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पाकिस्तान में भी छात्र आंदोलन ने पकड़ा ज़ोर, 29 नवंबर को लाहौर असेंबली तक मार्च

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एक तरफ जहां हमारे मुल्क भारत में जवाहरलाल विश्वविद्यालय के छात्र फीस बढ़ोतरी और अन्य प्रस्तावित शर्तों को वापस लेने की मांग को लेकर सड़क से संसद तक प्रदर्शन कर रहे हैं और देश भर के विश्विद्यालयों के छात्र उनके इस आंदोलन के समर्थन में सड़कों पर उतर आये हैं, ठीक इसी वक्त पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में भी कुछ ऐसा ही माहौल बन गया है। पाकिस्तान में भी बढ़ती फ़ीस और विश्वविद्यालय प्रशासन के तानाशाही रवैये से परेशान होकर पूरे पाकिस्तान के विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ को पुनर्स्थापित करने की मांग के साथ 29 नवंबर को छात्र लाहौर के इस्तांबुल चौक से लेकर पंजाब असेंबली तक मार्च करेंगे। पढ़िए विक्रम की यह रिपोर्ट: संपादक


दिलों में हुब्ब-ए-वतन है अगर तो एक रहो
निखारना ये चमन है अगर तो एक रहो

ज़ाफ़र मलीहाबादी की यह पंक्तियां तब याद आ गयीं जब इंटरनेट पर स्क्रोल करते हुए पाकिस्तान का एक वीडियो मेरे न्यूज़ फीड में आ गया। एक तरफ़ जहां दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र बढ़ी फ़ीस के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतर आए हैं वही सरहद की दूसरी तरफ़ छात्रों द्वारा आयोजित एक बड़े आंदोलन ने विदेशी मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

Pakistan: Student Action Committee Formed to Demand Restoration of Students Union

बढ़ती फ़ीस और विश्वविद्यालय प्रशासन  के तानाशाही रवैये से परेशान होकर पूरे पाकिस्तान के विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ को पुनर्स्थापित करने की मांग के साथ 29 नवंबर को छात्र लाहौर के इस्तांबुल चौक से लेकर पंजाब असेंबली तक मार्च करेंगे।

Ali Ahmad Kurd on Student Unions

Ali Ahmad Kurd, Senior Advocate, Former president Supreme Court Bar Association Pakistan and a prominent name of Lawyers' Movement emphasizes the presence of Student Unions on campuses.He said that Pakistan is lacking back in having leaders and student unions had an integral part in producing leaders. Student unions used to provide ground for nourishment but by banning unions resulted in no leaders. It's time that students must come out for their due rights and their basic right of student unions. 𝗢𝗻 𝗡𝗼𝘃𝗲𝗺𝗯𝗲𝗿 𝟮𝟵𝘁𝗵, 𝟮𝟬𝟭𝟵, 𝘀𝘁𝘂𝗱𝗲𝗻𝘁𝘀 𝗳𝗿𝗼𝗺 𝗮𝗹𝗹 𝗼𝘃𝗲𝗿 𝗣𝗮𝗸𝗶𝘀𝘁𝗮𝗻 𝗮𝗿𝗲 𝗵𝗼𝗹𝗱𝗶𝗻𝗴 𝗮 𝗦𝘁𝘂𝗱𝗲𝗻𝘁𝘀' 𝗦𝗼𝗹𝗶𝗱𝗮𝗿𝗶𝘁𝘆 𝗠𝗮𝗿𝗰𝗵 𝗳𝗼𝗿 𝘁𝗵𝗲𝗶𝗿 𝗿𝗶𝗴𝗵𝘁𝘀, 𝗹𝗶𝗳𝘁𝗶𝗻𝗴 𝘁𝗵𝗲 𝗯𝗮𝗻 𝗼𝗻 𝘀𝘁𝘂𝗱𝗲𝗻𝘁 𝘂𝗻𝗶𝗼𝗻𝘀 𝗶𝘀 𝘁𝗵𝗲𝗶𝗿 𝗺𝗮𝗷𝗼𝗿 𝗱𝗲𝗺𝗮𝗻𝗱. 𝗝𝗼𝗶𝗻 𝘁𝗵𝗲 𝗠𝗮𝗿𝗰𝗵 𝗶𝗻 𝘆𝗼𝘂𝗿 𝗿𝗲𝘀𝗽𝗲𝗰𝘁𝗶𝘃𝗲 𝗰𝗶𝘁𝗶𝗲𝘀 𝗳𝗼𝗿 𝘆𝗼𝘂𝗿 𝗳𝘂𝘁𝘂𝗿𝗲. Follow the events;Lahore; https://www.facebook.com/events/2120953474670747/Islamabad; https://www.facebook.com/events/537307263770247/#StudentsSolidarityMarch#StudentsRightsNow#StudentsNotSlaves

