अख़बारनामा: चुनावी हार से पहले विकलांगों से भी वसूल रहे थे 28% जीएसटी! जारी है 99% का चक्कर!


क्या जीएसटी काउंसिल की बैठक में 99 प्रतिशत वस्तुओं की दर 18 प्रतिशत से कम हुई? क्या आपके अखबार ने उसी प्रमुखता से बताया?


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संजय कुमार सिंह

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा था, “आज … हमलोग एक ऐसी स्थिति के लिए काम कर रहे हैं जब 99 प्रतिशत वस्तुओं / सेवाओं पर जीएसटी 18 प्रतिशत से कम हो जाएगा।” यह खबर अगले दिन सभी अखबारों में प्रमुखता से छपी। बहुत कम ने यह बताया कि जीएसटी से संबंधित घोषणा वित्त मंत्री को करनी चाहिए न कि प्रधानमंत्री को और शनिवार को जब जीएसटी कौंसिल की बैठक होनी थी तो प्रधानमंत्री का मंगलवार को ऐसा कहना संदेश देने जैसा था। यही नहीं 99 प्रतिशत वस्तुओं / सेवाओं पर जीएसटी कम होने का दावा भी भ्रम फैलाने वाला था। इस बारे में मैंने बुधवार, 19 दिसंबर को विस्तार से लिखा था। अब कल वह बैठक हुई। क्या उसमें 99 प्रतिशत वस्तुओं की दर 18 प्रतिशत से कम हुई? क्या आपके अखबार ने उसी प्रमुखता से बताया? ढूंढ़िए पढ़िए और जानिए।

इंडियन एक्सप्रेस ने बुधवार को इस खबर को पहले पन्ने पर लीड बनाया था। आज भी चार कॉलम में लीड है। फ्लैग शीर्षक, “सरकारी खजाने के लिए प्रति वर्ष 5500 करोड़ रुपए का कदम” है । मुख्य शीर्षक, “जीएसटी कौंसिल ने दर और कम की सिर्फ 28 आयटम अब सर्वोच्च स्लैब में रह गए” दिया गया है। अंग्रेजी दैनिक ‘द टेलीग्राफ’ ने लिखा है कि 34 आयटम पर 28 प्रतिशत टैक्स था और इसमें से सात पर (इंडियन एक्सप्रेस ने छह लिखा है) टैक्स कम किया गया है। क्या यह 99 प्रतिशत है? शीर्षक इसपर शांत है। दरअसल यह 97.9 प्रतिशत बैठता है। टेलीग्राफ ने लिखा है कि दो प्रमुख वस्तुओं – सीमेंट और ऑटोमोबाइल पार्ट्स (वाहनों के पुर्जे) पर अब भी 28 प्रतिशत टैक्स है। 28 प्रतिशत टैक्स वाले अन्य आयटम में एयरकंडीशनर और डिश वाशर जैसे लक्जरी तथा पान मसाला, सिगरेट जैसे सिन (पाप) आयटम हैं।

इन पर टैक्स कम नहीं करने का पुराना निर्णय है। ऐसे में आंकड़ों की बात अलग कर दें तो इन वस्तुओं का महत्व और इनपर 28 प्रतिशत टैक्स का मतलब समझ में आएगा। इसीलिए, इसे कम नहीं किया गया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि कौंसिल ने इन दो आयटम पर टैक्स कम करने के प्रभाव को इस समय बहुत ज्यादा माना और इनपर टैक्स कम नहीं करने का निर्णय लिया। आप जानते हैं कि जीएसटी कौंसिल में अब तीन गैर भाजपाई वित्त मंत्री बढ़ गए हैं और पहले की तरह भाजपा का बहुमत नहीं रहा। टेलीग्राफ ने लिखा है कि इन दो वस्तुओं से सरकार को 34,000 (एक्सप्रेस 33,000) करोड़ रुपए टैक्स में मिलते हैं। हालांकि, वित्त मंत्री ने कहा है कि अगला लक्ष्य सीमेंट पर टैक्स की दर दुरुस्त करना होगा।

हिन्दुस्तान टाइम्स में भी यह खबर लीड है। शीर्षक, “जीएसटी कौंसिल ने आम उपयोग के 23 आयटम पर टैक्स कम किया” है। उपशीर्षक, “टीवी, मूवी टिकट, पावर बैंक कर की कम दर में लाए गए” है। हिन्दुस्तान टाइम्स ने अपनी इस मुख्य खबर के साथ तीन कॉलम में एक और खबर छापी है। इस खबर का शीर्षक, “सरकार की नजर मध्यमवर्ग और व्यापारियों पर विपक्ष ने कहा वोट मिलने में सहायक नहीं होगा” दिया गया है। इस बार एक और खास निर्णय हुआ है। वह है, ब्रांडेड और फ्रोजन सब्जियों पर टैक्स पांच से शून्य कर दिया जाना। इसके मुकाबले याद कीजिए कि सैनिटेरी नैपकिन को टैक्स मुक्त करने में कितनी समस्या आई थी और आखिरकार उसे कब व कैसे टैक्स मुक्त किया गया तथा उसके पहले सरकार की ओर से क्या कहा गया था।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने भी इस खबर को लीड बनाया है। शीर्षक है, “23 आयटम्स पर जीएसटी दर कम की गई, कुछ और पर अगले महीने कम हो सकती है।” इंट्रो है, “सिर्फ सीमेंट और अन्य उत्पाद 28 प्रतिशत टैक्स की दर में रह गए।” अखबार ने अरुण जेटली का एक कोट प्रमुखता से छापा है। इसके मुताबिक 28 प्रतिशत जीएसटी की दर खत्म होने वाली है और उसमें सिर्फ लक्जरी व सिन आयटम रहेंगे। तीन आयटम उच्च आयवर्ग के उपयोग वाले हैं और आम उपयोग का सिर्फ एक आयटम रह गया है। आप पहले पढ़ चुके हैं कि यह ‘एक’ आयटम, वाहनों के पुर्जे और सीमेंट है। पता नहीं वित्त मंत्री किसे आम आदमी के उपयोग का मानते हैं।

