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UP: आइसा उपाध्यक्ष समेत युवा नेताओं की गिरफ्तारी निंदनीय: माले

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भाकपा (माले) की राज्य इकाई ने आइसा प्रदेश उपाध्यक्ष नितिन राज समेत युवा नेताओं की घंटाघर व अन्य जगहों से लखनऊ पुलिस द्वारा रविवार को गिरफ्तार करने की कड़ी निंदा की है। पार्टी ने इसे योगी सरकार की अलोकतांत्रिक और दमनकारी कार्रवाई बताते हुए सभी की अविलंब बिना शर्त रिहाई की मांग की है।
आइसा यूपी उपाध्यक्ष नितिन राज
सोमवार को जारी बयान में पार्टी की राज्य स्थायी समिति (स्टैंडिंग कमेटी) के सदस्य अरुण कुमार ने कहा कि आइसा नेता को घंटाघर पर दो माह से चल रहे महिलाओं के सीएए-एनआरसी-एनपीआर-विरोधी आंदोलन के समर्थन में वहां मौजूद रहने के कारण गिरफ्तार किया गया, जो अपने आप में गिरफ्तारी का कोई आधार नहीं है। यह योगी सरकार में जारी पुलिस राज का ही नतीजा है कि एक संविधान सम्मत और शांतिपूर्ण आंदोलन को लोकतांत्रिक समर्थन देना जुर्म हो गया है। यह भाजपा सरकार की तानाशाही है जो अस्वीकार्य है।
उन्होंने कहा कि रिकवरी अध्यादेश 2020 जैसे ‘काले कानून’ को प्रदेश में लागू कर योगी सरकार न्यायपालिका का अपमान करने के साथ-साथ हर तरह के लोकतांत्रिक प्रतिवाद का दमन कर देना चाहती है। सामाजिक कार्यकर्ताओं से वसूली के लिए राजधानी के चौराहों पर लगे होर्डिंग हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद न हटाकर वह की खुद की गैर-कानूनी कार्रवाई को जायज ठहराने के लिए दिन-रात एक किये है। लेकिन नागरिकों की ओर से प्रत्युत्तर मिलने पर उसकी बौखलाहट और दोरंगी नीति उजागर हो जाती है। यह दिखाता है कि लोगों को डराने का उपक्रम करने वाली सरकार अंदर से कितनी डरी हुई है।

विज्ञप्ति: अरुण कुमार,राज्य स्थायी समिति सदस्य द्वारा जारी 

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