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चिन्मयानंद केस: जांच के लिए SC ने दिए UP सरकार को SIT गठित करने के निर्देश

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उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के स्वामी शुकदेवानंद लॉ कॉलेज की एक एल एल एम छात्रा द्वारा भाजपा नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्वामी चिन्मयानंद पर लगाये गये कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को आईजी रैंक के अधिकारी की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल (एसआइटी) गठित करने के निर्देश दिए हैं.

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने लड़की और उसके घरवालों को सुरक्षा मुहैया कराने का भी निर्देश दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से इस मामले में दर्ज दो क्रॉस एफआईआर में जांच की निगरानी के लिए एक पीठ गठित करने को भी कहा है. चिन्मयानंद के वकील ओम सिंह ने जबरन वसूली का आरोप लगाते हुए क्रॉस एफआईआर दर्ज कराई है.

जस्टिस आर भानुमति और जस्टिस बोपन्ना की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी से यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि महिला को एक अलग कॉलेज में प्रवेश मिले. एडिशनल सॉलिसिटर जनरल विक्रमाजीत बनर्जी से जस्टिस भानुमति ने कहा कि हम लड़की की सुरक्षा को लेकर फिक्रमंद हैं. लडक़ी को दिल्ली पुलिस की सुरक्षा मुहैया कराई जाए. इस बाबत पुलिस कमिश्नर को बता दिया जाए.

एडिशनल सॉलिसिटर जनरल विक्रमाजीत बनर्जी सुनवाई में योगी सरकार का प्रतिनिधित्व किया.

सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए वकील से छात्रा की लोकेशन के बारे में जानकारी मांगी थी. इसके बाद योगी सरकार को लड़की को पेश करने का निर्देश दिया था. 30 अगस्त को छात्रा के मिलने के बाद उसे अदालत में पेश किया गया. यहां पर एक न्यायाधीश ने उससे बातचीत की थी. इस दौरान छात्रा ने कहा था कि वह घर वापस जाना नहीं चाहती है और उसके परिजनों को भी दिल्ली बुला लिया जाए. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि छात्रा को सुरक्षा मुहैया कराई जाए.

गौरतलब है कि लॉ की 23 साल की इस छात्रा ने 24 अगस्‍त को फेसबुक पर एक विडियो पोस्‍ट किया था, जिसमें उसने पूर्व केंद्रीय मंत्री पर आरोप लगाए थे कि उन्‍होंने पीड़‍िता समेत कई लड़कियों का यौन शोषण किया है.उसने यह भी दावा किया कि उसके पास इसके सबूत हैं. यह विडियो पोस्‍ट करने के बाद छात्रा गायब हो गई थी.

शाहजहांपुर पुलिस ने 25 अगस्‍त को चिन्‍मयानंद के कानूनी सलाहकार ओम सिंह की शिकायत पर अज्ञात व्‍यक्तियों के खिलाफ जबरन वसूली और सूचना तकनीक ऐक्‍ट के तहत एफआईआर दर्ज कराई थी.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश को यहां पढ़ा जा सकता है :

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