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सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण को अवमानना का दोषी ठहराया, 20 को सज़ा का ऐलान

सुप्रीम कोर्ट ने चर्चित वकील प्रशांत भूषण को अवमानना का दोषी करार दिया है। इस मामले में 20 अगस्त को सज़ा सुनायी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना के एक मामले में हाईकोर्ट के जज को जेल भेज दिया था, ऐसे में आशंका है कि उनके साथ भी नर्मी नहीं की जाएगी। उन्हें जेल जाने से लेकर वकालत की प्रैक्टिस करने के हक़ तक से वंचित होना पड़ सकता है। दुनिया भर के न्यायविदों और बुद्धीजीवियों ने प्रशांत भूषण के समर्थन में आवाज़ उठायी थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट पर इसका कोई असर नहीं पड़ा

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सुप्रीम कोर्ट ने चर्चित वकील प्रशांत भूषण को अवमानना का दोषी करार दिया है। इस मामले में 20 अगस्त को सज़ा सुनायी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना के एक मामले में हाईकोर्ट के जज को जेल भेज दिया था, ऐसे में आशंका है कि उनके साथ भी नर्मी नहीं की जाएगी। उन्हें जेल जाने से लेकर वकालत की प्रैक्टिस करने के हक़ तक से वंचित होना पड़ सकता है। दुनिया भर के न्यायविदों और बुद्धीजीवियों ने प्रशांत भूषण के समर्थन में आवाज़ उठायी थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट पर इसका कोई असर नहीं पड़ा।

प्रशांत भूषण ने 27 जून को सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एस.ए.बोबडे को लेकर एक ट्वीट किया था जिसे स्वत:संज्ञान लेकर सुप्रीम कोर्ट ने ये कार्रवाई की है। जस्टिस अरुण मिश्र की अध्यक्षता में बनी तीन सदस्यीय पीठ ने प्रशांत भूषण को दोषी ठहराया है। इस बेंच में जस्टिस बी.आर.गवई और जस्टिस कृष्ण मुरारी भी शामिल थे। 22 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया था और 14 अगस्त को उन्हें दोषी ठहरा दिया गया।

प्रशांत भूषण ने हाल में एक ट्वीट में लिखा था कि “जब भावी इतिहासकार देखेंगे कि कैसे पिछले छह साल में बिना किसी औपचारिक इमरजेंसी के भारत में लोकतंत्र को खत्म किया जा चुका है, वो इस विनाश में विशेष तौर पर सुप्रीम कोर्ट की भागीदारी पर सवाल उठाएंगे और मुख्य न्यायाधीश की भूमिका को लेकर पूछेंगे।”

इससे पहले, प्रशांत भूषण ने उन दो ट्वीट का बचाव किया था, जिसमें कथित तौर पर अदालत की अवमानना की गई है। उन्होंने कहा था कि वे ट्वीट न्यायाधीशों के खिलाफ उनके व्यक्तिगत स्तर पर आचरण को लेकर थे और वे न्याय प्रशासन में बाधा उत्पन्न नहीं करते। न्यायालय ने इस मामले में प्रशांत भूषण को 22 जुलाई को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 22 जुलाई के आदेश को वापस लेने के लिये अलग से दायर आवेदन खारिज कर दिया था। इसी आदेश के तहत न्यायपालिका की कथित रूप से अवमानना करने वाले दो ट्वीट पर अवमानना कार्यवाही शुरू करते हुए नोटिस जारी किया गया था।

सुनवाई के दौरान प्रशांत भूषण का पक्ष रखने वाले वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने आपत्ति जतायी थी कि अवमानना प्रक्रिया अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल की राय लिए बिना शुरू की गई और उसे दूसरी पीठ के पास भेजा जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया था।

 

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2 COMMENTS

  1. Ranjan gogoiana nyay zindabaad

  2. Who is covering Bengluru riots? Not suitable for propaganda?

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