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झुग्गियां तोड़ने के फ़ैसले के ख़िलाफ़ भाकपा माले की भूख हड़ताल दूसरे दिन जारी!

भाकपा माले के राज्य सचिव रवि राय ने कहा,"यह केंद्र सरकार ही है जिसने अदालत में झुग्गियों को प्रदूषण के लिए दोषी ठहराया था; और अब वे विध्वंस पर 4 सप्ताह की रोक के बारे में बात कर रहे हैं। हम कैसे अदालत में कही गयी उनकी बात पर भरोसा कर लें?  हम दिल्ली सरकार के विधानसभा में किए वादे का स्वागत करते हैं। लेकिन हमारा आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक कि झुग्गियों के हटाये जाने के इस आदेश को स्थायी रूप से रद्द नहीं कर दिया जाता या फ़िर झुग्गीवासियों के लिए ज़मीन के पक्के कागज़ों के साथ नज़दीक ही कहीं पुनर्वास की गारंटी नहीं की जाती।"

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भाकपा माले द्वारा 48 घंटे की भूख हड़ताल का आज दूसरा दिन है। भाकपा माले राज्य सचिव रवि राय के साथ शकुंतला देवी, सीता देवी, रामेश्वरी देवी, लरजरी देवी और सीता देवी (वजीरपुर झुग्गी के पांच निवासी) भूख हड़ताल जारी रखे हुए हैं।

भूख हड़ताल शुरू होने के बाद से हमें झुग्गियों को तोड़े जाने के मुद्दे पर दो घटनाक्रम हमारे सामने हैं। पहला केंद्र सरकार का न्यायालय में कहना कि अगले चार सप्ताह तक कोई तोड़फोड़ नहीं होगी।

दूसरा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का दिल्ली विधानसभा में वादा करना कि मौजूदा निवास स्थान के पास ही झुग्गी वासियों के लिए पुनर्वास के अधिकार की दिल्ली सरकार द्वारा रक्षा की जाएगी।

इन घटनाक्रमों पर प्रतिक्रिया देते हुए रवि राय ने कहा, “ये दोनों ही प्रतिक्रियाएँ वजीरपुर, मानसरोवर, केशवपुरम, कीर्ति नगर और अन्य क्षेत्रों की झुग्गियों में रहने वाले लोगों के लगातार बढ़ रहे विरोध और उससे बनने वाले दबाव के कारण आयी हैं। हमें यह याद रखना है कि यह केंद्र सरकार ही है जिसने अदालत में झुग्गियों को प्रदूषण के लिए दोषी ठहराया था; और अब वे विध्वंस पर 4 सप्ताह की रोक के बारे में बात कर रहे हैं। हम कैसे अदालत में कही गयी उनकी बात पर भरोसा कर लें?  हम दिल्ली सरकार के विधानसभा में किए वादे का स्वागत करते हैं। लेकिन हमारा आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक कि झुग्गियों के हटाये जाने के इस आदेश को स्थायी रूप से रद्द नहीं कर दिया जाता या फ़िर झुग्गीवासियों के लिए ज़मीन के पक्के कागज़ों के साथ नज़दीक ही कहीं पुनर्वास की गारंटी नहीं की जाती।

झुग्गीवासी हमेशा के लिए असुरक्षा और डर के साए में नहीं रह सकते। उनके अधिकारों को सुनिश्चित किया जाना चाहिए”।

शकुंतला देवी ने कहा, “मैंने पिछले 28 वर्षों के अपने प्रवास के दौरान झुग्गियों को हटाए जाने के लिए कई प्रयास देखे हैं। मैं पूछना चाहती हूँ कि हमें अब तक उचित पुनर्वास और जमीन का अधिकार क्यों नहीं दिया गया? केंद्र और राज्य दोनों सरकारों को हमारी वर्तमान झुग्गी के पास उचित पुनर्वास की ज़िम्मेदारी लेनी होगी।”

हम यह बताना चाहते हैं कि झुग्गियों को हटाए जाने के आदेश को स्थायी रूप से रद्द किया जाना चाहिए। उसके बाद पुनर्वास की प्रक्रिया आरंभ होनी चाहिए। झुग्गियों के प्रत्येक परिवार को उनके वर्तमान निवास स्थान के समीप उचित पुनर्वास और ज़मीन का अधिकार दिया जाना चाहिए। निश्चित रूप से एक नया सर्वेक्षण होना चाहिए जिसमें यह आकलन किया जाए कि कितने परिवार झुग्गियों में रह रहे हैं ताकि सभी के अधिकारों की गारंटी हो।

भाकपा माले कल शाम 4 बजे झुग्गीवासियों के अधिकारों के विषय पर एक विस्तृत चार्टर ऑफ डिमांड जारी करेगा।


(भाकपा माले दिल्ली राज्य इकाई की ओर से सुचेता डे द्वारा जारी)

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