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CJI के खिलाफ SC बार असोसिएशन भी मैदान में, फैसले को न्‍याय के सिद्धांत का उल्‍लंघन बताया

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भारत के मुख्‍य न्‍यायाधीश रंजन गोगोई द्वारा यौन उत्‍पीड़न के आरोपों से खुद को बरी कर लिए जाने की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड असोसिएशन (एससीएओआरए) द्वारा कठोर आपत्ति दर्ज़ करने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट बार असोसिएशन ने भी इसको न्याय प्रक्रिया के खिलाफ़ बताया है। 

सुप्रीम कोर्ट बार असोसिएशन ने एक प्रस्ताव पास कर कहा है कि मुख्य न्यायाधीश द्वारा उनके खिलाफ़ सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व महिला कर्मचारी द्वारा लगाये गये यौन उत्पीड़न के आरोप पर 20 अप्रैल को खुद सुनवाई करने की जो प्रक्रिया अपनाई गई है, वह न्याय के सिद्धांत के विपरीत है तथा यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ़ है।

सुप्रीम कोर्ट बार असोसिएशन की कार्यकारी कमेटी द्वारा पारित प्रस्ताव में निवेदन करते हुए सुप्रीम कोर्ट के फुल बेंच से इस मामले में सुनवाई की मांग की है। कार्यकारी कमेटी के प्रस्ताव में कहा गया है कि इलेक्ट्रॉनिक व प्रिंट तथा सोशल मीडिया पर इस मामले से जुड़े सभी उपलब्ध स्रोतों को इकठ्ठा कर बिना किसी पूर्वाग्रह के सुनवाई की जानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन का प्रस्ताव पत्र आप यहां पढ़ सकते हैं

1 COMMENT

  1. सही अनुवाद है न्याय की स्थापित प्रक्रिया

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