वैसे तो यह सरकारी खबर है और महत्वपूर्ण सूचना भी। इसलिए, सभी अखबारों में लीड के रूप में छपना कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन 99 प्रतिशत आयटम पर जीएसटी कम होने के दावे पर शीर्षक में कहीं चर्चा न होने का क्या मतलब लगाया जाए? ना पूर्व घोषणा वाले दिन उस पर सवाल उठाया गया ना आज जब वैसा नहीं हुआ। दैनिक भास्कर में यह खबर आज भी लीड है और विस्तार से जानकारी दी गई है। हालांकि जो महत्वपूर्ण बात है उसे हाईलाइट नहीं किया गया है। क्या आप जानते थे कि विकलांगों के काम आने वाले साधनों के पुर्जों और उपस्करों पर टैक्स पहले 28 प्रतिशत था। इसे अब पांच प्रतिशत कर दिया गया है। अब आप तय कीजिए कि बड़ा काम पहले हुआ था या अब हुआ है।

दैनिक जागरण में यह खबर लीड है। शीर्षक है, “दो दर्जन वस्तुओं और सेवाओं पर घटा जीएसटी।” उपशीर्षक है, “केंद्र ने जनता व कारोबारियों को बड़ी राहत दी है आम चुनाव से पहले।”पता नहीं, इसे सीधे क्यों नहीं कहा गया है कि, “केंद्र ने आम चुनाव से पहले जनता व कारोबारियों को बड़ी राहत दी।” हालांकि, मामला 99 प्रतिशत वस्तुओं का था। जागरण ने शीर्षक में 23 को दो दर्जन कर दिया।

अमर उजाला में भी यह खबर लीड है और शीर्षक बिल्कुल लोक-लुभावन – “टीवी, कंप्यूटर, टायर समेत 23 वस्तुएं सस्ती, 6 सेवाओं पर जीएसटी में कमी।” उपशीर्षक है, “नए साल से पहले तोहफा दिव्यांगों के लिए व्हीलचेयर जैसे जरूरी सामान पर जीएसटी 28 से 5 फीसदी किया।” किन वस्तुओं पर टैक्स कम हुआ है उसकी सूची मुख्य खबर के साथ है और उसका शीर्षक है, “कैमरा समेत ये वस्तुएं भी सस्ती।” तीन हिन्दी राज्यों में चुनाव हारने के बाद जीएसटी कम कर मध्यमवर्ग को खुश करने की सरकार की कोशिश इस शीर्षक से पूरी तरह स्पष्ट है।

नवभारत टाइम्स में भी खबर लीड है। शीर्षक है, “न्यू ईयर पर छोटा गिफ्ट, 23 चीजों पर घटा जीएसटी।” उपशीर्षक है, “सीमेंट-रियल एस्टेट पर चुप्पी, आम चुनाव से पहले बड़े तोहफे की तैयारी?” एक बॉक्स में बताया गया है कि किन वस्तुओं पर टैक्स कितना कम हुआ और कारोबारियों को क्या राहत मिली। इसका शीर्षक है, “एक जनवरी से मूवी टिकट, टीवी, मोबाइल बैट्री सस्ते होंगे।” नवभारत टाइम्स ने दिल्ली में नई कार महंगी होने की खबर को इसके साथ जोड़कर छापा है।

हिन्दुस्तान में भी यह खबर लीड है। शीर्षक है, “तोहफा : टीवी-कंप्यूटर समेत 23 वस्तुएं सस्ती।” नवोदय टाइम्स ने इसे केंद्र का न्यू ईयर गिफ्ट कहा है। शीर्षक है, “टीवी,एसी, सिनेमा टिकट सस्ते।” राजस्थान पत्रिका में यह खबर ढंग से छपी है। लगभग सभी पहलू प्रमुखता से पहले ही पन्ने पर हैं। मोदी ने कहा था, “99 प्रतिशत वस्तुएं 28 प्रतिशत स्लैब से होंगी बाहर” के साथ।

जीएसटी कम करने की घोषणा से लेकर असल में क्या हुआ और कुछ प्रमुख अखबारों ने अपने पाठकों को क्या बताया उसकी चर्चा मैंने यहां की है ताकि आप अपने अखबार की सूचना से तुलना कर सकें और अपने अखबार को जान सकें।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। जनसत्ता में रहते हुए लंबे समय तक सबकी ख़बर लेते रहे और सबको ख़बर देते रहे। )