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रमन सिंह सरकार की नई नज़ीर, अखबारी विज्ञापन को भी कांग्रेस हुई मोहताज

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अभी तक राजनीतिक दबाव से खबरों को रुकवाने की बात आपने सुनी होगी। ऐसा पहली बार हो रहा है कि अखबारों पर राजनीतिक दबाव डालकर विपक्षी दल के विज्ञापन को छपने से रुकवाया जा रहा है। आज के इंडियन एक्‍सप्रेस में एक ख़बर छपी है कि राज्‍य की कांग्रेस इकाई ने प्रेस काउंसिल को एक पत्र लिखते हुए बताया है कि वहां के पांच अखबारों ने सरकारी दबाव में पार्टी के विज्ञापन छापने से मना कर दिया।

छत्‍तीसगढ़ कांग्रेस के अध्‍यक्ष भुपेश बघेल ने प्रेस परिषद को लिखे एक पत्र में आरोप लगाया है कि हिंदी के पांच अखबारों- नाम नहीं लिया- ने राज्‍य सरकार के दबाव में कांग्रेस पार्टी द्वारा जारी पूरे पन्‍ने का विज्ञापन छापने से इनकार कर दिया। ये विज्ञापन गुरुवार को प्रकाशित होने थे जब बीजेपी के अध्‍यक्ष अमित शाह का रायपुर दौरा लगा था। शाह यहां अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र पार्टी को मजबूत करने के लिए आए हैं और तीन दिन के प्रवास में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ 22 बैठकें करेंगे। हर अखबार को गुरुवार को पहले पन्‍ने पर शाह का स्‍वागत करते हुए भाजपा के विज्ञापन थे।

प्रेस काउंसिल के अध्‍यक्ष को लिखे पत्र में बघेल ने कहा है, ”बीजेपी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अमित शाह 8 से 10 जून के बीच छत्‍तीसगढ़ में हैं और विपक्षी दल होने के नाते हम रमन सिंह के भ्रष्‍टाचार से जुड़े मामले पर शाह से कुछ सवाल करना चाहते थे। इसी को दिमाग में रखकर राज्‍य की कांग्रेस कमेटी ने 7 जून को विज्ञापन जारी करने का फैसला लिया था ताकि 8 जून को वह छप सकेा पांच प्रमुख अखबारों ने हमारे विज्ञापन छापने से इनकार कर दिया। उन्‍होंने इसकी कोई आधिकारिक वजह तो नहीं बताई, लेकिन विज्ञापन के प्रभारियों से आंतरिक चर्चा में यह बात सामने आई है कि अगर वे विज्ञापन छाप देते, तो उन्‍हें सरकार की ओर से दिक्‍कत खड़ी हो जाती। मैं आपके संज्ञान में यह बात लाना चाहता हूं कि सरकार लोकतंत्र के चौथे खंबे पर दबाव डालना शुरू कर चुकी है और वह इस हद तक है कि विपक्षी दल अब पैसा खर्च कर के भी अपना मुद्दा नहीं उठा सकता।”

इंडियन एक्‍सप्रेस से बातचीत में एक सरकारी अधिकारी ने ऐसे किसी फ़रमान से अनभिज्ञता जताई है। उनका कहना था कि हो सकता है अखबारों ने खुद ही यह फैसला लिया हो।

छत्‍तीसगढ़ में पहले से ही मीडिया पर भारी बंदिशें हैं और रायपुर से लेकर दंतेवाड़ा तक पत्रकारों को दबाव में सरकारी लाइन पर काम करना होता है। जो कोई सरकार का विरोध करता है, उसे इसकी सज़ा भी भुगतनी होती है। पिछले कुछ वर्षों में कई पत्रकारों को यहां नक्‍सली समर्थक कह कर जेल में डाला गया है तो कई को धमकियां दी गई हैं और नौकरी से निकाला गया है।

यह अपने आप में अनूठी बात है कि जो काम विशुद्ध व्‍यावसायिक है और पैसे खर्च कर के होता है, उसमें भी अब सरकार टांग अड़ा रही है। यह मामला चौथे खंबे की आजादी का नहीं है बल्कि चौथे खंबे को इस्‍तेमाल करने देने पर पाबंदी का है। इस बात की कल्‍पना सहज ही की जा सकती है कि जब विज्ञापन तक सरकार के विरोध में नहीं छप रहे, तो खबरों का क्‍या हाल होगा।

 

 

 

 

1 COMMENT

  1. Wait 4 sometime ! And you Will find all print, television media of India is owned by 1 MAN.BJP WILL RULE WITHOUT ANY OPPOSITION. EVEN IN BJP MODI WILL NOT CARRY HIS FOREIGN MINISTER. And media will be something like it .–“They are pissing on us and media telling it’s raining !”

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