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गर्मी की छुट्टी से पहले कामकाज के आखिरी दिन आज सुप्रीम कोर्ट में अयोध्‍या पर सुनवाई

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आज अयोध्‍या के भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई रखी गई है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्‍य न्‍यायाधीश रंजन गोगोई की अध्‍यक्षता वाली पांच जजों की संवैधानिक खंडपीठ मामले की सुनवाई करेगी। उसके बाद सुप्रीम कोर्ट गर्मी की छुट्टी पर चली जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट में आज कामकाज का आखिरी दिन है और लोकसभा चुनाव के छठवें चरण के लिए प्रचार का भी आखिरी दिन है। सुबह साढ़े दस बजे अयोध्‍या भूमि विवाद पर सुनवाई होना तय हुई है।

आज ही चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को यौन उत्‍पीड़न के मामले में क्‍लीन चिट दिए जाने के खिलाफ मंडी हाउस से सुप्रीम कोर्ट तक महिला संगठनों और अधिवक्‍ताओं का विरोध मार्च भी रखा गया है। इस मामले में बीते तीन दिनों से लगातार दिल्‍ली में प्रदर्शन हो रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आसपास के इलाके में मंगलवार को धारा 114 लगा दी गई थी।

 

2 COMMENTS

  1. गर्मी की छुट्टी से पहले…….( संदर्भ कल का लेख ) सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का कहना कि महिला का आरोप न्यायपालिका पर हमला है । लेकिन न्यायपालिका पर तो न जाने कब से हमला जारी है। जब दलितों का सामूहिक नरसंहार बिहार में हुआ हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई नहीं हुई। ऐसे दर्जनों बड़े और करोड़ों छोटे उदाहरण दिए जा सकते हैं । स्व जज लोया और 100 करोड़ की रिश्वत देने वाला जज और उसका राजनीतिक पिता आज भी इंसाफ की ओर के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर स्वर्ग से नजरें जमाए हुए है । और मारुति के मजदूरों हेतु जब चंडीगढ़ हाई कोर्ट के जज ने कहा था कि अगर मारुति के मजदूरों को जमानत दे दी तो विदेशी निवेश प्रभावित होगा एवं ताजा मामले में गुड़गांव कोर्ट द्वारा बिना एक भी सबूत के 13 मजदूरों को आजीवन कारावास देना यह शायद हमारे मुख्य न्यायाधीश को न तो कानून पर हमला जान पड़ता है न न्यायपालिका पर हमला जान पड़ता है न संविधान पर । आखिर जैसे पूरा देश सिमटकर भाजपा पर चला आया है बल्कि एक व्यक्ति मोदी में आ गया ऐसे ही पूरी न्याय व्यवस्था एक व्यक्ति में घनीभूत हो गई हैं ।
    आप 25 साल बाद तो आडवाणी जोशी के ऊपर चार्जशीट देते हैं। न्याय भी 250 साल में होगा। वो भी मारुति सुजुकी टाइप।

  2. पी यू डी आर/ पीयूसीएल जयप्रकाश नारायण द्वारा स्थापित एक मानवाधिकार संस्था है जिसने 2018 में मारुति के अन्यायी फैसले के खिलाफ एक लेख प्रकाशित किया था ।। पी यू डियर ने मारुति पर 2000 सन के बाद 3 अंग्रेजी और एक हिंदी रिपोर्ट प्रकाशित की है जो साइट पर उपलब्ध है कृपया पढें और खुद फैसला करें कि न्यायपालिका और संविधान पर हमला मारुति मजदूरों के केस में हुआ था या एक महिला द्वारा जो कि एक व्यक्ति मुख्य न्यायाधीश पर आरोप लगा रही थी ना कि एक मुख्य न्यायाधीश की हैसियत से उन पर आरोप लगा रही थी। जज को 500 करोड़ रुपए रिश्वत तो पक्का मिल गया है । भारत के ही नहीं पर दुनिया भर के सारे ही कानून के विद्यार्थियों शिक्षकों को इस मारुति के केस को पढ़ना अनिवार्य बना देना चाहिए ताकि उन्हें पता चले के जज को क्या नहीं करना चाहिए और न्याय कितनी खोखला शब्द है ।https://pudr.org/majadauuraon-kao-kathaora-sajaa-daenae-vaalae-maarauutai-kaesa-kae-anayaayai-adaalatai-phaaisalae

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