी जी की फोटो के साथ एक खबर छापी है, जवाब के लिए सेना को पूरी आजादी और इसके नीचे ही है, 21 विपक्षी दलों ने की सेना की तारीफ, राजनीतिकरण पर चिन्ता। अखबार ने सुषमा स्वराज के बयान को भी पहले पन्ने पर रखा है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। जनसत्ता में रहते हुए लंबे समय तक सबकी ख़बर लेते रहे और सबको ख़बर देते रहे। )

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