Home ओप-एड अख़बारनामा: मोदी सरकार की छठीं सालगिरह पर मज़दूरों के ख़ून के छींटे…

अख़बारनामा: मोदी सरकार की छठीं सालगिरह पर मज़दूरों के ख़ून के छींटे…

इंडियन एक्सप्रेस ने आज दिल जीत लिया। पहले पन्ने की खबरों में सिर्फ दुर्घटना ही नहीं है। मोदी सरकार के छह साल पूरे होने पर भाजपा जिसे छह साल बेमिसाल बता रही है उसका हासिल आज इंडियन एक्सप्रेस ने अपने पहले पन्ने पर रख दिया है। हो सकता है सरकार को कोई फर्क न पड़े लेकिन यह अपना काम ईमानदारी और निष्ठा से करना है। पहले पन्ने की दूसरी प्रमुख खबरों में एक शीर्षक को हिन्दी में कुछ इस तरह लिखते, "ट्रक में जो थे : कुछ जो ट्रेन में नहीं जा पाए, मजदूर जिन्हें वेतन नहीं दिया गया।" एक और खबर का शीर्षक है, "औरैया में मरने वाले हर एक आदमी के बदले एक लाख लोग घर लौटने के इंतजार में हैं"।

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छह साल बेमिसाल का असर इंडियन एक्सप्रेस में देखिए 

 

आज के अंग्रेजी अखबारों में कल की सड़क दुर्घटना की खबर इंडियन एक्सप्रेस ने सबसे अच्छे से छापी है। मुख्य खबर का शीर्षक ट्रेजडी एंड शेम (त्रासदी और शर्म) है। अखबार ने इसके ऊपर कल उत्तर प्रदेश के औरैया में मरने वाले लोगों के नाम और उम्र लाल अक्षर में छापे हैं। उनके शहर व राज्य का नाम भी कोष्ठक में है। खबर के शुरू में ही बताया गया है कि मुख्यमंत्री ने इस दुर्घटना के बाद एसएचओ सस्पेंड कर दिए। उत्तर प्रदेश के डीजीपी ने माना कि पैदल जा रहे लोगों की संख्या बहुत ज्यादा है। जाहिर है, ऐसे में एसएचओ को मुअत्तल करना समस्या का समाधान नहीं है। जब साधन हैं नहीं और यात्रा करने वालों की संख्या ज्यादा है तो उपलब्ध खतरनाक साधनों का उपयोग किया ही जाएगा और दुर्घटनाएं होंगी ही। परिणामस्वरूप निलंबित किया जाने लगे तो वह भी होता रहेगा। तथ्य यह है कि अचानक किए गए लॉक डाउन से लाखों लोग जहां तहां फंसे हुए हैं और सरकार उनकी वापसी की उपयुक्त और पर्याप्त व्यवस्था नहीं कर रही है। शुरू में जब संक्रमित कम थे तो लोगों को रोका जा रहा था जबकि कायदे से उसी समय उन्हें भेजने की व्यवस्था की जानी चाहिए थी। अब उन्हें रोका नहीं जा रहा है और व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। फिर भी कुछ सरकार समर्थक समझ नहीं पा रहे हैं कि जब ट्रेन चल रही है तो लोग पैदल क्यों जा रहे हैं।  

