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झारखंड: पूर्व DGP पर बहू ने किया केस- ‘पति समलैंगिक, ससुर ने संबंध बनाना चाहा!’

झारखंड में सबसे ज्यादा समय तक डीजीपी रहने वाले और महिलाओं को प्रताड़ना से बचाने के लिए महिला शक्ति एप लॉन्च करने वाले झारखंड के पूर्व डीजीपी डीके पांडेय पर उनकी ही बहु ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनकी बहु ने 27 जून 2020 को महिला थाना में ससुर डीके पांडेय, सास पूनम पांडेय और पति शुभांकर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। इसमें उसने आरोप लगाया कि पति के समलैंगिक होने के चलते ससुर ने दूसरों से संबंध बनाने को कहा। खुद ने भी संबंध बनाना चाहा।

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”15 फरवरी 2016 को हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार रांची में मेरी शादी शुभांकर के साथ शादी हुई थी। इसके बाद मैं पति और सास-ससुर के साथ जमशेदपुर सर्किट हाउस के समीप केडी अपार्टमेंट में फ्लैट नंबर 118 और 121 में रहने के लिए चली गई थी। मुझे शादी के दूसरे दिन पता चला कि मेरा पति शुभांकर समलैंगिक (गे) है। मैंने इसकी जानकारी ससुर डीके पांडेय और सास पूनम पांडेय को दी। यह बताने पर भी सास-ससुर की ओर से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला। बल्कि झूठा आश्वासन देते हुए बताया कि यह उनके बेटे को मेडिकल प्रॉब्लम है, जो चेकअप के बाद ठीक हो जाएगा।

मेडिकल चेकअप के बाद वह सामान्य आदमी की तरह बिहेव करने लगेगा। सास-ससुर के इस झूठे दिलासे पर मैं 3 वर्षों तक इंतजार करती रही कि शायद उसके पति के बिहेवियर में बदलाव आएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मैं तब काफी परेशान हो गई, जब पति, सास और ससुर तीनों ने सुखद वैवाहिक जीवन व्यतीत करने के लिए किसी दूसरे व्यक्ति के साथ अतिरिक्त संबंध बनाने की बात कहने लगे। एक समारोह के दौरान जब मैं अकेली थी तो ससुर डीके पांडेय ने अपने साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए मुझे सूचित किया।

हालांकि, इस बात की जानकारी परिवार में किसी भी सदस्य को नहीं है। ससुर की इस हरकत से मुझे बहुत परेशानी हुई और काफी मानसिक आघात भी हुआ। जिंदगी से मैं इस कदर परेशान हो चुकी थी कि आत्महत्या करने तक की सोचने लगी थी। दिन-ब-दिन शुभांकर में समलैंगिकता के लक्षण बढ़ते जा रहे थे। वह मुझसे मिलना और बात तक करना पसंद नहीं कर रहा था। कोई रिश्तेदार से भी वह बात नहीं करता था। सास पूनम पांडे हमेशा मुझे जोर देकर कहती थी कि एनजीओ में बिजी रहो। सास ऐसा इसलिए कहती है कि शुभांकर से मैं दूर रह सकूं।”

यह दास्तान है झारखंड के पूर्व डीजीपी डीके पांडेय की बहु रेखा मिश्रा की, जिसने रांची महिला थाना में ससुर डीके पांडेय, सास पूनम पांडेय और पति शुभांकर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराते हुए उक्त तमाम बातें लिखी हैं।

बता दें कि झारखंड में सबसे ज्यादा समय तक डीजीपी रहने वाले पूर्व डीजीपी डीके पांडेय अपने कार्यकाल में काफी विवादित रहे बावजूद वे पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के कृपा पात्र बने रहे। सबसे मजेदार बात यह है कि महिलाओं को प्रताड़ना से बचाने के लिए महिला शक्ति एप लॉन्च करने वाले डीके पांडेय पर उनकी ही बहू ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनकी बहु रेखा मिश्रा पांडेय ने 27 जून 2020 को महिला थाना में ससुर डीके पांडेय, सास पूनम पांडेय और पति शुभांकर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। इसमें उसने आरोप लगाया कि पति के समलैंगिक होने के चलते ससुर ने दूसरों से संबंध बनाने को कहा। खुद ने भी संबंध बनाना चाहा।

