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PM की सिफारिश पर राज्यसभा में जाने वाले देश के दूसरे भूतपूर्व CJI को जानें, तसल्ली से…

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राम मंदिर, एनआरसी और तमाम महत्वपूर्ण मामलों पर ऐतिहासिक फैसला देने वाले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई राज्यसभा के लिए मनोनीत किए गए हैं। सोमवार की देर शाम गृह मंत्रालय की ओर से एक नोटिफिकेशन जारी किया गया जिसमें कहा गया है कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को राज्यसभा के लिए नामित किया है।

गोगोई पूर्व राज्यसभा सांसद केटीएस तुलसी की जगह लेंगे! गोगोई दूसरे ऐसे मुख्य न्यायाधीश हैं जो राज्यसभा के लिये नामित हुए हैं! राष्ट्रपति की ओर से राज्यसभा के लिए 12 सदस्य मनोनीत किए जाते हैं। ये सभी 12 सदस्य अलग-अलग क्षेत्रों की जानी मानी हस्तियां होती हैं। पूर्व चीफ जस्टिस गोगोई 17 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुए] हालाँकि विपक्ष लगातार यह आरोप लगाता आया था कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश के कई फ़ैसले एकतरफ़ा और मौजूदा केन्द्र सरकार के पक्ष में हैं! चाहे वह राम मंदिर का मामला हो या एनआरसी का या फिर कश्मीर से धारा 370 को निष्क्रिय करने और कश्मीर लॉकडाउन पर चुप्पी हो! उनकी इस नियुक्ति को भी इसी तरह देखा जा रहा है केन्द्र सरकार का ये इनाम है उन्हें.

कौन हैं रंजन गोगोई?

रजंन गोगोई ने 3 अक्टूबर 2018 को भारत के 46वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। उनके पिता केशव चन्द्र गोगोई 1982 में असम राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। गोगोई 3 अक्टूबर 2018–17 नवंबर 2019 तक भारत के मुख्य न्यायाधीश रहे। वे भारत के मुख्य न्यायाधीश बनने वाले पूर्वोत्तर भारत के पहले व्यक्ति और पहले असमी हैं।

रंजन गोगोई की शुरुआती पढाई डिब्रूगढ के डॉन बोस्को स्कूल में हुई और बाक़ी की दिल्ली में। उसके बाद रंजन गोगोई भी अपने पिता की तरह वकालत सीखने के लिए 1978 से गुवाहाटी हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करने लगे। यहाँ से उन्होंने वकालत में कदम रखा। 28 फरवरी 2001 को वहीं स्थायी न्यायाधीश के तौर पर नियुक्त हुए।

12 फ़रवरी 2011 को उन्हें पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया और 13 फ़रवरी 2012 वे सुप्रीम कोर्ट लाये गये।

रंजन गोगोई के सुप्रीम कोर्ट में महत्त्वपूर्ण फ़ैसले

रंजन गोगोई ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में अनेक बड़े फैसले किये हैं और उनके कार्यकाल में सबसे बड़ा फैसला विवादित रामजन्मभूमि था। 9 नवंबर 2019 को रंजन गोगोई और उनकी पीठ ने विवादित रामजन्म भूमि विवाद पर निर्णय लिया। इनकी देख-रेख में यह सबसे बड़ा निर्णय था जो रंजन गोगोई एवं अन्य न्यायाधीशों ने किया।

अंग्रेजी और हिंदी समेत 7 भाषाओं में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को प्रकाशित करने का फैसला भी चीफ जस्टिस रहते हुए रंजन गोगोई ने ही लिया था। मालूम हो कि इससे पहले केवल अंग्रेजी में ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले प्रकाशित होते थे।

जाटों को केंद्रीय सेवाओं में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के दायरे से बाहर करने वाली पीठ में जस्टिस रंजन गोगोई शामिल थे। जस्टिस रंजन गोगोई ने असम में घुसपैठियों की पहचान के लिए राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) बनाने का निर्णय दिया था। सौम्या मर्डर मामले में ब्लॉग लिखने पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू को अदालत में जस्टिस रंजन गोगोई ने तलब किया था। जस्टिस रंजन गोगोई ने जेएनयू छात्रनेता कन्हैया कुमार के मामले में एसआईटी गठन करने से साफ इनकार कर दिया था।

विवाद जिनमें गोगोई रहे शामिल

जब सीबीआई जज बीएच लोया के हत्या के मामले को तत्कालीन न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा को सौंपा गया तो सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब रंजन गोगोई और तीन अन्य सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों में सुप्रीम कोर्ट के कामकाज पर अपने निंदा जताई। उन्होंने यह आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट में भेदभाव किया जा रहा है। प्रेस सम्मेलन के बाद न्यायमूर्ति मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के कार्य को उनकी छवि खराब करने के लिए लोगों के सामने अपनी निंदा व्यक्त की।

रंजन गोगोई पर सुप्रीम कोर्ट की ही पूर्व महिला कर्मचारी ने यौन शोषण करने का आरोप लगाया था। उस महिला ने सुप्रीम कोर्ट के 22 जजों को एक लम्बी चिट्ठी लिखकर उसमें पूरा घटनाक्रम बताया। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस अपील को सबूतों के अभाव के कारण खारिज कर दिया और रंजन गोगोई को कोर्ट ने क्लीनचिट दे दी। उसके बाद रंजन गोगोई ने कहा कि इस महिला के पीछे बहुत बड़ी ताकतों का हाथ है और यह भारत की न्यायपालिका को बदनाम करने की साज़िश है।

गोगोई की नियुक्ति का विपक्ष में विरोध

गोगोई को मनोनीत किए जाने को लेकर सियासी घमासान शुरू हो गया है। कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने पूर्व CJI को राज्यसभा सदस्य के लिए मनोनीत किए जाने पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट किया, ‘क्या यह ‘इनाम है’? लोगों को जजों की स्वतंत्रता में यकीन कैसे रहेगा? कई सवाल हैं।
कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा कि तस्वीर पूरी कहानी कहती है। उन्होंने ये भी कहा कि सरकार से वफ़ादारी करने पर राज्यसभा, राज्यपाल और सभापति जैस पद मिलते हैं और विरोध करने पर तबादला।

भाजपा के बाग़ी नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने ट्वीट कर कहा कि मैं आशा करता हूँ कि गोगोई अपना राज्यसभा का नामांकन ठुकरा दें नहीं तो ये भारतीय न्यायपालिका की साख पर एक बड़ा सवाल होगा।

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