Home अख़बार भाजपा का ‘राष्‍ट्रीय उपराष्‍ट्रपति’ कौन है? चौंक गए? दैनिक जागरण पढि़ए…

भाजपा का ‘राष्‍ट्रीय उपराष्‍ट्रपति’ कौन है? चौंक गए? दैनिक जागरण पढि़ए…

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क्‍या आप जानते हैं कि भारतीय जनता पार्टी के राष्‍ट्रीय राष्‍ट्रपति कौन हैं? नहीं जानते? कोई नहीं। चलिए, ये बता दीजिए कि भाजपा का राष्‍ट्रीय उपराष्‍ट्रपति कौन है। अरे? ये भी नहीं जानते? तब तो आपको दैनिक जागरण पढ़ना चाहिए। वो भी साधारण जागरण नहीं, जागरण जोश।

दैनिक जागरण के सप्‍लीमेंट जागरण जोश का कहना है कि भाजपा में एक राष्‍ट्रीय उपराष्‍ट्रपति होता है और इस समय विनय सहस्रबुद्धे नाम के सज्‍जन इस पद पर हैं, जो कि महाराष्‍ट्र से राज्‍यसभा सांसद भी हैं। अपने ज्ञान पर ज्‍यादा भरोसा हो तो यह ख़बर देखिए।

भारतीय सांस्‍कृतिक संबंध परिषद के नए अध्‍यक्ष के बतौर आरएसएस के अपने बुद्धिजीवी विनय सहस्रबुद्धे की नियुक्ति की इस खबर में उनका जो परिचय दिया गया है, उसमें उन्‍हें भाजपा का राष्‍ट्रीय उपराष्‍ट्रपति बताया गया है।

भाजपा में एक राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष है और दर्जन भर राष्‍ट्रीय उपाध्‍यक्ष। इसके अलावा कुछ महासचिव और सचिव भी हैं। विनय सहस्रबुद्धे दर्जन भर उपाध्‍यक्षों में से एक हैं जो महाराष्‍ट्र का प्रतिनिधित्‍व करते हैं। उन्‍हें 2014 में चार राज्‍यों के चुनाव से पहले उपाध्‍यक्ष बनाया गया था।

ऊपर से देखें तो ऐसा लगता है कि खबर लिखने वाले ने अंग्रेज़ी से खबर का अनुवाद करते हुए national vice-president को राष्‍ट्रीय उपराष्‍ट्रपति लिख दिया है। इसमें हालांकि एक दिक्‍कत ये है कि खबर में शारदा नंद नाम की बाइलाइन लगी है। इसका मतलब कि इस नाम के रिपोर्टर ने मूल हिंदी में ही खबर फाइल की है। तो गलती रिपोर्टर से भी हो सकती है और डेस्‍क से भी। दोनों संभावनाएं हैं।

एक तीसरी संभावना जो प्रबल है, वो यह है कि खबर किसी एजेंसी से अंग्रेज़ी में आई हो जिसका गलत अनुवाद कर के रिपोर्टर ने बाइलाइन ले ली हो। ऐसा अखबारों में अकसर होता है जिस पर सबकी मौन सहमति होती है।

बहरहाल, इस खबर में एक और दिलचस्‍प नज़ारा सबसे अंत में है। जागरण का जोश सप्‍लीमेंट उन युवाओं के लिए निकाला जाता है जो प्रतिस्‍पर्धी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। जागरण जोश की अलग से एक वेबसाइट भी है जो दावा करती है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कामयाबी के लिए वह देश की नंबर वन वेबसाइट है। छोटे शहरों के युवा बेशक जागरण के इस सप्‍लीमेंट पर भरोसा भी करते होंगे। खबर के नीचे इसी लिहाज से एक वाक्‍य अंग्रेज़ी में पूछा गया है- क्‍या यह आलेख परीक्षाओं के लिए महत्‍वपूर्ण है? जवाब खुद ही जागरण ने लिख दिया है- हां। इसे बाकायदे हाइलाइट किया गया है।

अब सोचिए, इस खबर को पढ़कर कोई युवा क्‍या-क्‍या समझ सकता है? पहला तो यही, कि भाजपा में कोई राष्‍ट्रीय उपराष्‍ट्रपति होता है। फिर वह राष्‍ट्रीय राष्‍ट्रपति की तलाश करने लग जा सकता है। थोड़ा समझदार परीक्षार्थी जो उपराष्‍ट्रपति वेंकैया नायडू का नाम जानता होगा, वह मान लेगा कि नायडू इस पर नहीं रहे। और भी बहुत संभावनाएं हैं। दिमाग दौड़ाने की बात है। मूर्खताओं से मूर्खताओं का ही सृजन हो सकता है क्‍योंकि मूर्खता की कोई सीमा नहीं है।