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‘ट्रम्प’ हक़ीम, ख़तरा-ए-जान – ट्रम्प के बयान से पहले ही उसका खंडन आना चाहिए!

डोनाल्ड ट्रम्प नाम के ख़तरे से बचने का कोई भौतिक उपाय नहीं है, सिर्फ उनके सत्ता से बाहर जाने तक ये ही समाधान है कि उनकी किसी भी बात को और शायद व्हाइट हाउस की उनकी किसी भी प्रेस कांफ्रेंस को गंभीरता से न लिया जाए।

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डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान के बाद की सफाई को अगर सच माना जाए, तो वे शायद दुनिया के सबसे शानदार सेंस ऑफ ह्यूमर वाले राष्ट्राध्यक्ष हैं। उन्होंने अपने 24 घंटे पुराने बयान पर गंभीर सफाई देते हुए, उसे व्यंग्य बताया है। वे जानबूझ कर इसे मज़ाक नहीं कह रहे, क्योंकि व्यंग्य एक गंभीर बात है..ठीक वैसे ही जैसे उनका बयान, अमेरिकी जनता – ख़ासकर उनके वोटर्स के लिए एक गंभीर बात होनी चाहिए।

कोरोना महामारी के पहले तक, दुनिया की सबसे बड़ी ताक़त रहे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बारे में कहा जाता है कि वे कुछ भी कहने के पहले नहीं सोचते, बाद में भी नहीं सोचते और सोचते हैं तो पिछली बार से भी ज़्यादा अजीब या आपत्तिजनक बात कह सकते हैं। लेकिन इस बार डोनाल्ड ट्रम्प ने ‘कुछ भी’ कह देने के सारे किले एक ही बार में फ़तह कर लिए। ट्रंप ने व्हाइट हाउस की रोज़ाना प्रेस कांफ्रेंस में सलाह दी कि इस बात पर शोध होना चाहिए कि क्या फर्श, गाड़ियों और कई बार कपड़ों पर छिड़के जाने वाले डिसइन्फेक्टेंट केमिकल को शरीर में इंजेक्ट करने से कोरोना वायरस का इलाज हो सकता है? 

जी, आपने बिल्कुल सही सुना…हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था, ‘अमेरिका कोरोना संक्रमण का चरम देख चुका है और अब इससे बुरी स्थिति की उम्मीद नहीं की जा सकती..ऐसे में ये उत्साहजनक है कि स्थिति और खराब नहीं होगी..’ ये बयान भी ऐसा ही है, क्योंकि इससे ज़्यादा मूर्खता की बात शायद ट्रंप भी नहीं कह सकते, लेकिन ट्रंप के लिए ये फिर भी ग़लत साबित हो सकता है। अमरीका में कोरोना वायरस के कारण 50 हज़ार से ज़्यादा लोगों मारे जा चुके हैं और 9 लाख से अधिक लोग संक्रमित हैं। न्यूयॉर्क में 20 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

लेकिन इस सब से ट्रंप को फ़र्क नहीं पड़ता है, इसी प्रेस ब्रीफिंग के दौरान ट्रंप ने ये भी प्रस्ताव दे डाला कि अल्ट्रावॉयलेट लाइट से मरीज़ों के शरीर को इरेडिएट किया जा सकता है। हालांकि उसी प्रेस ब्रीफ़िंग कोरोना वायरस टास्क फोर्स ने इसे सावाधानीपूर्ण विनम्रता के साथ खारिज कर दिया। टास्क फोर्स की सदस्य डॉक्टर बर्क्स ने वहीं पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा, “हम इसे इलाज के तौर पर नहीं देख रहे। निश्चित तौर पर बुखार एक अच्छी चीज़ है, क्योंकि इससे आपके शरीर को प्रतिक्रिया करने में मदद मिलती है। लेकिन मैंने ऊष्मा या प्रकाश को ये करते नहीं देखा है।”

