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चुनाव चर्चा: शिन पिंग के सर्वशक्तिमान होने के मायने

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापक चेयरमैन माओ त्से तुंग के बाद पार्टी के नेता दो कार्यकाल की अनिवार्यता का पालन करते रहे थे ताकि तानाशाही न उत्पन्न हो. एक दलीय राजनीति के देश चीन में कम्युनिस्ट पार्टी ही नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (संसद) में सब कुछ है.चीनी संसद के करीब 3,000 सांसदों में से दो-तिहाई ने देश के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद पर अधिकतम दो कार्यकाल की अनिवार्यता खत्म करने कदम से पहले चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष सात सदस्यीय स्थाई समिति ने इस संशोधन को आम सहमति से मंजूरी दी थी.

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प्रतिष्ठित अमेरिकी पत्रिका फोर्ब्स ने दुनिया के 10 शीर्ष  ‘शक्तिमान’ लोगो की नई लिस्ट में चीन के राष्ट्रपति  शिन पिंग ( यही लिखा-बोला-पढा जाना चहिये न कि जिन पिंग) को पहले पायदान पर रखा है। उन्होंने शक्तिमानों की लिस्ट में इससे पहले सिरमौर रहे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को एक पायदान नीचे ठेल दिया। पुतिन 2013 से चार बार ‘सर्वशक्तिमान’ माने गए थे। हमने हाल में मीडिया विजिल के साप्ताहिक स्तम्भ चुनाव चर्चा में वैश्विक नेताओं को लोकतांत्रिक चुनाव के मानदंडों पर नापने की नई शृंखला शुरू  की है।

हम इस साप्ताहिक स्तम्भ में अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तीन किस्तों  में पैमाइश करने से पूर्व पुतिन जी को नाप चुके हैं। स्वाभाविक है कि हम इस लिस्ट मे 9वें पायदान पर खड़े भारत के प्रधानमंत्री नरेंद मोदी को नापने के पहले, चौथे पायदान पर जर्मनी की पहली महिला चांसलर एंजेला मरकेल आदि की भी चर्चा से पूर्व शिन पिंग को नापने की कोशिश करे.

गौरतलब है कि शिन पिंग को चीन के राष्ट्रपति की कुर्सी  लगभग आजीवन पक्की हो जाने के बाद फोर्ब्स ने उन्हे विश्व का सर्वशक्तिमान सत्ताधारी माना है. चीन के संविधान में बदलाव को मिली मंजूरी के बाद 64 वर्षीय शिनपिंग के जीवन भर चीन का नेता बने रहने की बाधा समाप्त हो गई है.इस पद पर उनका पांच साल का दूसरा कार्यकाल चल रहा है. 

चीन की संसद ने राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद के लिए अधिकतम दो कार्यकाल की अनिवार्यता को दो बरस पह्ले  दो-तिहाई बहुमत से खत्म कर शिन पिंग के जीवन भर राष्ट्रपति बने रहने का रास्ता साफ कर दिया. संविधान मे अगर ये बदलाव नहीं होता तो वह 2023 में इस पद से मुक्त हो जाते. 

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापक चेयरमैन माओ त्से तुंग के बाद पार्टी के नेता दो कार्यकाल की अनिवार्यता का पालन करते रहे थे ताकि तानाशाही न उत्पन्न हो. एक दलीय राजनीति के देश चीन में कम्युनिस्ट पार्टी ही नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (संसद) में सब कुछ है.चीनी संसद के करीब 3,000 सांसदों में से दो-तिहाई ने देश के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद पर अधिकतम दो कार्यकाल की अनिवार्यता खत्म करने कदम से पहले चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष सात सदस्यीय स्थाई समिति ने इस संशोधन को आम सहमति से मंजूरी दी थी. 

शिन पिंग ,माओ के बाद चीन के सबसे ताकतवर नेता बन चु के हैं. वह आजन्म राष्ट्रपति होने के अलावा सीपीसी और सेना दोनों के प्रमुख भी है.वह दुनिया के नये तानाशाह हैं.



वरिष्ठ पत्रकार चंद्र प्रकाश झा का मंगलवारी साप्ताहिक स्तम्भ ‘चुनाव चर्चा’ लगभग साल भर पहले, लोकसभा चुनाव के बाद स्थगित हो गया था। कुछ हफ़्ते पहले यह फिर शुरू हो गया। मीडिया हल्कों में सी.पी. के नाम से मशहूर चंद्र प्रकाश झा 40 बरस से पत्रकारिता में हैं और 12 राज्यों से चुनावी खबरें, रिपोर्ट, विश्लेषण के साथ-साथ महत्वपूर्ण तस्वीरें भी जनता के सामने लाने का अनुभव रखते हैं। सी.पी. आजकल बिहार में अपने गांव में हैं और बिहार में बढ़ती चुनावी आहट और राजनीतिक सरगर्मियों को हम तक पहुँचाने के लिए उनसे बेहतर कौन हो सकता था। वैसे उनकी नज़र हर तरफ़ है। बीच-बीच में ग्लोब के चक्कर लगाते रहते हैं। रूस और अमेरिका की राजनीति पर नज़र डालने के बाद अब चीन पर नज़र डाल रहे हैं।



 

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