Home ख़बर विशिष्ट कवि विष्णु खरे बने दिल्ली हिंदी अकादमी के उपाध्यक्ष

विशिष्ट कवि विष्णु खरे बने दिल्ली हिंदी अकादमी के उपाध्यक्ष

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मीडिया विजिल ब्यूरो

 

विशिष्ट हिंदी कवि, आलोचक और वरिष्ठ पत्रकार विष्णु खरे दिल्ली हिंदी अकादमी के नए उपाध्यक्ष बनाए गए हैं। पिछले तीन साल से इस पद को सँभाल रहीं वरिष्ठ साहित्यकार मैत्रेयी पुष्पा का कार्यकाल समाप्त हो गया है।

दिल्ली सरकार ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता वाली अकादमी की 18 सदस्यीय गवर्निंग बॉडी का पुनर्गठन किया है। शुक्रवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई।

विष्णु खरे, कई शीर्ष अख़बारों और पत्रिकाओं में महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी निभा चुके हैं। लेकिन पत्रकार से ज़्यादा उनकी पहचान हिंदी के एक अनोखे कवि और विचारक के रूप में है, जिसने कविता और विचार के तमाम पूर्व निर्धारित खाँचों को तोड़ा है। विष्णु खरे, खरी-खरी बात कहने के लिए भी मशहूर हैं। कुछ साल पहले वे दिल्ली छोड़कर अपने गृहज़िले छिंदवाड़ा चले गए थे। बीच में उनके मुँबई में होने की ख़बर थी। वे हिंदी के ऐसे लेखक हैं जो विश्व सिनेमा पर पूरे अधिकार से लिखते हैं।

9 फ़रवरी 1940 को छिंदवाड़ा में जन्मे विष्णु खरे ने शुरुआत में इंदौर और दिल्ली के कॉलेजों में पढ़ाया भी था, लेकिन फिर शब्दों की दुनिया में रम गए।  नवभारत टाइम्स से उनका लंबा जुड़ाव रहा और तथा इस अख़बार के लखनऊ और जयपर संस्करणों के संपादक भी रहे।

1960 में आया टी.एस.इलियट की कविताओं का अनुवाद “मरु प्रदेश और अन्य कविताएँ” उनका पहला प्रकाशन था और 1970 में प्रकाशित ‘एक ग़ैर रूमानी समय में’ पहला काव्य संग्रह।  ‘खुद अपनी आँख से’,  ‘सबकी आवाज की परदे में’,  ‘पिछला बाकी’ और  ‘काल और अवधि के दरमियान’ उनके अन्य संग्रह हैं।

विष्णु खरे को फ़िनलैंड के राष्ट्रीय सम्मान ‘नाइट ऑफ़ दी आर्डर ऑफ़ दी वाइट रोज’ से भी सम्मानित किया गया | इसके अतिरिक्त रघुवीर सहाय सम्मान, मैथिलि शरण गुप्त सम्मान, शिखर सम्मान, हिन्दी अकादमी दिल्ली का ‘साहित्यकार सम्मान’, मिल चुके हैं |

दिल्ली हिंदी अकादमी बीते कुछ वर्षों में अपनी सक्रियता के लिए पहचानी गई है। ख़ासतौर पर मैत्रेयी पुष्पा ने उपाध्यक्ष बनने के बाद अकादमी को दिल्ली के सांस्कृतिक परिदृश्य की अनिवार्य उपस्थिति बना दिया था। अकादमी की ओर से लगातार आयोजन हुए। ख़ासतौर पर दिल्ली के कालेजों और स्कूलों के छात्र-छात्राओं को जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया गया। साथ ही अकादमी की पत्रिका इंद्रप्रस्थ भारती भी अपने नए कलेवर के साथ सामने आई जिसका साहित्य जगत में व्यापक स्वागत हुआ।

उम्मीद की जानी चाहिए कि विष्णु खरे के उपाध्यक्ष बनने से अकादमी की शक्ल और निखरेगी। उनकी नियुक्ति की साहित्य जगत में व्यापक सराहना हो रही है।