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कार्यक्रम में मौजूद था संपादक फिर भी डीएनए ने छापा ‘भूत’ का बयान !

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विनीत कुमार

 

सॉरी डीएनएन ! लेकिन जो स्पीकर पूरे सत्र में थीं ही नहीं, उन्होंने क्या कहा, आपने कैसे छाप दिया ? ये कैसी पत्रकारिता है…

कायदे से मुझे अंग्रेजी अखबार डीएनए का शुक्रिया अदा करना चाहिए कि उन्होंने मेरी बहुत ही सुंदर तस्वीर छापी है. जितना स्मार्ट मैं इस तस्वीर में दिख रहा हूं, वैसे असल में बिल्कुल नहीं हूं लेकिन इस राइट अप को देखकर बड़ा झटका लगा. लिहाजा अखबार को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर जो स्पीकर पूरे सत्र में मौजूद थीं ही नहीं, उन्होंने क्या कहा, अखबार ने छाप कैसे दिया ? इसमें अखबार ने छापा है कि ब्लॉगर अदिति माहेश्वरी गोयल ने कहा कि…..

इस तस्वीर में जिस शख्स की चर्चा की गयी है वो मौजूद नहीं थीं. इस सत्र का मॉडरेटर मैं था. मुझे इस बात का रत्तीभर भी अफसोस नहीं है कि अखबार ने इस बात की कहीं नहीं चर्चा कि जो कि एक घंटे तक लगातार सुधीर चौधरी, अनु सिंह चौधरी और राजीव पुन्नोली से सवाल करता रहा. मेरे उपर इस बात का दबाव था कि कार्यक्रम के बीच में इनमे से कोई वक्ता सवाल का जबाव देने से मना न कर दे, कुछ गड़बड़ न हो जाए. पूरे सत्र को ठीक-ठाक तरीके से ले जाना मेरी जिम्मेदारी थी. मैंने इसके लिए बहुत मन से और ढंग से तैयारी की थी.

ये सत्र ढाई बजे से शुरू होना था. एक घंटे पहले जीजेएलएफ की तरफ से मेल आया कि आपके पैनल की एक स्पीकर अदिति माहेश्वरी गोयल पारिवारिक कारणों से नहीं आ सकतीं. उनके बदले अनु सिंह चौधरी होंगी. अनु इससे ठीक पहले के सत्र में साथ थीं तो हमने जल्दी-जल्दी पूरे सत्र को नए सिरे से डिजायन किया.

मुझे नहीं पता कि अखबार की रिपोर्टिंग का आधार क्या होता है ? लेकिन ये जरूर है कि कम से कम सत्र में जो लोग मौजूद थे, उनकी बातें शामिल की जातीं और मेरे जैसे शख्स की बात और नाम को शामिल किया जाना जरूरी नहीं था तो तस्वीर भी न छापते. अनु की तस्वीर छापी है तो बताते कि अनु ने क्या कहा ? ये पत्रकारिता का कौन सा रूप है जिसमे जो नहीं है आप सरेआम बता रहे हो कि उन्होंने क्या कहा ?

आप सुधीर चौधरी ने पूरे सत्र में क्या कहा, बेहतर हो, वीडियो ट्रांसक्राइव करके शब्दशः छाप दें. मेरी सारी बातें हटां दें. वो डिजर्व भी करते हैं. आखिर वो डीएनए के एडिटर इन चीफ हैं. आप अपने चीफ को खुश नहीं रखेंगे तो क्या अपने पाठकों को खुश रखेंगे. लेकिन तब ये मत कहिए कि आप पत्रकारिता कर रहे हैं. इससे जितनी आपकी विश्ववसनीयता पर सवाल उठेंगे,बेवजह जेएलएफ पर भी उंगलियां उठायी जाएंगी. आपको इस तरह से एक प्रीमियम ब्रांड की छवि खराब करने का हक नहीं है.

इस सत्र का वीडियो वर्चुअल स्पेस पर उपलब्ध होगा, आप चाहें तो देख सकते हैं कि किसने क्या कहा ?

आप सोचिए कि हमारे आंख के सामने की घटना और कार्यक्रम की रिपोर्टिंग अखबार ने जब इस तरह से की तो बाकी चीजों के साथ किस तरह का मैनिपुलेशन करते होंगे ? कहीं ऐसा तो नहीं कि आप स्पीकर के बोलने से पहले से ही ड्राफ्ट तैयार करके रख लेते हैं कि किसने क्या बोला के बजाय किसे क्या बोलते हुए बताना है, छापना है ?



(विनीत कुमार मीडिया समीक्षक और शिक्षक हैं। )

 



 

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