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अखबारों ने कांग्रेस के घोषणापत्र पर डॉ. मनमोहन सिंह के बयान को कोई जगह क्‍यों नहीं दी?

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विदेश में रखा काला धन वापस आ जाए तो देश में हर व्यक्ति को 15 लाख रुपए मिल सकते हैं, का सपना दिखाकर सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी की नरेन्द्र मोदी सरकार ने विदेश में रखा काला धन वापस लाने के लिए क्या किया इसका कोई प्रचार-विज्ञापन तो सुनने में नहीं आया (15 लाख मिलेंगे ये तो जुमला था, मान लिया) पर अरबों के सच्चे-झूठे प्रचार में मुझे 15 लाख का प्रचार भी सुनने को नहीं मिला। भाजपा ने ऐसे और जो काम किए उसकी चर्चा अभी विषयांतर कर देगी इसलिए मुद्दे की बात यही है कि राहुल गांधी ने इससे “सीखकर” अपने चुनाव घोषणा पत्र में यह एलान कर दिया कि उनकी पार्टी सत्ता में आई तो यह सुनिश्चित करेगी कि हर करीब परिवार की न्यूनतम आय कम से कम छह हजार रुपए महीना हो। और जो इतना कमाते हैं उन्हें भी हर महीने अधिकतम छह हजार रुपए देकर कोशिश की जाएगी कि उनकी आय 12 हजार रुपए प्रति माह हो जाए।

सुनने में यह एक अच्छी योजना लगती है। इसलिए भी कि जिनकी थोड़ी बहुत आय है उनकी बढ़ जाएगी और जो 6,000 रुपए महीने तक की मामूली कमाई कर रहे हैं उनकी आय 12 हजार रुपए हो जाएगी। कम से कम छह हजार रुपए और जो कमा रहे हैं उन्हें भी छह हजार रुपए – न्यूनतम 12 हजार रुपए जो भिन्न योजनाओं में मिलने वाली सरकारी राशि के मुकाबले न्यूनतम आय के लिहाज से एक अच्छी राशि है। अभी यह घोषणा ही है और इसमें कोई दो राय नहीं है कि इसका हश्र भी 15 लाख की तरह हो सकता है। पर भाजपा में इसे लेकर इतनी घबराहट रही कि क्या कहने। आमतौर पर सरकारी घोषणा पत्र और सत्तारूढ़ दल की घोषणाओं की चर्चा होती है लेकिन इस बार भाजपा के “संकल्प पत्र” के मुकाबले कांग्रेस का घोषणा पत्र इतना सफल रहा कि उसे प्रधानमंत्री तक को ढकोसला पत्र कहना पड़ा। भाजपा के संकल्प में अनुवाद और टाइपिंग की गलतियों की ही चर्चा हुई।

न्याय योजना के बारे में तरह-तरह की अफवाह फैलाई गई और सत्तारूढ़ दल इतनी परेशान दिखी जैसे उसके सरकार में रहते हुए कांग्रेस ने पैसा देना शुरू कर दिया हो। इसी क्रम में सरकार समर्थकों द्वारा यह भी कहा गया कि इसके लिए पैसे कहां से आएंगे और टैक्स बढ़ाना पड़ेगा आदि। हालांकि कांग्रेस ने पहले ही दिन बता दिया था कि उसकी योजना कैसे लागू की जा सकती है। हालांकि, अभी मुद्दा यह नहीं है कि कांग्रेस ने क्या कहा और किया बल्कि यह है कि कांग्रेस की न्याय योजना के खिलाफ भाजपा ने जो कहा वह खूब छपा। ठीक है, छपना भी चाहिए। कांग्रेस का पक्ष भी छपता रहा है। लेकिन कल पूर्व प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री रह चुके और देश के जाने-माने अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह ने कहा ‘न्याय’ से मध्यम वर्ग पर टैक्स का बोझ नहीं बढ़ेगा तो यह एक बड़ी खबर थी।