मेरा मतलब रिपोर्टिंग और प्रस्तुति से है। इंडियन एक्सप्रेस ने आज दिल जीत लिया। पहले पन्ने की खबरों में सिर्फ दुर्घटना ही नहीं है। मोदी सरकार के छह साल पूरे होने पर भाजपा जिसे छह साल बेमिसाल बता रही है उसका हासिल आज इंडियन एक्सप्रेस ने अपने पहले पन्ने पर रख दिया है। हो सकता है सरकार को कोई फर्क न पड़े लेकिन यह अपना काम ईमानदारी और निष्ठा से करना है। पहले पन्ने की दूसरी प्रमुख खबरों में एक शीर्षक को हिन्दी में कुछ इस तरह लिखते, “ट्रक में जो थे : कुछ जो ट्रेन में नहीं जा पाए, मजदूर जिन्हें वेतन नहीं दिया गया।” एक और खबर का शीर्षक है, “औरैया में मरने वाले हर एक आदमी के बदले एक लाख लोग घर लौटने के इंतजार में हैं”। इस खबर में बताया गया है कि झारखंड सरकार ने घर लौटने के इच्छुक अपने लोगों से एक ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण करने के लिए कहा था। 2 से 14 मई के बीच 6.92 लाख लोगों ने पंजीकरण कराए। अभी 10 लाख से ज्यादा लोग भिन्न राज्यों में फंसे हुए हैं। और इस संख्या के बढ़ने की ही उम्मीद है। 

एक खबर भाजपा की सत्ता के छह साल पूरे होने पर भी है। इसके शीर्षक में ही कहा गया है, 119 मारे गए, अनगिनत फंसे हुए हैं सालगिरह पर सड़क हादसा। (54 दिनों में सड़कों पर मारे गए प्रवासी मजदूरों की संख्या 119 हो गई है)। इन खबरों के साथ अखबार ने पहले ही पन्ने पर सात कॉलम का बॉटम छापा है। इसका शीर्षक है, “ट्रेन लॉटरी ने प्रवासियों को मुश्किल में छोड़ा : मेरी बारी कब आएगी।” अखबार ने सिंगल कॉलम में एक और खबर छापी है, मद्रास हाईकोर्ट ने कहा, सहायता नहीं कर सकते लेकिन प्रवासियों के दुख पर रो सकते हैं, रिपोर्ट मांगी। इस खबर के अनुसार हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से 6 दिनों में यानी 22 मई तक इस मामले में जवाब मांगा है। इतनी सारी खबरों के साथ अखबार में पहले ही पन्ने पर 20,000 करोड़ का हेडलाइन मैनेजमेंट और देश में कोविड-19 का राउंडअप (तालिका के रूप में) भी है।

इसके मुकाबले आज द टेलीग्राफ की लीड है, ‘साहूकार’ सरकार।  यह कांग्रेस नेता राहुल गांधी की अपील है जो उन्होंने केंद्र सरकार से की है। असल में उन्होंने कहा है कि सरकार मनीलेन्डर जैसा व्यवहार न करे। मैंने इसका अनुवाद ‘सूदखोर साहूकार जैसा न करे’ किया था। पर बाद में न जाने क्या ख्याल आया कि मैंने चेक कर लिया। असल में मेरी छठी इंद्री ने सतर्क किया कि राहुल गांधी ने हिन्दी में कुछ और न बोला जिसकी अंग्रेजी टेलीग्राफ ने भले सही लिखी हो पर मनीलेंडर के लिए सूदखोर लिखकर बेटा फंस जाओगे। और वही हुआ उन्होंने हिन्दी के साहूकार शब्द का इसेतमाल किया है। मैं तो यही कहूंगा कि राहुल गांधी का शब्द चयन ठीक नहीं है पर अभी वह मुद्दा नहीं है। इस खबर में अखबार का एक वाक्य दिलचस्प है, बीस लाख करोड़ के पैकेज की बारीकियां बताने का काम केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर छोड़ दिया गया था और वे यह काम रोज शाम 4 बजे पूरी निष्ठा के साथ करती हैं। अनुराग ठाकुर इसमें उनकी योग्य सहायता करते हैं जिन्होंने  खुद को राज्यमंत्री अनुवाद (हिन्दी) के  रूप में नए सिरे से कौशल युक्त किया है। 

