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‘फ़्री सेक्स’ का अर्थ ‘मुफ़्त’ नहीं मुक्त भाव से किया गया संभोग है, महोदय संपादक !

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याद कीजिए फरवरी 2016 के वे दिन। कुछ टीवी चैनलों ने जेएनयू को देशद्रोही साबित करने का अभियान चला दिया था। (जिन नक़ाबपोशों ने भारत के ख़िलाफ़ नारे लगाए थे, वे आज तक नहीं पकड़े गए। सारा निशाना वामपंथी छात्रनेताओ पर था जिनके ख़िलाफ़ सबूत नहीं हैं )। एक से एक घिनौने आरोप लगाए जा रहे थे।  बताया जा रहा था कि जेएनयू में ‘फ्री सेक्स ‘ होता है। बीजेपी का एक विधायक तो कंडोम तक गिनने लगा था। सीपीआईएमएल नेता और जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व पदाधिकारी कविता कृष्णन पर तो जैसे शिकारी टूट पड़े थे। तब कविता कृष्णन ने फ्री सेक्स  के नाम पर दी जा रही गाली को तमगा बना लिया। उन्होंने समझाया कि फ्री का मतलब मुक्त भाव से किया गया सेक्स होता है। यहाँ तक कि कविता की माँ ने भी इस विषय पर लिखा था। उस समय पत्रकार गौरी लंकेश ने कविता का समर्थन करते हुए फेसबुक पोस्ट लिखी थी।

और अब जब गौरी लंकेश की हत्या हो चुकी है तो उस पोस्ट को वायरल करके यह साबित करने की कोशिश की जा रही है कि वह कितनी ‘ चरित्रहीन ’ थी (और इसीलिए उसे मार देना ठीक था !) हद तो यह है कि इस दुष्प्रचार में तमाम पत्रकार भी शामिल हैं। कुछ तो संपादक भी हैं। ऐसे ही लखनऊ से रिश्ता रखने वाले एक बड़े अख़बार के संपादक जी हैं, जिनका पलटी मारना चर्चा में है। फिलहाल यूपी से बाहर जमे इन संपादक महोदय को फ़ेसबुक पर आईना दिखाया है लखनऊ के ही नामी सामाजिक कार्यकर्ता दीपक कबीर ने। हम उसे यहाँ इस निवेदन के साथ छाप रहे हैं कि ट्रोल बनने की राह पर बढ़ रहे पत्रकार, एक बार ठिठककर सोचें ! भविष्य में पछताने से क्या हासिल होगा…  

 

ये पहली बार देख रहा हूँ कि एक स्त्री की हत्या के बाद उसकी हत्या को जायज़ और ज़रूरी या स्वाभाविक ठहराते हुए हत्यारों के पक्ष में माहौल बनाया जा रहा है, ये सचमुच डरावना है।

ख़ैर इसके लिये उसे सच्चे-झूठे तरीके से बदनाम करना ज़रूरी था जिसके लिये पत्रिके को पैट्रिक ,कभी उसका दफ़नाना जैसी बातें की गयीं साथ ही उसकी एक साल से ज़्यादा पुराणी पोस्ट के आधार पर उसे “माँ बहन के बलात्कार को महिमा मंडित करने वाली ” स्त्री तक कहा गया। उस पोस्ट के संदर्भो को विश्लेषित करते एक पोस्ट मैंने परसों लिखी पर जाने कैसे डिलीट हो गयी थी। उधर मेरे मित्र ,वरिष्ट पत्रकार-संपादक दया सागर भाई भी गौरी लंकेश के विरुद्ध इन्ही दुष्प्रचारों में उलझे थे तो मैंने कहा था कि आप ज़रा ठीक से उसकी पोस्ट पढ़िये तो उसके अर्थ स्पष्ट हो जायेंगे,