पुलिस ने ससुर डीके पांडेय, सास पूनम पांडेय और पति शुभांकर के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। दर्ज प्राथिमिकी में कहा गया है कि तीन साल पहले उसकी शादी शुभांकर से हुई थी। शादी के बाद से ही सास, ससुर और पति दहेज की मांग को लेकर ताना देने लगे। मानसिक रूप से प्रताड़ना का दौर शुरू हो गया। जब वह विरोध करती थीं तो उन्हें धमकाया भी जाता था। इससे परेशान होकर वह अपने मायके आ गईं।

पुलिस के अनुसार, रेखा मिश्रा भाजपा नेता गणेश मिश्रा की बेटी हैं और अपना एनजीओ चलाती हैं। दो दिन पहले गणेश मिश्रा खुद अपनी बेटी रेखा समेत परिवार के सदस्यों के साथ कोतवाली डीएसपी से मिले थे। इसके बाद 27 जून 2020 को रेखा के बयान पर महिला थाना रांची में प्राथमिकी दर्ज कराई।

अजीबो गरीब हरकतों और विवादों से गहरा रिश्ता रहा है डीके पांडेय का। बता दें फरवरी 2016 में महाशिवरात्रि के दिन डीके पांडेय परिवार के साथ शक्तिपीठ रजरप्पा पहुंचे थे। उन्होंने सांप को गले में लपेट लिया था। प्रधान वन संरक्षक वन्य जीव रत्नाकर सिंह ने डीजीपी पांडेय से जवाब तलब करने का निर्देश दिया था। इसके बाद उन्हें नोटिस दिया गया था।

वहीं पत्नी के नाम पर गलत तरीके से गैर मजरुआ जमीन खरीदी और घर भी बनाया। बताना जरूरी होगा कि डीके पांडेय पर कांके अंचल के चामा मौजा में पत्नी पूनम पांडेय के नाम पर गलत तरीके से 50.9 डिसमिल गैर मजरुआ जमीन खरीदने और उस पर घर बनाने का भी आरोप है। इस जमीन का खाता नंबर 87 और प्लॉट नंबर 1232 है। अधिकारियों के मुताबिक इस जमीन की खरीद-बिक्री अवैध है। अब इस मामले की जांच की जा रही है कि कैसे इस जमीन की रजिस्ट्री और जमाबंदी हुई।

बताते चलें कि अपने कार्यकाल में विवादित और रघुवर दास के कृपा पात्र रहे पूर्व डीजीपी डीके पांडेय अवकाश प्राप्ति के बाद भाजपा की सदस्यता ली थी।

उल्लेखनी है कि पूर्व डीजीपी डीके पांडेय नक्सल उन्मुलन के नाम पर फर्जी एनकाउंर करवाने में माहिर रहे हैं। बता दें कि पलामू जिले का बकोरिया में 12 लोगों की हत्या फर्जी एन्काउंटर में हुई थी, जिसमें पांच नाबालिग बच्चे शामिल थे और तत्कालीन डीजीपी डीके पांडेय ने घटना स्थल पर ही पुलिस कर्मियों को इनाम बांटा था। इस मामले का जब खुलासा हुआ तो डीके पांडेय ने अपने प्रभाव से मामले को प्रभावित करने की कोशिश की। जिसकी झारखंड के हाईकोर्ट की फटकार के बाद सीबीआई जांच चल रही है। इसमें मुख्यमंत्री रघुवर दास का फंसने की भी संभावना बताई जा रही है। वैसे डीके पांडेय के हिस्से में बहुत सारे विवादित मामले हैं।

बता दें कि बकोरिया कांड की सीआईडी जांच की कई बिंदुओं पर झारखंड हाईकोर्ट ने संदेह जताया था। अत: 22 अक्तूबर 2018 को हाईकोर्ट ने बकोरिया मुठभेड़ कांड की सीबीआई जांच के आदेश दिये थे। जिसके बाद 19 नवंबर को सीबीआई दिल्ली की स्पेशल सेल ने संख्या RC.4(S)/2018/SC-1/CBI/NEW DELHI के तहत एफआईआर दर्ज की गई।