देश में अर्थव्यवस्था का जो हाल है उसमें न्याय जैसी योजना पर मनमोहन सिंह का यह कहना मायने रखता है कि उसे लागू किया जा सकता है। यह चुनाव प्रचार हो तो भी सुनने जानने और समझने की चीज है। खासकर तब जब यह कहा जाता रहा है कि कांग्रेस ने गरीबी हटाओ की योजना से गरीबों को लूटा है, गरीबी दूर नहीं हुई है। ऐसे में मनमोहन सिंह ने कहा, ‘न्याय’ योजना एक शक्तिशाली स्कीम है, जो एक तरफ हमारे देश से बची खुची गरीबी हटाएगी और वहीं दूसरी तरफ ठहरी हुई अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करेगी। मुझे खुशी हो रही है कि न्याय योजना को सभी नागरिकों ने बहुत पसंद किया है और इस पर देशभर में विस्तृत चर्चा हो रही है।’

यह खबर आज अंग्रेजी दैनिक द टेलीग्राफ में पहले पन्ने पर चार कॉलम में है। दूसरे अखबारों में मुझे यह खबर पहले पन्ने पर तो नहीं दिखी। हो सकता है अंदर हो पर खबर ऐसी है कि पहले पन्ने पर होनी चाहिए थी। चुनाव प्रचार के लिए हो तब भी या खासतौर से इसीलिए। जब अखबारों ने इसके खिलाफ जो कहा गया उसे छापा है तो इसे भी प्रमुखता से छापना चाहिए था। वैसे भी अखबारों ने भाजपा को जितनी जगह पहले पन्ने पर दी है उतनी जगह कांग्रेस को नहीं ही मिली है। इसके अलावा, यह न्याय योजना पर भाजपा के आरोपों का जवाब है।

पूरी विज्ञप्ति इस प्रकार है, 25 मार्च, 2019 को कांग्रेस अध्यक्ष, राहुल गांधी ने न्याय – ‘न्यूनतम आय योजना’ प्रस्तुत की। यह योजना दोहरे उद्देश्य वाली एक शक्तिशाली योजना है, जो एक तरफ हमारे देश से बची खुची गरीबी हटाएगी वहीं रुकी हुई अर्थव्यवस्था को पुनः गति देगी। न्याय के तहत भारत के 20 प्रतिशत सर्वाधिक गरीब परिवारों में से प्रत्येक परिवार को 72,000 रुपए प्रतिवर्ष की सहयोग राशि दी जाएगी। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि न्याय योजना को देश के नागरिकों ने बहुत पसंद किया और इस योजना पर पूरे देश में विस्तृत चर्चा हो रही है।

जब 1947 में भारत को ब्रिटिश राज से आजादी मिली, उस समय लगभग 70 प्रतिशत भारतीय नागरिक गरीबी सीमा के नीचे थे। आजादी के बाद पिछले सात दशकों में बनी विभिन्न केंद्र सरकारों द्वारा अपनाई गई मजबूत नीतियों के चलते गरीबी का स्तर 70 प्रतिशत से घटकर 20 प्रतिशत पर आ गया। अब समय है, जब हम बची हुई गरीबी को दूर करने के लिए अपना संकल्प पुनः दोहराएं।

न्याय योजना हर भारतीय परिवार के लिए उसकी गरिमा व सम्मान सुनिश्चित करेगी। सीधे आय का सहयोग प्रदान कर, न्याय गरीबों को आर्थिक स्वतंत्रता व सम्मान प्रदान करेगी। न्याय योजना के साथ भारत न्यूनतम आय गारंटी के युग में प्रवेश करेगा और नए कल्याणकारी राज्य के लिए नए सामाजिक अनुबंध का निर्माण करने में मदद करेगा।