इस बयान को सुनते समय डॉक्टर बर्क्स की प्रतिक्रिया कैमरे पर दर्ज है और वो देखने लायक है। हालांकि उन्होंने अपने भाव कैसे नियंत्रित किए होंगे ये हम नहीं जानते पर नौकरी बचाने से बड़ा कारण इसके पीछे क्या ही हो सकता है। ट्रंप के इस बयान के बाद सबसे पहले हमेशा की तरह, उसी प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद पत्रकारों ने उनकी बात का विरोध किया। कोरोना वायरस टास्क फोर्स को बाकायदा स्थिति संभालनी पड़ी और फिर प्रतिक्रिया आई दुनिया भर के सोशल मीडिया से और सोशल मीडिया, मीम्स से भर गया।
और इसके बाद आई दुनिया भर के वैज्ञानिकों और डॉक्टर्स की प्रतिक्रिया, जिसमें किसी ने ट्रंप की जी भर के भर्त्सना की, कोई केवल हंस कर रह गया और कोई बेचारा हंस भी न सका। सभी ने एक स्वर में दुनिया भर के लोगों से अपील की, कि कृपया इस बात बिल्कुल गंभीरता से न लें। ये जानलेवा हो सकता है। ये ही बात डिसइन्फेक्टेंट बनाने वाली कंपनियों ने भी कही। डेटॉल और लाइज़ॉल ने बाक़ायदा ये बयान जारी किया कि उनके ऐसे किसी भी उत्पाद का शरीर के अंदर बेहद ख़तरनाक असर हो सकता है।

लेकिन शायद ये सारे बयान और अपील आने से पहले देर हो चुकी थी, इनको डोनाल्ड ट्रंप के बयान से पहले आ जाना चाहिए था।क्योंकि इनके सामने आने तक, न्यूयॉर्क डेली में ख़बर आ चुकी थी कि न्यूयॉर्क सिटी के पॉइज़न कंट्रोल सेंटर के पास लाइज़ॉल, ब्लीच और अन्य क्लीनर्स पी लेने के 30 मामले आ गए थे। ये ट्रंप के बयान के 18 घंटे के अंदर हो चुका था। जबकि पिछले साल, इसी दिन और इसी दिन इस सेंटर के पास केवल 11 ही ऐसे मामले पहुंचे थे।

यानी कि बात बेहद साफ है कि डोनाल्ड ट्रम्प अब किसी के भी क़ाबू से बाहर हैं। इस बयान के पहले तक, ये हैरानी की बात होनी चाहिए थी कि कोई व्यस्क इस तरह की बात पर यक़ीन भी कर सकता है कि डिसइन्फेक्टेंट पी लेने से या इंजेक्ट कर लेने से विषाणु शरीर के अंदर ख़त्म हो जाएगा। लेकिन न केवल अमेरिका के राष्ट्रपति ने ये बात दुनिया के सामने, टीवी स्क्रीन पर लाइव बोल दी – बल्कि अमेरिका में शायद कुछ लोगों ने इसे सच भी मान लिया। और अंततः इस का यानी कि डोनाल्ड ट्रम्प नाम के ख़तरे से बचने का कोई भौतिक उपाय नहीं है, सिर्फ उनके सत्ता से बाहर जाने तक ये ही समाधान है कि उनकी किसी भी बात को और शायद व्हाइट हाउस की उनकी किसी भी प्रेस कांफ्रेंस को गंभीरता से न लिया जाए।

दरअसल अमेरिका के लिए कोरोना वायरस के सबसे बुरी तरह प्रभावित होने के समय में भी, कोरोना से बड़ा ख़तरा अमेरिकी लोगों के लिए डोनाल्ड ट्रम्प हैं। जैसा कि नॉम चोम्स्की ने एक साक्षात्कार में कहा था, “अमेरिकी लोगों के लिए कोरोना वायरस संक्रमण का ये बुरा वक़्त है, लेकिन ज़्यादा बुरा ये है कि डोनाल्ड ट्रम्प, इस वक़्त में उनके राष्ट्रपति हैं।

(लेख में दिए गए तथ्यों के अलावा बाकी लेखक के निजी विचार हैं।)

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