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‘मोदी प्रिय’ संभाजी की गिरफ़्तारी न होने से नाराज़ दलितों का यलग़ार मार्च मुंबई पहुँचा!

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‘यलगार’ यानी आक्रमण। और महाराष्ट्र के दलित संगठनों ने यलगार मार्च निकाला है जो पुणे से चलकर आज मुंबई पहुँच गया। मुद्दा है कट्टर हिंदू नेता संभाजी भिड़े की गिरफ़्तारी जो प्रधानमंत्री मोदी के काफ़ी करीबी कहे जाते हैं। 1 जनवरी को भीमा कोरेगाँव में हुई हिंसा में वे नामजद हैं, लकिन सरकार उन्हें गिरफ्तार नहीं कर रही है। दलित संगठनों में इसे लेकर आक्रोश है।

‘यलगार मार्च’ की अगुवाई कर रहे भारतीय रिपब्लिक बहुजन महासंघ के नेता प्रकाश अंबेडकर ने आरोप लगाया है कि पीएमओ के निर्देश पर संभाजी भिड़े को गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है। प्रदर्शनकारी विधानसभा जाना चाहते थे लेकिन पुलिस उन्हें ज़बरदस्ती आज़ाद मैदान ले गई। प्रदर्शनकारियों ने सीएसटी स्टेशन के बाहर भी डेला डाल दिया है।

गौरतलब है कि भीमा कोरेगाँव युद्ध के 200  वर्ष पूरे होने पर दलित संगठनों ने शौर्य दिवस मनाया था। इस युद्ध में पेशवा की पराजय हुई थी। अंग्रेज़ों की जीत में दलित सैनिकों की बड़ी भूमिका थी जिसकी याद में शौर्य दिवस मनाया जाता है।

200वीं सालगिरह पर हुई हिंसा में शिव प्रतिष्ठान संगठन के प्रमुख व हिंदूवादी नेता संभाजी भिड़े और मिलिंद एकबोटे के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। प्रकाश अंबेडकर के मुताबिक मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने संभा जी की गिरफ़्तारी का आश्वासन दिया था, लेकिन अब वादा खिलाफी हो रही है क्यों कि वे प्रधानमंत्री मोदी के करीबी हैं।

गुरु जी के नाम से मशहूर संभाजी सांगली में रहते हैं। पिछले चुनाव में सांगली पहुँचे नरेंद्र मोदी ने सुरक्षा घेरा तोड़कर उनसे मुलाकात की थी। उन्होंने तब कहा था कि वे ‘गुरु जी के आर्डर से सांगली आए हैं।’ स्वाभाविक है कि महाराष्ट्र सरकार उन पर हाथ डालने से घबरा रही है। लेकिन सवाल क़ानून का है। दलितों को नामज़द व्यक्ति के ख़िलाफ़ कार्रवाई के लिए मार्च निकालना पड़ रहा है, यह भी अफ़सोसनाक है। शौर्य दिवस पर हुई हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हुई थी जबकि कई घायल हो गए थे।

कुल मिलाकर दलितों का आक्रोश बढ़ रहा है। कोई ठोस कदम न उठा तो यलगार मार्च सरकार पर भारी पड़ सकता है।

 



 

1 COMMENT

  1. U mesh chandola

    Bhai Pagla Gaye tum . Judge Loya ke murder aur Gujrat dangaio par kuch Nahi hua. Who are you.

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