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अंबानी की व्यक्तिगत पेशी के आदेश में छेड़छाड़ करने पर सुप्रीम कोर्ट के दो कोर्ट मास्टर बर्खास्त

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सुप्रीम कोर्ट ने 7 जनवरी के उस आदेश के साथ छेड़छाड़ करने के लिए कोर्ट मास्टर मानव शर्मा और तपन कुमार चक्रवर्ती को बर्खास्त कर दिया है जिसमें रिलायंस कम्युनिकेशन के चेयरमैन अनिल अंबानी के व्यक्तिगत उपस्थिति के निर्देश दिए गए थे।

चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई ने बुधवार देर शाम अदालत के प्रशासनिक प्रमुख के रूप में अपनी अनुशासनात्मक शक्तियों का प्रयोग करते हुए ये आदेश पारित किया।

ये विवाद जस्टिस आर. एफ. नरीमन और जस्टिस विनीत सरन की पीठ द्वारा पारित आदेश से संबंधित है जिसमें एरिक्सन द्वारा दायर अवमानना याचिकाओं में अनिल अंबानी की व्यक्तिगत उपस्थिति का आदेश दिया गया था।

हालांकि पीठ ने विशेष रूप से यह स्पष्ट किया था कि व्यक्तिगत उपस्थिति पर कोई विवाद नहीं है लेकिन सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड की गई आदेश की प्रति में ‘नहीं’ शब्द को हटा दिया गया है। यहां तक कि अंबानी को जारी किए गए समन में भी यह कहा गया था कि ‘व्यक्तिगत उपस्थिति पर विवाद’ है।

इस विसंगति को 10 जनवरी को एरिक्सन के वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे द्वारा पीठ के संज्ञान में लाया गया। जस्टिस नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस पर रोक लगा दी और यह भी स्पष्ट किया कि अदालत में विशेष रूप से अनिल अंबानी की उपस्थिति की आवश्यकता है। इसके बाद आदेश की एक संशोधित प्रति अपलोड की गई।

इसके कारण उन परिस्थितियों के बारे में जांच शुरू की गई जिसके तहत वेबसाइट पर अपलोड किए गए आदेश की प्रति में शब्द को बदला गया। प्रारंभिक जांच में छेड़छाड़ का पता चला जिसके कारण CJI रंजन गोगोई ने दोनों अधिकारियों को बर्खास्त करने के लिए अपनी शक्तियों का प्रयोग किया।

अंबानी पर आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के 2 आदेशों के बावजूद आरकॉम ने एरिक्सन की 550 करोड़ रुपये की बकाया राशि का भुगतान नहीं किया। जिसके चलते उनके खिलाफ अवमानना की याचिका दाखिल की गई। बुधवार को ही पीठ ने इस मामले में आदेश सुरक्षित रखा है।

लाइव लॉ से साभार।

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