अखबार ने  पहले पन्ने के टॉप पर एक तस्वीर के ऊपर लिखा है, एक आदमी के लिए दुनिया एक मंच है … और इसके साथ कल शुरू हुए भाजपा के अभियान, मोदी सरकार के छह साल बेमिसाल का जिक्र किया है और बताया है कि उत्तर प्रदेश त्रासदी के थोड़ी ही देर बाद भाजपा ने अपने ट्वीटर हैंडल पर एक वीडियो अपलोड किया जो  छह साल पूरे होने पर खुशी मनाने के लिए है। इसके साथ की फोटो नरेन्द्र मोदी की है और दूसरी फोटो में औरैया के एक अस्पताल में एक बुजुर्ग की आंखे दिखाई गई हैं और लिखा है इसमें देश के राजमार्गों पर घट रही त्रासदी की तस्वीर है। यह व्यक्ति अरौया दुर्घटना में घायल लोगों के पोस्ट मार्टम का इंतजार कर रहा बताया गया है। आज द टेलीग्राफ का बॉटम भी पढ़ने लायक है जो चार दिन के हेडलाइन मैनेजमेंट पर अच्छी टिप्पणी है। इसका फ्लैग शीर्षक है, सुधार कोविड संक्रमित दुनिया को पछाड़ देगा। मुख्य शीर्षक है, गन उठाओ, अंतरिक्ष की यात्रा पर चलें। इसमें बताया गया है कि कैसे इस समय की जा रही घोषणाएं बेमतलब हैं और बताती हैं कि सरकार वास्तविकताओं से बिल्कुल कटी हुई है।  

हिन्दी अखबारों में दैनिक भास्कर की मुख्य खबर का शीर्षक है, हे सरकार कुछ तो करो। इसके साथ टॉप पर सिंगल कॉलम की खबर है, प्रवासी मजदूरों के लिए अब ऑनलाइन डैशबोर्ड। मजदूरों का पूरा ब्यौरा दर्ज होगा, मोबाइल नंबर से ट्रैकिंग होगी (जैसे सारे मजदूरों के पास स्मार्ट फोन होंगे ही)। इसी के नीचे दूसरी खबर है, डैश बोर्ड पर राज्य भी एक-दूसरे से आसानी से संपर्क कर सकेंगे। भास्कर की मुख्य खबर कल की दो सड़क दुर्घटनाओं के बारे में है और इनके साथ छपी खबरों के कुछ शीर्षक हैं, मां के शव के पास बिलखता रहा दो साल का मासूम, पांच मासूमों के सिर से माता-पिता का साया छिना, लॉक डाउन के 52 दिन में 134 मौतें, 61 जानें तो 8 दिन में गईं, कांग्रेस ने यूपी सरकार से हजार बसें  चलाने की इजाजत मांगी और एक मद्रास हाईकोर्ट की खबर जिसका चर्चा पहले कर चुका हूं। इसके साथ की सरकारी खबरें बताती हैं कि सरकार प्रवासियों के लिए कोई व्यवस्था अब भी नहीं कर रही है।   

इंडियन एक्सप्रेस के पहले पन्ने की खबरों के मुकाबले हिन्दी अखबारों के पहले पन्ने देखिए तो आप पाएंगे कि अव्वल तो सड़क दुर्घटना की खबर को वैसी प्रमुखता नहीं मिली है और उससे संबंधित दूसरी खबरें तो पहले पन्ने पर नहीं ही हैं। द टेलीग्राफ ने अगर राहुल गांधी की खबर को प्रमुखता दी है तो हिन्दी अखबारों में वह भी नहीं के बराबर है। राजस्थान पत्रिका ने जरूर इसे पहले पन्ने पर छापा है। अमर उजाला में भी सिंगल कॉलम है। जो खबरें छपी हैं वो कितने काम की हैं यह आप खुद तय कीजिए। दैनिक जागरण में दुर्घटना की खबर का शीर्षक है, हाईवे पर हादसे ने ली 26 प्रवासी मजदूरों की जान। इसके साथ पहले पन्ने पर हेडलाइन मैनेजमेंट की एक खबर रेल मंत्री के ट्वीट के हवाले से है, रेलवे किसी भी जिले से श्रमिक एक्सप्रेस चलाने के लिए तैयार। कहने की जरूरत नहीं है कि 50 दिन से ऊपर हो चुके हैं और रेलवे कुछ दिन में अपनी सारी सेवाएं बहाल करेगा और जब कुछ ट्रेन चल रही है तो इस तरह के ट्वीट से कोई भला होने वाला नहीं है। यह उनकी राजनीति है। इसके तहत उन्होंने जो कहा था उसे झारखंड के मुख्यमंत्री ने काट दिया था वह कल के अखबारों में था और यह उसका विस्तार है ताकि मुद्दे पर बात न हो।   

