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झारखंड: यौन शोषण की शिकार आदिवासी लड़की की F.I.R के बावजूद गिरफ़्तारी नहीं!

झारखंड के दुमका में दो साल से यौन शोषण झेल रही एक आदिवासी लड़की किसी तरह आरोपी पर एफआईआर तो दर्ज करा देती है, लेकिन एफआईआर दर्ज करने के एक माह गुजर जाने के बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो पाती है। महिला थाना, दुमका का बड़ा बाबू पीड़िता को कहता है कि ‘‘जब भी हम गिरफ्तारी के लिए जाते हैं, ऊपर से फोन आ जाता है कि गिरफ्तारी मत करो।’’ झारखंड के मुख्यमंत्री और डीजीपी के बयानों की रौशनी में अगर हम दुमका के मामले को देखें, तो इन दोनों का बयान और दुमका पुलिस की कार्रवाई लड़की को मुंह चिढ़ता हुआ लगता है।

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27 जुलाई 2020 को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने महिला उत्पीड़न के दो मामले पर ट्वीटर पर रिट्वीट करते हुए आरोपियों पर सख्त कार्रवाई का आदेश दिया, तो लगा कि झारखंड सरकार महिलाओं के उत्पीड़न के आरोपियों पर अब सख्त कार्रवाई करेगी और उस दोनों मामले में कार्रवाई हुई भी। पहला मामला साहेबगंज जिला के बरहेट थाना प्रभारी हरीश पाठक द्वारा एक दलित लड़की की पिटायी और गंदी-गंदी गालियां देने का मामला, इस मामले में तुरंत ही थाना प्रभारी को निलंबित करते हुए लाईन हाजिर कर दिया गया और उनपर एफआईआर दर्ज करने का आदेश भी दिया गया। दूसरा मामला था पलामू जिला के पाटन थाना के सिक्कीकला गांव की रसोईया विधवा ललिता देवी के घर में घुसकर गुंडों द्वारा उनकी दोनों बेटियों के साथ मारपीट करने व दुष्कर्म करने की कोशिश का मामला, इस मामाले में भी आरोपियों की गिरफ्तारी हुई।

इन दोनों मामलों का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था और कई लोगों ने ट्वीटर पर इस वीडियो को ट्वीट भी किया था। मुख्यमंत्री के आदेश से उत्साहित डीजीपी एमवी राव ने भी 28 जुलाई को ट्वीट करते हुए कहा कि ‘‘झारखंड पुलिस महिलाओं की प्रतिष्ठा उनके सम्मान को कायम रखने के लिए प्रतिबद्ध है। महिलाओं के खिलाफ किसी भी तरह का दुव्र्यवहार या आपराधिक कृत्य बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। महिलाओं को प्रताड़ित करने वाला कोई भी हो, चाहे वह पुलिस अफसर ही क्यों नहीं हो, उसे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।’’

दूसरी तरफ झारखंड के दुमका में दो साल से यौन शोषण झेल रही एक आदिवासी लड़की किसी तरह आरोपी पर एफआईआर तो दर्ज करा देती है, लेकिन एफआईआर दर्ज करने के एक माह गुजर जाने के बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो पाती है। महिला थाना, दुमका का बड़ा बाबू पीड़िता को कहता है कि ‘‘जब भी हम गिरफ्तारी के लिए जाते हैं, ऊपर से फोन आ जाता है कि गिरफ्तारी मत करो।’’

झारखंड के मुख्यमंत्री और डीजीपी के बयानों की रौशनी में अगर हम दुमका के मामले को देखें, तो इन दोनों का बयान और दुमका पुलिस की कार्रवाई लड़की को मुंह चिढ़ता हुआ लगता है। दो साल से यौन शोषण झेल रही आदिवासी लड़की मानसिक रूप से काफी परेशान है और आत्महत्या तक कर लेने की बात कर रही है, क्योंकि आरोपी लगातार लड़की की नग्न तस्वीर अपने और लड़की के दोस्तों-रिश्तेदारों को दिखाकर लड़की के चरित्र पर कीचड़ उछाल रहा है।

