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सीमा विवाद: ‘PM के बयान पर PMO की सफ़ाई पर सफ़ाई ज़रूरी’

सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री के बयान पर PMO की सफाई/व्याख्या ने जितना सुलझाया उससे ज्यादा उलझा दिया। अब उस सफाई पर सफाई की जरूरत है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे लाल बहादुर सिंह की टिप्पणी..

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लाल बहादुर सिंह

 

सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री के बयान पर PMO की सफाई/व्याख्या ने जितना सुलझाया उससे ज्यादा उलझा दिया।

अब उस सफाई पर सफाई की जरूरत !

उस दिन प्रधानमंत्री ने कहा था,

“हमारी जमीन पर न कोई घुसा, न घुसा हुआ है”

अपनी सफाई में PMO ने कहा है कि, “PM की उक्त टिप्पणी का फोकस 15 जून की गलवान की घटना थी… PM का यह कहना कि LAC के हमारी तरफ चीनी उपस्थिति नहीं थी, यह उस दिन की परिस्थिति के बारे में है, जो हमारे बहादुर जवानों के शौर्य की वजह से सम्भव हुई थी। हमारे जवानों के बलिदान ने चीनी पक्ष द्वारा उस दिन, LAC के इस बिंदु पर structure खड़ा करने की कोशिश को विफल कर दिया तथा सीमा के अतिक्रमण के प्रयास को नाकाम कर दिया।”

PMO के अनुसार निचोड़ यह है कि “वहां उस दिन जिन लोगों ने हमारी सीमा के अतिक्रमण का प्रयास किया उन्हें हमारे बहादुर धरती पुत्रों ने सही सबक सिखाया।”

और अंत में PMO की सफाई कहती है, “60 साल में जो हमारी 43000 वर्ग किमी जमीन अवैध कब्जे में गँवा दी गयी है, उसकी परिस्थितियों से देश परिचित है।”

तो क्या PMO यह कहना चाहता है कि प्रधानमंत्री का “न घुसा, न घुसा हुआ है” वाला बयान केवल और केवल 15 जून को गलवान घाटी के उस खास बिंदु के बारे में है ?

तो 15 जून के पूर्व की तथा गवलान घाटी के उस खास point के इतर क्या स्थिति है, इस पर प्रधानमंत्री चुप रहे, उस पर उनका बयान लागू नहीं होता ?

तो क्या 15 जून के महीनों पहले से उस पूरे इलाके में चीनी घुसपैठ की जो बात सेना के तमाम पूर्व अधिकारी, डिफेंस एक्सपर्ट्स कर रहे हैं, वह सच है ?

क्या 60 साल में कब्ज़ा हुए 43000 वर्ग किमी में मई-जून में कब्ज़ा हुआ कोई इलाका भी शामिल है ?

PMO की इस सफाई ने दरअसल उक्त आशंकाओं का समाधान करने की बजाय उन्हें और गहरा कर दिया है!

क्या प्रधानमंत्री सामने आकर अपने बयान और उस पर अपने कार्यालय की सफाई से राष्ट्रीय सुरक्षा के गंभीर प्रश्न पर जो महा confusion पैदा हुआ है, उसे स्पष्ठ करेंगे ?

इतिहास के अनुभवों की रोशनी में, वर्तमान परिस्थिति की नजाकत और तात्कालिक तथा भावी राष्ट्रीय हितों की रोशनी में प्रधानमंत्री जैसे भी इस का समाधान करना चाहते हों, जो भी उनका रोडमैप हो, उसे ईमानदारी से,पारदर्शी ढंग से देश की जनता के सामने रखना चाहिए,

अर्धसत्य, सच्चाई से लुकाछिपी, शुतुरमुर्गी चाल हमारे राष्ट्रीय हितों के लिए घातक साबित हो रही है !


 

लालबहादुर सिंह, इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के लोकप्रिय अध्यक्ष रहे हैं।

 


 

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