हिन्दुस्तान टाइम्स में दुर्घटना की खबर दो कॉलम की फोटो के साथ टॉप पर तीन कॉलम में है। इसके ठीक नीचे की खबर का शीर्षक है, सरकार ने छह साल की सफलताएं गिनाई, विपक्ष आलोचनात्मक। अखबार में आधा पन्ना विज्ञापन है। इसलिए मुख्य रूप से इन दो खबरों के अलावा, हेडलाइन मैनेजमेंट वाली खबर लीड है। द हिन्दू में दुर्घटना की  खबर दो कॉलम में है और इसके साथ ही सिंगल कॉलम में राहुल गांधी की खबर है। इसका शीर्षक है, लोगों के हाथों में पैसे दीजिए। दि हिन्दू ने ही अखबार के पहले पन्ने क एक तस्वीर छापी है, इसका शीर्षक है, घर के लिए एक टिकट। इसके कैप्शन के जरिए  बताया गया है कि ये पश्चिम बंगाल के कुछ प्रवासी मजदूर हैं जो चौपाटी बीच पर शनिवार की शाम पुलिस की हाजिरी लगाने के लिए इकट्ठा हुए थे। इन्हें इतवार को ट्रेन से वापस उनके गृह राज्य भेजा जाएगा। यह तस्वीर विवेक बेन्द्रे की है। दे हिन्दू में ही पहले पन्ने पर एक खबर है जो बताती है कि गुजरात में कोरोना फैलाने वाली सुपर हस्तियों ने देश भर के आंकड़े बढ़े। इस खबर की तुलना तबलीगी जमात की खबर को मिलने वाली प्रमुखता से कीजिए। 

हिन्दुस्तान टाइम्स में दुर्घटना की खबर दो कॉलम की फोटो के साथ टॉप पर तीन कॉलम में है। इसके ठीक नीचे की खबर का शीर्षक है, सरकार ने छह साल की सफलताएं गिनाई, विपक्ष आलोचनात्मक। अखबार में आधा पन्ना विज्ञापन है। इसलिए मुख्य रूप से इन दो खबरों के अलावा, हेडलाइन मैनेजमेंट वाली खबर लीड है। द हिन्दू में दुर्घटना की  खबर दो कॉलम में है और इसके साथ ही सिंगल कॉलममें राहुल गांधी की खबर है। इसका शीर्षक है, लोगों के हाथों में पैसे दीजिए। दि हिन्दू ने ही अखबार के पहले पन्ने क एक तस्वीर छापी है, इसका शीर्षक है, घर के लिए एक टिकट। इसके कैप्शन के जरिए  बताया गया है कि ये पश्चिम बंगाल के कुछ प्रवासी मजदूर हैं जो चौपाटी बीच पर शनिवार की शाम पुलिस की हाजिरी लगाने के लिए इकट्ठा हुए थे। इन्हें इतवार को ट्रेन से वापस उनके गृह राज्य भेजा जाएगा। यह तस्वीर विवेक बेन्द्रे की है। दे हिन्दू में ही पहले पन्ने पर एकखबर है जो बताती है कि गुजरात में कोरोना फैलाने वाली सुपर हस्तियों ने देश भर के आंकड़े बढ़े। इस खबर की तुलना तबलीगी जमात की खबर को मिलने वाली प्रमुखता से कीजिए। 


लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

 

 

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