यह है पूरा मामला

झारखंड के दुमका जिला की रहनेवाली आदिवासी लड़की गुड़िया (बदला हुआ नाम) ने महिला थाना में आरोपी पर दर्ज मुकदमे (प्राथमिकी संख्या-07/2020) में आरोप लगाया है कि ‘‘सन् 2018 में जब मैं एमएससी की पढ़ाई कर रही थी, उस समय मेरे मामा के बेटा के ससुराल से संबंध रखने वाला सच्चिदा मरांडी, उम्र-30 वर्ष, पिता-मसीह मरांडी, मौजा-दुमकाडांगा, थाना-महेशपुर, जिला-पाकुड़ (झारखंड) मेरे संपर्क में आया और मुझसे प्रेम जताते हुए मुझसे शादी का वादा किया। शादी का झांसा देकर 17 जून 2018 को मेरी इच्छा के विरूद्ध मेरे साथ मेरे ही घर में शारीरिक संबंध बनाया। उस समय सच्चिदा कहीं नौकरी नहीं कर रहा था और उसके घर वाले भी पढ़ी-लिखी लड़की जानकर एवं इस आशा से कि मुझे जल्द ही नौकरी मिल जाएगी, सच्चिदा मरांडी से मेरी शादी का प्रस्ताव भी मेरे घर भिजवाया था। इस स्थिति में सच्चिदा लगातार मेरे घर आता रहा और मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाता रहा, यह बोलकर कि हम दोनों की शादी अब हो जाएगी। यह क्रम 05 मई 2020 तक चला। इसी बीच जून 2019 में ही मैं गर्भवती भी हो गई थी, लेकिन सच्चिदा ने दवा खिलाकर मेरा गर्भपात करवा दिया। इस प्रकार लगातार यौन शोषण के कारण जब मैंने शाादी के लिए दबाव बनाना शुरू किया तो 6 मई 2020 को वह मुझे अपने घर ले गया, जहां मैं 12 मई तक रही। लेकिन जब मेरे माता-पिता और उसके रिश्तेदार भी सच्चिदा के घर हमारी शादी के लिए पहुंच गये, तो उसके माता-पिता और उसने भी शादी से इंकार कर दिया। मुझे जानकारी दी गई कि सच्चिदा मरांडी किसी अन्य लड़की से शादी करना चाहता है, जिससे इसको दहेज मिलने वाला है। ऐसी अवस्था में हमलोग अपने घर आ गये, फिर भी मेरे माता-पिता ने इससे शादी का काफी प्रयास किया, लेकिन उनलोगों ने इंकार कर दिया।’’

पीड़िता ने मुझे बताया कि ‘‘जब एफआईआर के लिए मैंने 1 जून 2020 को महिला थाना में आवेदन दिया, तो वहां सिर्फ व सिर्फ मेरी कांउसेलिंग के नाम पर खानापूर्ति की जा रही थी। 5 जून और 14 जून को मेरी काउंसेलिंग हुई और फिर कांउसेलिंग की तिथि दे दी गई। तब जाकर 22 जून को मैंने दुमका पुलिस अधीक्षक (एसपी) अम्बर लकड़ा को एक आवेदन दिया, तब जाकर 25 जून को महिला थाना में मेरा मुकदमा दर्ज हुआ। 9 जुलाई को सदर अस्पताल, दुमका में मेरा मेडिकल हुआ। जब मैं मेडिकल कराने गयी, तो वहां पुरूष डाॅक्टर था। मैंने महिला डाॅक्टर को बुलाने के लिए कहा। महिला डाॅक्टर आ तो गई लेकिन वहां मौजूद नर्सों ने ये बोलना शुरू कर दिया कि अगर पुरूष डाॅक्टर से ही मेडिकल करा लेती तो क्या होता? वे काफी भद्दी तरीके से बोल रही थी, लगता था कि मेडिकल कराना ही गुनाह है। फिर 14 जुलाई को जज के सामने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान दर्ज किया गया।’’

164 के तहत दर्ज बयान में पीड़िता ने जज को बताया कि ‘‘मेरे साथ सच्चिदा ने अप्राकृतिक रूप से भी यौनाचार किया। मैं उसकी इन हरकतों से परेशान होकर उससे रिश्ता तोड़ने को बोला, तो वह मेरी नग्न तस्वीर वायरल करने का धमकी देने लगा। अब मैंने उससे रिश्ता तोड़कर कहीं और शादी करनी चाही, तो वह मेरी तस्वीरों को उनको दिखाकर मुझे बदचलन बताकर रिश्ता तुड़वा देता है।’’

