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फ़ैसले पर सवाल उठा तो जज ने शिलॉन्ग टाइम्स के संपादक को मानहानि की सज़ा सुना दी

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मेघालय हाई कोर्ट ने शुक्रवार को मेघालय के मशहूर अंग्रेजी अखबार ‘शिलॉन्ग टाइम्स’ की एडिटर व सोशल एक्टिविस्ट पैट्रिशिया मुखिम और पब्लिशर शोभा चौधरी को न्यायालय की मानहानि का दोषी मानते हुए दो-दो लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। एक सप्ताह के भीतर जुर्माना अदा न कर पाने की स्थिति में दोनों को छह महीने की जेल की सजा भुगतनी होगी और अखबार को प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। कोर्ट ने दोनों को दिन भर की कार्यवाही खत्म होने तक कोर्ट रूम के कोने में बैठे रहने का आदेश दिया।

कोर्ट ने यह फैसला अखबार में पिछले साल दिसंबर में प्रकाशित दो खबरों को लेकर दिया। ये दोनों खबरें रिटायर्ड जजों और उनके परिवारों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के कोर्ट के आदेश के बारे में थीं। रिपोर्ट में कहा गया था कि आदेश के अनुसार जस्टिस एस.आर सेन, जो संयोग से शुक्रवार को सेवानिवृत्त हुए, सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीशों, जजों और उनके पति/पत्नी और बच्चों के लिए कई प्रावधान चाहते थे। रिपोर्ट में कहा गया था कि, ”पति/पत्नी और बच्चों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएँ प्रदान किए जाने के अलावा आदेश में जजों के लिए प्रोटोकॉल, गेस्ट हाउस, घरेलू नौकर, १०००० रु की दर से मोबाइल/इंटरनेट शुल्क और ८०००० रु के लिए मोबाइल प्रदान किए जाने की ज़रूरत पर बल दिया.” इन दोनों स्टोरीज खासतौर से ‘व्हेन जजेज़ जज फॉर देमसेल्वेज़’ शीर्षक वाली स्टोरी को लेकर कोर्ट ने मुखिम और चौधरी को नोटिस जारी कर यह बताने के लिए कहा था कि क्यों न उनके अखबार के खिलाफ मानहानि की कार्यवाही शुरू करी जानी चाहिए। नोटिस में कहा गया था कि कानून या केस की पृष्ठभूमि जाने बिना प्रकाशक व संपादक ने ऐसी टिप्पणियां कीं जो केस को देख रहे जज और पूरे जज समुदाय के सम्मान को चोट पहुंचाने वाला है।

इस मामले में मुखिम और चौधरी ने बिना किसी शर्त के माफी मांग ली थी। लेकिन फैसला सुनाने वाली बेंच का मानना था कि यह सजा से बचने की सोची-समझी रणनीति है। कोर्ट ने अखबार की स्टोरी को तथ्यहीन करार दिया था और कहा था कि यह रिसर्च किए बिना सिर्फ कोर्ट के आदेश को स्केंडलाइज करने के लिए प्रकाशित की गई।  फैसला देने वाली बेंच में मुख्य न्यायाधीश मो.याकूब मीर क अलावा जस्टिस सेन भी थे।

Shillong Times और उसकी एडिटर पट्रीशिया मुखिम व प्रकाशक शोभा चौधुरी को सजा की यह खबर सोशल मीडिया पर भी खूब पढ़ी जा रही है। मुखिम जानी-मानी पर्सनालिटी हैं। एक तरफ उनकी छवि इलीट तबके की प्रतिनिधि की रही है और वंचित तबकों के बीच काम करने वालों की आलोचना के निशाने पर भी रहती आई हैं। लेकिन, बहुत से मामलों में अपनी इस छवि के ठीक उलट वे जनपक्षधर तबकों के साथ मुखर होकर खड़ी भी नज़र आती रही हैं। खनन माफिया के खिलाफ वे लगातार मुखर रही हैं और रेप व यौन शोषण के मसलों में भी वे हमेशा एक्टिविस्ट्स के साथ खड़ी नज़र आती हैं। इस एडिटर के घर पर पिछले साल अज्ञात लोगों ने पट्रोल बम भी फेंक दिया था।

तस्वीर और इनपुट के लिए स्क्रोल और धीरेश सैनी का आभार।

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