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कांकेर में टेंडर से पहले ही करोड़ों का निर्माण शुरू, CPM ने बताया भ्रष्टाचार !

माकपा राज्य सचिव संजय पराते ने बताया कि कांकेर जिले के लखनपुरी के पास ग्राम कानापोड़ में 100 सीटर विशेष कन्या छात्रावास का निर्माण प्रस्तावित है, जिसकी अनुमानित लागत 4.5 करोड़ रुपये हैं। 26 जून को इसके लिए कांकेर कलेक्टर ने निविदा जारी की है तथा कार्य पूर्ण करने हेतु अवधि 15 माह निर्धारित की गई थी। इसी बीच कांग्रेस-भाजपा के नेताओं के साथ संबंध रखने वाले खरसिया के एक ठेकेदार को काम देने का फैसला उच्च स्तर पर पिछले दरवाजे से कर लिया गया है और एक सप्ताह के अंदर ही टेंडर की शर्तों में संशोधन करते हुए कार्य पूर्ण करने की अवधि घटाकर सवा साल की जगह छह माह कर दी गई। माकपा नेता का आरोप है कि यह परिवर्तन केवल इसलिए किया गया है कि बहुत से ठेकेदार प्रतियोगिता से बाहर हो जाएं और मंत्रियों व अधिकारियों के चहेते ठेकेदार को काम दिया जा सके।

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मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के लखनपुरी में प्रस्तावित कन्या छात्रावास के निर्माण में टेंडर प्रक्रिया से ही उच्च स्तर पर राजनैतिक और प्रशासनिक संरक्षण में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि खरसिया के एक ठेकेदार को टेंडर देने के लिए निविदा की शर्तें ही बदल दी गई है, ताकि अन्य ठेकेदार प्रतियोगिता से बाहर हो जाये। इस ठेकेदार की भाजपा के एक पूर्व मंत्री और कांग्रेस के एक वर्तमान मंत्री से रिश्तेदारी बताई जाती है। माकपा का कहना है कि यही रिश्तेदारी इस भ्रष्टाचार में कांग्रेस और भाजपा, दोनों की मिलीभगत स्पष्ट करने के लिए काफी है। पार्टी का यह भी कहना है कि टेंडर स्वीकृत होने से पूर्व ही यहां हो रहे निर्माण कार्य को देखने राज्य के मुख्य सचिव आर पी मंडल भी यहां का दौरा कर चुके हैं। इससे भी स्पष्ट है कि इस निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार को किस स्तर से संरक्षण मिल रहा है।

पूरे मामले का खुलासा करते हुए माकपा राज्य सचिव संजय पराते ने बताया कि कांकेर जिले के लखनपुरी के पास ग्राम कानापोड़ में 100 सीटर विशेष कन्या छात्रावास का निर्माण प्रस्तावित है, जिसकी अनुमानित लागत 4.5 करोड़ रुपये हैं। 26 जून को इसके लिए कांकेर कलेक्टर ने निविदा जारी की है तथा कार्य पूर्ण करने हेतु अवधि 15 माह निर्धारित की गई थी। इसी बीच कांग्रेस-भाजपा के नेताओं के साथ संबंध रखने वाले खरसिया के एक ठेकेदार को काम देने का फैसला उच्च स्तर पर पिछले दरवाजे से कर लिया गया है और एक सप्ताह के अंदर ही टेंडर की शर्तों में संशोधन करते हुए कार्य पूर्ण करने की अवधि घटाकर सवा साल की जगह छह माह कर दी गई। माकपा नेता का आरोप है कि यह परिवर्तन केवल इसलिए किया गया है कि बहुत से ठेकेदार प्रतियोगिता से बाहर हो जाएं और मंत्रियों व अधिकारियों के चहेते ठेकेदार को काम दिया जा सके।

उन्होंने कहा कि खरसिया के किसी खास ठेकेदार को ही काम देने की आशंका को इस बात से बल मिलता है कि इस ठेकेदार ने निर्माण स्थल पर लाखों की निर्माण सामग्री और मशीनें डाल दी है और एक इंजीनियर नियुक्त करके खुदाई का काम भी शुरू कर दिया है। माकपा नेता ने निर्माण स्थल पर जमा सामग्री की तस्वीरें और ठेकेदार द्वारा नियुक्त इंजीनियर से बातचीत की वीडियो रिकॉर्डिंग भी मीडिया के लिए जारी की है। उन्होंने कहा कि टेंडर स्वीकृत होने से पूर्व ही हो रहे इस निर्माण कार्य को देखने राज्य के मुख्य सचिव आर पी मंडल भी यहां का दौरा कर चुके हैं।

 

छात्रावास निर्माण से पहले ही टेंडर के चरण से भ्रष्टाचार होने का आरोप लगाते हुए पराते ने प्रशासन से पूछा है कि कोई दोमंजिला भवन 15 माह की जगह 6 माह में कैसे पूरा हो सकता है और इस प्रकार निर्मित भवन की गुणवत्ता क्या होगी? यह सरासर आदिवासी छात्रावासी बच्चियों की जान को जोखिम में डालना है। उन्होंने कहा कि कांकेर का आदिवासी विकास विभाग, जिसकी इस मामले को देखने की सीधी जिम्मेदारी बनती है, इस भ्रष्टाचार पर मौन है, क्योंकि इसमें सीधी हिस्सेदारी कलेक्टर, मुख्य सचिव, सत्ताधारी पार्टी और विपक्षी भाजपा के नेताओं की है। भ्रष्टाचार के नाले में प्रशासनिक संरक्षण और राजनैतिक मिलीभगत के बिना कोई ठेकेदार टेंडर-पूर्व ही निर्माण शुरू करने की हिम्मत नहीं कर सकता।

माकपा ने मांग की है कि रायगढ़ के उक्त ठेकेदार को टेंडर प्रक्रिया से ही बाहर किया जाए तथा स्थानीय लोगों को इस भवन के निर्माण कार्य का जिम्मा दिया जाये। पार्टी ने प्रशासन के संरक्षण में टेंडर के चरण से ही हो रहे इस भ्रष्टाचार की जांच करने की भी मांग की है।


विज्ञप्ति पर आधारित

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