पीड़िता ने मुझे बताया कि ‘‘2019 में सच्चिदा की शिक्षक की नौकरी लगी है, उसके बाद से ही वह दूसरी लड़की से भी प्यार का नाटक करने लगा। मुझे जब जानकारी हुई तो मैंने तभी रिश्ता खत्म करना चाहती थी, लेकिन वह हर बार शादी का लोभ देकर चुप करा देता था। मैंने जनवरी 2020 में उसका नंबर भी ब्लाॅक कर दिया था, तो वह मुझे फेसबुक पर मैंसेंजर में धमकी देकर कि नंबर अनब्लाॅक करो, नहीं तो अंजाम बुरा होगा, फिर से संबंध रखने को मजबूर कर दिया।’’

पीड़िता ने बताया कि वे और गोड्डा काॅलेज में समाजशास्त्र विषय की असिस्टेंट प्रोफेसर रजनी मुर्मू आरोपी की गिरफ्तारी को लेकर 20 जुलाई को दुमका एसपी अम्बर लकड़ा से भी मिली। रजनी मुर्मू बताती हैं कि ‘‘एसपी अम्बर लकड़ा ने पहले तो हमसे मिलने से ही मना कर दिया था, बाद में काफी दबाव देने पर बातचीत को तैयार हुए। बातचीत के क्रम में कहा कि गिरफ्तारी के बाद लड़के का जिंदगी बर्बाद हो जाएगा, उसका कैरियर खराब हो जाएगा, इसलिए आपलोग समझौता कर लीजिए। लेकिल 28 जुलाई को फोन पर कहा कि आरोपी की गिरफ्तारी करवा रहे हैं।’’

रजनी मुर्मू कहती है कि ‘‘मुझे जब पता चला कि आरोपी को सामाजिक संगठन ‘संताल परगना जागवार वैसी’ का भी संरक्षण प्राप्त है, तो मैंने सात जुलाई की फेसबुक कर संगठन से निवेदन किया कि आप आरोपी को बचाने में रूचि ना लें, क्योंकि इससे आपके संगठन की छवि खराब होगी। मेरे निवेदन के जवाब में ‘संताल परगना जागवार वैसी’ के नेताओं ने अपने लेटर पैड पर मुझे ही पांच दिनों के अंदर स्पष्टीकरण देने, अन्यथा कानूनी कार्रवाई करने की धमकी दे दी। अब सुनने में आ रहा है कि ये लोग मेरा सामाजिक बहिष्कार भी करेंगें।

 

मुर्मू कहती हैं कि आरोपी ने भी मुझे व्हाट्सअप पर धमकी देते हुए मैसेज किया कि आप फेसबुक पर मेरे बारे में पोस्ट कीजिएगा, तो देख लेंगे।’’ रजनी मुर्मू पूछती हैं कि ‘क्या एक आदिवासी लड़की के यौन शोषण के आरोपी को संरक्षण नहीं देने का निवेदन करना भी जुर्म है? साथ ही ये यह भी बताती हैं कि पीड़िता मानसिक रूप से काफी परेशान है और आत्महत्या तक कर लेने की बात कर रही है।

पीड़िता बताती है कि आरोपी सच्चिदा मरांडी की गिरफ्तारी नहीं होने का सबसे बड़ा कारण यह है कि उसका झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के नेताओं से नजदीकी है, इसीलिए मेरे मुकदमे का जांच अधिकारी (मुफस्सिल थाना के पीएसआई अरविंद कुमार राय) उसे गिरफ्तार करने में रूचि नहीं ले रहा है। जांच अधिकारी ने मेरे मामले केे गवाह की उम्र 60 साल से अधिक होने के कारण उसकी गवाही लेने से भी इंकार कर दिया है और अब गिरफ्तारी से पहले सुपरविजन की बात कर रहा है।’’

इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस की लापरवाही व ऊपर का दबाव होने से आरोपी की गिरफ्तारी ना होने के कारण दुमका पुलिस और झारखंड सरकार पर भी काफी सवाल उठ रहे हैं। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री व डीजीपी के कथनानुसार महिलाओं के उत्पीड़न को बर्दाश्त नहीं करेंगे की रोशनी में दो साल से यौन शोषण झेल रही आदिवासी लड़की का आरोपी कब तक गिरफ्तार होता है या फिर पीड़िता परेशान होकर आत्महत्या करने को मजबूर हो जाती है?

मालूम हो कि दिसंबर 2019 के झारखंड विधानसभा चुनाव में हेमंत सोरेन ने दुमका व बरहेट दोनों विधानसभा से चुनाव लड़ा था और दोनों सीट से उनकी जीत हुई थी। बाद में दुमका सीट उन्होंने खाली कर दिया, जहां कुछ ही दिन में उपचुनाव होन वाले हैं।


 

रूपेश कुमार सिंह , स्वतंत्र पत्रकार हैं।

 


 

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