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यहां से देखाे : एक राष्ट्र, एक……………. (रिक्त स्थान की पूर्ति स्वयं कर लें)

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VARANASI, INDIA - MAY 08: A supporter of BJP leader Narendra Modi has a likeness of him painted on his back as they walk in front of his convoy while driving through the streets on May 8, 2014 in Varanasi, India. Thousands of supporters lined the Hindu holy city as Modi drove to a party meeting after a rally planned by the leader was prohibited by local authorities. India is in the midst of a nine-phase election that began on April 7 and ends May 12. (Photo by Kevin Frayer/Getty Images)

दो दिन पहले भाजपा अध्यक्ष सह गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक के लिए पासपोर्ट, आधार, वोटर कार्ड समेत सभी पहचान पत्रों को मिलाकर एक बहुउद्देश्यीय आइडी कार्ड तैयार किया जाएगा। अमित शाह के इस बयान का किसी भी राजनीतिक दल ने विरोध नहीं किया, वामपंथी दलों ने भी नहीं। या फिर हो सकता है कि उसने किया हो, लेकिन कहीं खबर दिखी नहीं।

वर्षों पहले, जब लालकृष्ण आडवाणी देश के गृह मंत्री थे तब उन्होंने मुख्यमत्रियों की बैठक में कहा था कि हमारी सरकार देश में अपने नागरिकों के लिए वैसा कार्ड बनवाने को सोच रही है जिसका विभिन्न तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है। यह बात आडवाणी ने संभवतः करगिल जंग के बाद कही थी। आडवाणी के उस बयान के बाद संसद के दोनों सदनों में इतना हंगामा मचा कि उस दिन संसद को स्थगित कर देना पड़ा था। वामपंथी दलों के नेतृत्व में न केवल पूरा विपक्ष बल्कि सत्ताधारी पार्टी एनडीए के कुछ घटक दल भी उस विरोध में शामिल थे। सदन में हंगामा देखकर अगले दिन लालकृष्ण आडवाणी ने सदन में बयान दिया था कि एनडीए की सरकार आम सहमति से ही इस तरह के पहचान पत्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ेगी। फिर यह मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

जब 2004 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार चुनाव हार गई और मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए की सरकार बनी तो इस सरकार ने आडवाणी के विचार के तर्ज पर आधार कार्ड की नींव रख दी। खैर, इसे पूरी तरह अमली जामा तो यूपीए के पहले कार्यकाल में नहीं पहनाया जा सका लेकिन यूपीए-2 के शुरूआती दिनों में ही कांग्रेस पार्टी ने यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथाँरिटी ऑफ इंडिया (यूआइडीएआइ) के विचार को मूर्त रूप दे दिया और नन्दन निलेकणि को कैबिनेट मंत्री का दर्जा देकर उसका प्रमुख बना दिया गया।

उस वक्त सरकार के इस जनविरोधी फैसले का विरोध करने की हैसियत वामपंथी दलों की नहीं रह गई थी। बाद में हर सरकारी चीज़ व सुविधाओं को आधार कार्ड के साथ जोड़ दिया गया। अब तो हालात ऐसे हो गए हैं कि न सिर्फ वैधानिक रूप में वे सारी चीजें आधार कार्ड से जोड़ दी गई हैं बल्कि अब कमोबेश हर व्यक्ति अपने गले में ‘पहचान का एक पट्टा लगाकर’ घूमता नजर आता है।

वर्तमान भाजपा सरकार वे सारी चीजें कर रही हैं जो जनता की स्वतंत्रता को खत्म करें या कम करें, (वैसे कुछ लोग इसे एनडीए की सरकार भी कहते हैं, जबकि अमित शाह बार-बार कहते हैं कि यह बीजेपी की सरकार है जिसकी अपनी अलग विचारधारा है)। बीजेपी नेतृत्व इसे ‘जनता के हित व लाभ के लिए’ कहकर इस रूप में पेश करता है कि जनता खुशी से उसे आत्मसात करने को तैयार बैठी है। या फिर यह भी हो सकता है कि आम आदमी या जनता की हैसियत इतनी कम हो गई है कि वह समझ ही नहीं पा रही है कि क्या उसके हित में है या क्या उसके खिलाफ है!

स्थिति तो यहां तक पहुंच गई है कि भारत में लोगों को हर नारा लुभावना लगने लगा है। हम पिछले तीन चार वर्षों से इसी तरह के मनभावन नारे ‘वन‌ नेशन-वन इलेक्शन’ की बात सुन रहे हैं। हां, उसके विपरीत हकीकत यह है कि अभी तीन राज्यों में होने वाले विधानसभा के चुनाव भी एक साथ कराने की हैसियत चुनाव आयोग की नहीं थी। परिणामस्वरूप महाराष्ट्र और हरियाणा में तो एक साथ चुनाव कराए जा रहे हैं लेकिन झारखंड में विधानसभा के चुनाव की घोषणा बाद में की जाएगी!

