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लाखों किसानों-मज़दूरों की रैली दिल्ली के किसी प्रमुख हिंदी अख़बार के पहले पन्ने पर जगह न पा सकी !

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भारत अभूतपूर्व कृषि संकट से गुज़र रहा है। इतिहास में पहली बार लाखों किसानों का ख़ुदकुशी करना दर्ज हुआ है। ज़ाहिर है, यह सबसे बड़ा मुद्दा होना चाहिए। लेकिन अफ़सोस, यूँ उपेक्षा भाव रखने वाला मीडिया तब भी नहीं पसीजा जब 5 सितंबर को लाखों किसानों और मज़दूरों ने राजधानी दिल्ली में मार्च किया। रामलीला मैदान से लेकर संसद मार्ग तक लाल झंडे ही लाल झंडे लहरा रहे थे, लेकिन ख़ासतौर पर हिंदी अख़बार इस तरफ़ से आँख मूँदे रहे। एक भी हिंदी अख़बार ने पहले पन्ने पर दिल्ली पर दी गई इस ज़ोरदार दस्तक की विस्तृत ख़बर देना ज़रूरी नहीं समझा।

इसकी पड़ताल करने के लिए मीडिया विजिल ने दिल्ली से प्रकाशित होने वाले सबसे ज़्यादा प्रसारित होने वाले अख़बारों की पड़ताल की।

नवभारत टाइम्स — यह दिल्ली में सबसे ज़्यादा प्रसारित होने वाला हिंदी अख़बार कहा जाता है। नभाटा ने पेज नंबर 8 पर एक छोटी सी ख़बर लगाकर अपनी ज़िम्मेदारी पूरी कर ली। ख़बर भी विज्ञप्ति लग रही थी। साथ में ट्रैफिक डिस्टर्ब होने का बाक्स भी लगाना नहीं भूला गया था।

हिंदुस्तान – तरक्की का नया नज़रिया बताने वाला हिंदी हिंदुस्तान ने रैली से ज़्यादा जाम की ख़बर  देना ज़रूरी समझा । पेज नंबर 6 पर रैली की वजह से जाम की खबर देने के बाद पेज नंबर 9 पर रैली की खबर है। यहाँ भी विज्ञप्ति नुमा।

 

दैनिक जागरण, ख़ुद को हिंदी का नंबर एक अख़बार है। लेकिन लाखों हिंदीभाषी ग़रीबों का दिल्ली पहुँच कर सरकार को चेतावनी देने की खबर  उसने पेज नंबर 4 पर सरका दी। इस छोटी सी दो कॉलम ख़बर से जैसे औपचारिकता भर निभाई गई। हद तो यह कि हे़डलाइन में रैली की वजह या माँग नहीं, लोगों को जाम से हुई परेशानी का ज़िक्र था।

अमर उजाला ने बड़ी कृपा की जो पहले पेज पर तस्वीर दी। पर खबर यहाँ भी पेज नंबर तीन पर ही थी।

 

दैनिक भास्कर ने पेज नंबर 2 पर तस्वीर समेत छोटी से खबर लगाई है। हालांकि भास्कर ने हेडलाइन में ढाई लाख लोगों की रैली बताया है। सवाल है कि जब ढाई लाख किसान मज़दूर दिल्ली आ गए तो पहले पेज पर ख़बर क्यों नहीं ?

 

इस मामले में अंग्रेज़ी अख़बारों ने ज़्यादा संवेदनशीलता दिखाई। हालाँकि सबसे बड़े मीडिया संस्थान का नंबर एक अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने रैली की ख़बर सिर्फ़ सिंगल कॉलम में दी है। वह भी पेज नंबर 12 पर। अख़बार में रैली की ख़बर ढूँढना मुश्किल था।

हिंदस्तान हिंदी ने चाहे ख़बर को चलताऊ अंदाज़ में पेश किया हो, लेकिन इसी संस्थान के अंग्रेज़ी हिंदुस्तान टाइम्स ने पहले पन्ने पर तस्वीर और ज़रूरी जानकारियों के हेडर दिए। इसके अलावा पेज नंबर तीन पर विस्तार से रैली में आए लोगों, उनकी माँगों के बारे में जानकारी दी।

 

इंडियन एक्सप्रेस में भी बेहतर कवरेज था। पहलेप पन्ने पर तस्वीर (इस ख़बर के साथ दी गई मुख्य तस्वीर, सबसे ऊपर) और पेज नंब 5 नबर पर विस्तार से खबर दी गई।