Home अख़बार किसानों के ‘लाल आक्रोश’ से घबराए अख़बार! जागरण ने ख़बर गोल की!

किसानों के ‘लाल आक्रोश’ से घबराए अख़बार! जागरण ने ख़बर गोल की!

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माना जाता है कि हिंदी अख़बार, अंग्रेज़ी की तुलना में देश की माटी से बेहतर जुड़ाव रखते हैं, लेकिन मुंबई में उमड़ी किसान आक्रोश की लाल लहर को देखकर हिंदी अख़बारों के हाथ काँपते नज़र आ रहे हैं। इस ऐतिहासिक घटना को तुलनात्मक रूप से अंग्रेज़ी अख़बारों ने बेहतर कवर किया है। हिंदी अख़बारों ने या तो ख़बर दी नहीं, या महज़ किसानों का मार्च मुंबई पहुँचने की सूचना दी है। जबकि अंग्रेज़ी अख़बारों ने उनकी माँगों और आंदोलन के अन्य पहलुओं पर भी प्रकाश डाला है।

मीडिया विजिल ने इन अख़बारों के दिल्ली संस्करणों की समीक्षा की तो नतीजा चौंकाने वाला रहा।

हिंदी ही नहीं, प्रसार के लिहाज से दुनिया में नंबर वन होने का शोर मचाने वाले दैनिक जागरण की नज़र में हज़ारों की तादाद में किसानों का 180 किलोमीटर पैदल चलकर मुंबई पहुँचना ख़बर ही नहीं है। जबकि मुंबई में जैसा सेटअप इस अख़बार के पास है, शायद ही किसी हिंदी अख़बार के पास हो। हमने ढूँढने की बहुत कोशिश की लेकिन दिल्ली संस्करण में यह ख़बर नज़र नहीं आई !

अब आइए अमर उजाला पर। यह अख़बार जागरण की तुलना में बेहतर होने के तमाम दावों को अब ‘अतीत की भूल’ की तरह ले रहा है। जागरण बनने की ख़्वाहिश पूरी है। बहरहाल, किसी तरह सिंगल कॉलम ख़बर देकर अमर उजाला ने तकनीकी रूप से ख़ुद को बरी करने की कोशिश की है।

वहीं, दिल्ली के सबसे लोकप्रिय नवभारत टाइम्स का हाल भी अच्छा नहीं है। दिल्ली संस्करण के पेज नंबर 16  यानी आख़िरी पेज पर दो कॉलम फोटो के साथ छह-सात लाइन की सूचना चिपकाकर औपचारिकता निभा दी गई है।

 

वहीं, दैनिक हिंदुस्तान ने भी इस ख़बर को पेज नंबर 2 पर सिंगल कॉलम में निपटाया है। हालाँकि साथ में एक तस्वीर है।

जनसत्ता ने पहले पेज पर ख़बर तो नहीं दी लेकिन तस्वीर के साथ किसानों के मुंबई पहुँचने की सूचना दी है।  वहीं, दैनिक भास्कर ने पेज नंबर 14 पर दो कॉलम फोटो के साथ सूचना छापी है। 

इस मामले में अंग्रेज़ी अख़बारों का कवरेज बेहतर रहा। इंडियन एक्सप्रेस ने इसे पहले पन्ने की लीड बनाया है। पाँच कॉलम तस्वीर और इतनी ही बड़ी ख़बर दी है। साथ में पेज नंबर 9 पर कविता अय्यर का एक लेख भी दिया है जिससे हम जान सकते हैं कि यह आंदोलन केवल क़र्ज़ माफ़ी के लिए नहीं, बल्कि ‘वन अधिकार क़ानून’ लागू कराने के लिए है और इस मार्च में आदिवासियों की बड़ी तादाद शामिल है।

हेडिंग में एक्सप्रेस ने ‘मुंबई में किसानों का समुद्र’ होने की बात की है, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि फ़ोट कैप्शन में सिर्फ ‘सैकड़ों किसान’ दर्ज है।

दिल्ली से प्रकाशित टाइम्स अॉफ इंडिया ने पेज नंबर 8 पर चार कॉलम की खबर फोटो समेत दी है। वहीं हिंदुस्तान टाइम्स ने पहले पन्ने पर तीन कॉलम तस्वीर और पेज 10 पर तस्वीर के साथ 5 कॉलम  ख़बर दी है।

 

बर्बरीक



 

1 COMMENT

  1. बेहद जरूरी विश्लेषण, टीम को बधाई। हिंदी अखबारों में खबर का न होना, खबर पर काेई पैकेजिंग न होना, मुझे बहुत खला। मैंने इस पर सवाल भी किया तो एक जानकार ने इसे यह कहकर सिरे से नकार दिया कि महाराष्ट्र में किसानों ने कोई पहली बार आंदोलन नहीं किया है। स्‍थानीय पठनीयता नहीं है।

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