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कानपुर शेल्टर होम में लड़कियों से हुई अमानवीयता के ख़िलाफ़ AIPWA का प्रदर्शन

ऐपवा नेताओं ने राज्य और राष्ट्रीय महिला आयोग से कानपुर सेल्टर होम मामले को संज्ञान मे लेने की मांग की है। ऐपवा ने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के लिए कानपुर शेल्टर होम मामले की उच्च स्तरीय व निष्पक्ष न्यायिक जांच कराने और इस मामले की जिम्मेदारी लेते हुए राज्य की महिला व बाल विकास मंत्री के इस्तीफे की मांग की है। ऐपवा नेताओं ने कहा कि शेल्टर होम में बच्चियों और किशोरियों के सम्मान सुरक्षा और स्वास्थ्य की गारंटी की जाए। शेल्टर होम के लिए श्वेत पत्र जारी किया जाए। निश्चित समयावधि पर सामाजिक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में होम शेल्टर की मॉनिटरिंग को सुनिश्चित किया जाय।

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उत्तर प्रदेश के कानपुर शेल्टर होम में लड़कियों के साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर ऐपवा ने राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन किया। कानपुर प्रशासन ने सेल्टर होम में रह रही 57 लड़कियों के कोरोना पