Home ओप-एड काॅलम अघोषित सेंसरशिप के दौर में तीसरे प्रेस आयोग की ज़रूरत

अघोषित सेंसरशिप के दौर में तीसरे प्रेस आयोग की ज़रूरत

पहला प्रेस आयोग पांचवें दशक में, दूसरा आठवें दशक में गठित हुए थे। अब मीडिया का बहुआयामी विस्तार हो चुका है इसलिए बहु आयामी मीडिया आयोग की ज़रूरत है। ताकि भविष्य में मीडिया की छवि साफ़ -सुथरी रह सके और कर्मियों का काम-काज भी भय मुक्त रहे।

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वरिष्ठ पत्रकार रामशरण जोशी ने इस कोरोना काल में तीसरे प्रेस आयोग के गठन की माँग उठायी है। वे पहले भी ऐसी मांग उठा चुके हैं, लेकिन मीडिया की मौजूदा हालत को देखते हुए उनका सवाल बहुत जायज़ लगता है। पढ़िये इस संबंध में उन्होंने अपनी फेसबूुक वॉल पर क्या लिखा है–

 

मीडिया आयोग क्यों ?

1 . मीडिया छवि संकट से ग्रस्त है। गोदी मीडिया का गहन लग चुँका है।

२. मीडिया में कॉन्ट्रैक्ट प्रथा का बोलबाला है,वेज बोर्ड विलुप्त है।

3 . सम्पादक संस्था कोमा में है, ब्रांड मैनेजर की हुकूमत है.

4 . क्रॉस ओनरशिप यानि प्रिंट व चैनल दोनों माध्यमों पर कुछ ही कॉर्पोरटे घरानों का कब्ज़ा है।

5 . अघोषित सेंसरशिप है। प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया के साथ प्रसार भारती का ताज़ा विवाद व धमकी उदाहरण है।

6 . अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को संकीर्णता की नज़रों से देखा जा रहा है।

7 . पहला प्रेस आयोग पांचवें दशक में, दूसरा आठवें दशक में गठित हुए थे। अब मीडिया का बहुआयामी विस्तार हो चुका है इसलिए बहु आयामी मीडिया आयोग की ज़रूरत है। ताकि भविष्य में मीडिया की छवि साफ़ -सुथरी रह सके और कर्मियों का काम-काज भी भय मुक्त रहे।

8. मेरी यह मांग 2010 से ही रही है.2011 में विस्तार से लेख भी प्रकाशित हो चुका है। उस समय वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय का भी यही स्टैंड था। आज क्या है, मैं नहीं जानता। फिर भी पत्रकार बिरादरी से अपील है कि वह आगे आये और सरकार से आयोग के गठन की मांग करे जिसके सदस्य सत्ता-पक्ष विपक्ष के नेता, सरकारी अधिकारी, पत्रकार, सिविल सोसाइटी, न्यायाधीश आदि हो सकते हैं।

 



रामशऱण जोशी वरिष्ठ पत्रकार और मीडिया विजिल के सलाहकार मंडल के सम्मानित सदस्य हैं।

 

 



 

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