Posted by Progressive Students Collective on Friday, November 15, 2019

अस्सी के दशक में ज़ियाउल हक़ की मिलिटरी सरकार ने कई राजनैतिक संगठनो के साथ साथ छात्र संघ पर भी प्रतिबंध लगा दिया था। उसके बाद आने वाली किसी भी सरकार ने (चाहे वह बेनज़ीर भुट्टो की सरकार हो या परवेज़ मुशर्रफ की सरकार) छात्र संघ को पुनर्स्थापित करना ज़रूरी नहीं समझा।

पिछले कई दिनों से दक्षिणपंथी छात्र संगठनों की हिंसा से छात्र परेशान थे और इस परेशानी पर आग में घी डालने वाला काम सरकार की नई शिक्षा नीति ने कर दिया। सरकार ने उच्च शिक्षा बजट को लगभग आधा कर दिया।

गवर्नमेंट कॉलेज लाहौर के छात्रों ने बात करते हुए कहा कि प्रसासन ने ना केवल फ़ीस को बढ़ाया है बल्कि कैंपस के अंदर सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगा दिया है, कैंपस के अंदर महिला और पुरुष छात्रों का एक साथ बैठना भी प्रतिबंधित है। जो छात्राएं हिजाब नहीं लगाकर आती उन पर फाइन लगाया जा रहा है और किसी आंदोलन में सम्मिलित पाए जाने पर छात्रों के होस्टल से निकाल कर उनके स्कॉलरशिप को रोक दिया जा रहा है। छात्रों ने यह भी कहा कि कई प्रोफ़ेसर बलोचिस्तान से आये छात्रों के साथ बुरा व्यवहार करते है।

UET penalises six students for protesting against fee increase

इसी बीच 16 सितम्बर को बीबी आशिफ़ा डेंटल कॉलेज की छात्रा नमृता चंदानी की लाश उसके होस्टल में मिली, जिसे पुलिस ने पहले आत्महत्या साबित करने की कोशिश किया और छात्रों और मीडिया के दबाव में जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट बाहर आये तो बलात्कार के बाद हत्या का मामला सामने आया।

सरकार और पुलिस के असंतोषजनक रवैये से परेशान होकर सिंध, बलोचिस्तान, गिलगित-बाल्टिस्तान, जम्मू-कश्मीर और पंजाब के छात्रों ने कुछ तरक्कीपसंद छात्र संगठनों के साथ मिलकर 3 नवंबर को लाहौर के South Asian Free Media Association Auditorium (SAFMAA) में एक मीटिंग की जिसमे उन्होंने एक Student Action Committee (SAC) का गठन किया। SAC के नेतृत्वकर्ता के रूप में मुज़म्मिल खान और वक्ता के रूप में असद बलोच और महिबा अहमद को चुना गया।

National student body formed to demand revival of unions

SAC ने फैसला लिया कि वे छात्र संघ को पुनर्स्थापित करने की मांग को लेकर 29 नवम्बर को लाहौर के पंजाब असेम्बली तक मार्च करेंगे। इसके लिए उन्होंने पूरे देश भर से छात्रों को आमंत्रित किया है तथा गली गली घूम कर इसका प्रचार कर रहे है।

20 नवंबर को उर्दू शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की पुण्यतिथि है। इस अवसर पर लाहौर में फ़ैज़ फेस्टिवल का आयोजन किया गया है। छात्रों ने फ़ैज़ फेस्टिवल में जाकर अपनी बातें आम जनता तक पहुचाईं, जिसके कई वीडियो भो सोशल मीडिया पर चलाये जा रहे हैं।

ना केवल मीडिया बल्कि कई छात्र संगठनों के साथ कई सामाजिक कार्यकर्ता भी छात्रों का साथ देने के लिए आगे आ रहे हैं। वरिष्ठ वकील अली अहमद कुर्द और राजनैतिक विशेषज्ञ डॉ. लाल खान ने भी आगे आकर छात्रों के साथ चलने का वादा किया है।

अब देखना यह है कि क्या पाकिस्तानी सरकार अपनी नाक बचाने के लिए छात्रों की मांगों को पूरा करेगी या फ़िर तानाशाह सरकारों की तरह यह भी दमनकारी नीतियों की मदद से छात्रों पर काबू पाने की कोशिश करेगी।


विक्रम जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र हैं 

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