मगर सागर भाई ने आज फिर एक गलत तथ्य उल्लेखित करते हुए गौरी की उस पोस्ट को पोस्ट किया तो मैंने उनकी वाल पर उस पोस्ट के सही सन्दर्भों का रिप्लाई कर दिया,
ये पोस्ट इस कदर वायरल है कि ज़रूरी लगा इसे और अपने “कॉमेंट” को यही पोस्ट कर दूँ। और हाँ , इस पोस्ट को कविता को किये गए निहायत घटिया ट्रोल की रौशनी में देखेंगे तो और ज़्यादा संवेदंशीलता से समझेंगे।

इस पोस्ट पर वो समाज आपत्ति कर रहा है जो अपने मोबाईल में बच्चों से लेकर बूढ़ों तक के निहायत घटिया पोर्न क्लिप्स भरे दिन भर देखता-गिजगिजाता रहता है

यौनिकता से डरा ये ढोंगी समुदाय अपने यौनकर्म को किसी “प्रेम /विवाह/सबक सिखाने या उद्धार करने जैसे परदे का इस्तेमाल करे बिना स्वीकार ही नहीं कर पाता, हाँ लालच, ज़बरदस्ती, दबाव और बलात्कार का ग्राफ भले बढ़ता जाये।इसके लिये सेक्स में ओपन होना तो बहुत दूर जब ये दबाव मुक्त सहवास का भी सही अर्थ नहीं समझता।

बहरहाल गौरी की वो पोस्ट और सागर की वाल पर मेरा रिप्लाइ।
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#आप बहुत जल्दी में हैं तो सुनिये सागर भाई , वैसे एक संपादक स्तर के पत्रकार को कड़ियाँ जोड़ने लायक स्मृति तो होनी चाहिये।

गौरी संघियों को संबोधित इस पोस्ट में लिख रही है कि अगर आपकी माँ ने अपनी ख़ुशी, चयन एवं स्वेच्छा से सम्भोग या सहवास नहीं किया था…

-तो या तो आप किसी जबरन या दबाव में किये गए सम्भोग के दौरान गर्भ में आये होंगे या फिर मूल्य चुका कर किये गए सम्भोग की उत्पत्ति होंगे।

ज़ाहिर है समाज में फिलहाल सिर्फ तीन तरीके से ही यौन कर्म संपन्न हो रहा है

1- अपनी ख़ुशी,चयन के व्यक्ति से प्रेम में

2- किसी प्रकार के दबाव,धोखे ,डरा के या प्रलोभन दे के

3- सम्भोग के एवज़ में कीमत अदा करके ।

हर संतान का यही यूटोपिया होता है कि उसके माता पिता ने किसी ख़ुशी के क्षण में प्रेम और सहमति पूर्वक अपने सम्बन्ध बनाये होंगे और उन्ही आत्मीय क्षणों के फलस्वरूप उसका जन्म हुआ होगा।

भारतीय जन मानस #फ्री या #सेक्स देखकर तुरंत अपनी आँखे तरबूज़ के साइज़ की खोल देता है और यहाँ तो #फ्री_सेक्सलिखा है 😊

फ्री सेक्स का मतलब मुफ़्त में मिलने वाला सेक्स या हर किसी से हर जगह कर सकने वाला सेक्स नहीं होता , इसका अर्थ दबाव मुक्त सम्भोग से है।

इसको आप मैरिटल रेप के सन्दर्भ में समझिये, दुनिया सहित आज भारत में भी शादी होने के बावजूद पत्नी की इक्षा के बगैर उससे ज़बरदस्ती बनाये जाने वाले संबंधों को बलात्कार की श्रेणी में डालने की मांग उठ रही है…मतलब सम्भोग अगर ख़ुशी से और ऐक्षिक अधिकार चेतना के साथ नहीं है तो वो गलत ही नहीं वरन् “अपराध” है , धार्मिक शब्दावली में आप इसे “पाप” भी कह सकते हैं।

फ्री सेक्स का अभिप्राय फ्री वर्स या फ्रीडम (दबाव रहित-स्वतंत्रता) से है ,ये #ओपन सेक्स ( स्वच्छंद यौन कर्म ) या #पेडसेक्स का पर्यायवाची कतई नहीं है।