न्याय हमारे आर्थिक इंजन को पुनः प्रारंभ करने में मदद करेगा, जो आज ठहराव की स्थिति में आ गया है। जरूरतमंद लोगों के हाथ में पैसा पहुंचने से मांग उत्पन्न होगी और आर्थिक गतिविधियां बढ़ने से नौकरियों की संभावना बनेगी। इस प्रभाव को अर्थशास्त्रियों द्वारा कीनेशियन प्रभाव कहा जाता हैं। जब निजी निवेश और औद्योगिक उत्पादन कम है, उस समय न्याय योजना अर्थव्यवस्था को पुनः जीवित करेगी और नई फैक्ट्रियों एवं नौकरियों की संभावना तैयार करेगी।

कांग्रेस वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए समर्पित है। न्याय योजना पर भारत की जीडीपी का ज्यादा से ज्यादा 1.2 प्रतिशत से 1.5 प्रतिशत खर्च होगा। लगभग तीन ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की हमारी अर्थव्यवस्था यह खर्च वहन करने में समर्थ है। न्याय के कारण मध्यम वर्ग पर किसी भी प्रकार का कोई नया टैक्स बोझ डालने की जरूरत नहीं होगी। न्याय योजना द्वारा अर्थव्यवस्था को मिली गति से यह वित्तीय अनुशासन बनाने में बल्कि ज्यादा मदद मिलेगी। न्याय योजना काफी विचार-मनन और विशेषज्ञों द्वारा परामर्श लिए जाने के बाद बनाई गई है।

जिस प्रकार हमने 1991 में डि-लाईसेंसिंग नियम, फिर मनरेगा के तहत सभी को काम के अधिकार के साथ भारत के विकास के नए कीर्तिमान बनाए थे, उसी प्रकार मुझे विश्वास है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार न्याय योजना का क्रियान्वयन भी सफलतापूर्वक करेगी और सामाजिक न्याय एवं बुद्धिमत्तापूर्ण अर्थव्यवस्था के नए मॉडल की शुरुआत करेगी। मेरा विश्वास है कि न्याय में भारत को विकास के मार्ग पर आगे बढ़ाते हुए दुनिया में ‘गरीबी-मुक्त’ देशों की सूची में लाने की सामर्थ्य है। मुझे उम्मीद है कि मेरे सामने ही हमारा देश यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर लेगा।

यह कांग्रेस का पक्ष हो तब भी न्याय योजना पर एक राय और जानकारी देती है। सूचना के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। यही नहीं, आज के अखबारों में प्रधानमंत्री के भाषण के जो अंश शीर्षक बने हैं उसके मुकाबले यह खबर ज्यादा अच्छी और संतुलित है। आपने खबर पढ़ ली अब यह भी जानिए कि प्रधानमंत्री ने कल अपने भाषणों में क्या कहा और किन अखबारों ने अपने पहले पन्ने पर क्या छापा है।

बुआ और बबुआ की फर्जी दोस्ती 23 मई तक ही चलेगी : मोदी; एटा में बोले पीएम – फिर शुरू होगी दुश्मनी पार्ट टू (अमर उजाला); स्पीड ब्रेकर दीदी की नीन्द उड़ी : मोदी (जनसत्ता); मोदी ने साध्वी प्रज्ञा का बचाव किया, कांग्रेस पर उठाए सवाल …. बाटला हाउस में आतंकी मारे तो कांग्रेस नेता रो रहे थे : मोदी (दैनिक भास्कर); बटला कांड पर आंसू बहाना क्या अपमान नहीं था : मोदी (नवभारत टाइम्स); हमला : मोदी ने कहा, एक तरफ राष्ट्रभक्ति, दूसरी ओर वोट भक्ति (हिन्दुस्तान) और देश में दो राजनीति, वोट भक्ति व देश भक्ति : मोदी। मैं जो अखबार देखता हूं उनमें अंग्रेजी वाले किसी ने भी प्रधानमंत्री के इन भाषणों को पहले पन्ने पर नहीं छापा है और जिनका शीर्षक यहां नहीं है उन्होंने भी नहीं छापा है। पर मनमोहन सिंह की खबर किसी ने पहले पन्ने पर नहीं छापी है।

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