प्राथमिकी में आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 353, 307, आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-B)A/26/27/35 और एक्सप्लोसिव सब्सटांस एक्ट की धारा 4/5 के तहत दर्ज की गयी है। इस कांड की जांच सीबीआई की स्पेशल क्राइम ब्रांच नयी दिल्ली की तरफ से की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि सीआइडी के तत्कालीन एडीजी और वर्तमान में झारखंड के डीजीपी एमवी राव ने जब जांच शुरू की तभी झारखंड के तत्कालीन डीजीपी डीके पांडेय ने जांच की दिशा को प्रभावित करने की कोशिश में एमवी राव को निर्देश दिया कि वे जांच की गति धीमी रखें, कोर्ट के आदेश की चिंता नहीं करें। मगर एमवी राव ने डीके पांडेय की बात मानने से साफ इंकार कर दिया था। नतिजा यह रहा कि जिसके तुरंत बाद उनका तबादला सीआइडी से नयी दिल्ली स्थित ओएसडी कैंप में कर दिया गया, जबकि यह पद स्वीकृत भी नहीं था। राव को 13 नवंबर 2017 एडीजी सीआइडी के रूप में पदस्थापित किया गया था और 13 दिसंबर को उन्हें पद से हटा दिया गया। सूत्र बताते हैं कि अब तक किसी भी अफसर को बिना उसकी सहमति के ओएसडी कैंप में पदस्थापित नहीं किया गया है।

इस बावत एडीजी एमवी राव ने अपने तबादले के विरोध में गृह सचिव को एक पत्र लिखा था। पत्र की प्रतिलिपि झारखंड के राज्यपाल और मुख्यमंत्री के अलावा केंद्रीय गृह मंत्रालय को भी भेजी गयी। पत्र में यह भी कहा गया कि ”बकोरिया कांड की जांच सही दिशा में ले जानेवाले और दर्ज एफआइआर से मतभेद रखने का साहस करनेवाले अफसरों का पहले भी तबादला किया गया है। यह एक बड़े अपराध को दबाने और अपराध में शामिल अफसरों को बचाने की साजिश है।”

सनद रहे एमवी राव के पत्र के आलोक में गृह विभाग द्वारा तत्कालीन डीजीपी डीके पांडेय को नोटिस भेजा गया। बकोरिया कांड मामले में अपनी भूमिका पर पक्ष रखने को कहा गया। डीके पांडेय से प्रतिक्रिया मांगी गयी। गृह विभाग उनका पक्ष जानने के बाद ही उनपर कार्रवाई करेगा कहा गया। मगर अभी तक मामला ‘ढाक का तीन पात’ ही रहा है।

दूसरी तरफ गिरिडीह 9 जून 2017 को गिरिडीह जिला के पारसनाथ पर्वत की तलहटी में सीआरपीएफ कोबरा ने दुर्दांत नक्सली बताकर डोली मजदूर मोतीलाल बास्के की हत्या 11 गोली मारकर कर दी थी, जिसके खिलाफ में बहुत बड़ा आंदोलन हुआ था और इस घटना की सीबीआई जांच या न्यायिक जांच की मांग की गयी थी। लेकिन तत्कालीन रघुवर सरकार ने आंदोलनकारियों की मांगों को अनसुना करते हुए इस फर्जी मुठभेड़ के खिलाफ आवाज उठा रहे ट्रेड यूनियन ‘मजदूर संगठन समिति’ को ही प्रतिबंधित कर दिया था। वहीं घटना के तुरंत बाद तत्कालीन डीजीपी डीके पांडेय ने जवानों को डोली मजदूर मोतीलाल बास्के की हत्या करने के इनाम स्वरूप जश्न मनाने के लिए एक लाख रूपए दिए थे।

अब इस फर्जी मुठभेड़ में डोली मजदूर मोतीलाल बास्के की हत्या की जांच फिर से शुरु हो गई है।

27 जून 2020 को हजारीबाग जोन के डीआइजी ने गिरिडीह विधायक की उपस्थिति में मोतीलाल बास्के की पत्नी पार्वती मुर्मू व ग्रामीणों से इस बावत पूछताछ की है।

वैसे हेमंत सोरेन की सरकार आने के बाद एमवी राव झारखंड के डीजीपी बनाए गए हैं। अब देखना होगा कि उक्त तमाम मामलों पर पुलिस का रुख क्या होता है?


विशद कुमार, झारखंड के स्वतंत्र पत्रकार हैं और लगातार जन-सरोकार के मुद्दों पर मुखरता से ग्राउंड रिपोर्टिंग कर रहे हैं।

 


 

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