वर्तमान मोदी सरकार ने देश की हर समस्या का जुमलों में समाधान खोज लिया है। मोदी ने प्रधानमंत्री बनते ही एक मनभावन नारा दिया- ‘बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ’, लेकिन हम जानते हैं कि पढ़ने वाली बेटियों के साथ बीजेपी सरकार किस रूप में पेश आती है। ताजा उदाहरण उत्तर प्रदेश का है जहां की एक बेटी को कल गिरफ्तार कर लिया गया क्योंकि उसने स्वामी चिन्मयानंद के पर आरोप लगाया था कि वह उनके साथ पिछले एक साल से बलात्कार कर रहा है।

मामले की गंभीरता को इस रूप में समझा जा सकता है कि उस लड़की ने चालीस से अधिक सीडी पुलिस को सौंपे हैं लेकिन गिरफ्तारी के बावजूद चिन्मयानंद के खिलाफ अभी तक बलात्कार का मामला दर्ज नहीं हुआ है! उससे थोड़े दिन पहले बीजेपी के विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने एक लड़की के साथ बलात्कार किया, उसके पिता की हत्या करवा दी, उस लड़की को ट्रक से कुचलवाने की साजिश की। उस घटना में लड़की हांलाकि अब तक बची हुई है लेकिन उसके दो रिश्तेदार घटनास्थल पर ही मारे गए। ये सारी साजिशें कुलदीप सिंह सेंगर जेल में बैठकर संचालित कर रहा था जहां बीजेपी की सरकार है। उस साजिश को अंजाम इसलिए दिया जा सका क्योंकि वह योगी आदित्यनाथ की सरकार है और आरोपी विधायक सेंगर सजातीय है!

यही हकीकत चिन्मयानंद की भी है क्योंकि वह योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाने में सहायक रहा था क्योंकि उसी ने योगी का नाम प्रस्तावित किया था। दूसरा महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि चिन्मयानंद भी योगी का सजातीय है।

दो दिन पहले अमित शाह ने ‘वन नेशन-वन आइ कार्ड’ का जुमला उछाल दिया है और वाट्सएप विश्वविद्यालय से इसके गुण हर जगह बताए जाने लगे हैं कि चलो, अब अच्छा होगा क्योंकि पहले हर चीज के लिए अलग से कार्ड रखने की जरूरत होती थी, उससे अब मुक्ति मिल जाएगी! कुछ दिनों के बाद यह बहस सतह पर आ जाएगी और लोगबाग इसे स्वीकार भी कर लेंगे। हम इस बात को जानते हैं कि इस तरह के जुमले बार-बार उछलते हैं और हर बार हम इन्हें आत्मसात कर लेते हैं। हमें यह बात नहीं भूलनी चाहिए कि कांग्रेसी सरकार भी आधार कार्ड को लेकर एक जुमला लेकर आई थी कि एक कार्ड से ही सारा कुछ होगा। यह सरकार फिर से एक नया कार्ड का जुमला लेकर आ गई है।

आज के दिन जनता से सबसे ज्यादा झूठ सिर्फ सरकार बोल रही है। इससे भी दुखद यह है कि हमारे देश के कर्णधारों ने जनता के मन में बैठा दिया है कि सिर्फ सरकार हमारी चिंता करती है। परिणाम यह हुआ है कि सरकार की तरफ से उछाला गया हर जुमला जनता के दिल तक पहुंच रह है। कल को हो सकता है कि सरकार एक नया जुमला ‘वन नेशन-वन सिविल कोड’ लेकर आए, और हम वाह-वाह करें।

अब चूंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मोदी को ‘फादर ऑफ इंडिया’ कह दिया है इसलिए थोड़े दिनों के बाद बीजेपी ‘वन नेशन-वन लीडर’ का जुमला लेकर आए और इसे भी हम खुशी-खुशी स्वीकार कर लें। और जैसा कि होता आया है, तब हमारे कानों में सिर्फ एक नारा गूंजेगा- ’वन नेशन-वन रिलीजन!’

हम जिस दौर में पहुंच गए हैं और जैसी परिस्थिति तैयार कर दी गई है इसमें अगर वर्तमान सरकार यह फ़रमान जारी कर दे कि आपके पहचान पत्र पर आपके साथ-साथ प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर भी होगी तो शायद एकाध फीसदी लोगों को छोड़कर अधिकांश नागरिक सरकार के उस नियम का पालन करने के लिए तैयार बैठे होंगे!


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