अब गौरी की पोस्ट पर पुन जाइये वो संघियों को संबोधित करती हैं और शुरुवात करती हैं ” अगर ” से…

-मतलब वो भी मानती और चाहती हैं की जिन्हें संबोधित किया जा रहा है वो भी प्रेम और स्वैक्षिक मिलन की ही उत्पत्ति हैं मगर अगर वो इस “दबाव रहित फ्री सेक्स” को गलत मानते हैं या गन्दा मानते हैं #तब ही वो इन दोनों में किसी कैटेगरी में आयेंगे।

अब याद करिये, कुछ महीनों पहले इन्ही संघी ट्रोलर्स ने ऐपवा की नेता कविता कृष्णन को भयंकरतम गंदे तरीके से ट्रोल किया और उसकी यौनिकता उसकी पैदाइश उसकी माँ तक को निहायत घटिया बातें लिखी।

कविता ने शान्ति और पूरी हिम्मत के साथ सामना किया , वहीँ पर कविता के द्वारा इस्तेमाल किये गए अंग्रेजी में #फ्रीसेक्सशब्द के इस्तेमाल का जब संघी सही अर्थ नहीं जान पाये तो कविता की बुज़ुर्ग माँ को आकर खुद बयान देना पड़ा।

ये उस दौर में एक बहादुर जूझती महिला के पक्ष में खड़ी गौरी लंकेश की पोस्ट है। देश की बहुत सी प्रगतिशील स्त्रियां और पुरुष उसके पक्ष में खडे हुये थे, पर अभी उनकी हत्या नही हुई इसलिये आप उनकी वाल टटोलने नहीं पहुँच पाये।

अंत में …यही कहूँगा कि,

ये क्या हो गया है आप लोगों को सागर भाई ?? एक स्त्री को उसके राजनैतिक स्टैंड की वजह से रंडी, मुल्लों द्वारा किये गए बलात्कार की औलाद, और जाने क्या क्या कहा जा रहा है।। एक दूसरी औरत की उसके विचारों की वजह से या कैसे भी हत्या हो रही है…

उस हत्या को एक ख़ास वर्ग सेलिब्रेट कर रहा है,
और आप उस हत्यारी और स्त्री विरोधी मानसिकता के खिलाफ खुल कर लड़ने के ये जस्टिफाई करने में जी जान से जुट गए कि वो स्त्री भी इतनी ही घटिया थी ( तो उसकी हत्या स्वाभाविक है )

हर तरफ इनकी ट्रोल और झूठ फैक्ट्री खुली हुई है, और आप जैसे लोग ही उन्हें वैधानिकता दे रहे हैं। आज इसी ट्रोल फैक्ट्री के खिलाफ सच लिखने से गुजरात के ही एक वरिष्ट भाजपा नेता को भी निष्कासित कर दिया गया।

हम अकेले कहाँ कहाँ तक और कब तक जवाब देते फिरेंगे। पता नहीं मासूमियत में या ग़लतफ़हमी में या इरादतन-साजिशन आपकी बंदूक गलत तरफ तनी हुई है…

ख़ैर / और शान्ति के तलबगार …
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माँ तुझे सलाम ! 

(कविता कृष्णन का वह लेख जो उन्होंने चरित्रहनन अभियान के विरोध में लिखा था।)

 



 

 

1 COMMENT

  1. why RSS was against ‘free sex’…
    the ‘free sex’ though is ‘consensual sex’ but it doesn’t defers or so to say includes sex outside marriage and sex inside marriage.

    RSS, being a right wing organisation, is against sex outside marriage in general whether ‘consensual or forced..

    so these self styled liberals viz. Kavita krishnan and gauri lankesh started trolling RSS guys, saying that they are outcome of rape and all. as the lady was cunning enough she used words like ‘if’ etc. but it can’t be denied that all RSS guys were targeted in the wickedest way.

    Ideological differences you know…

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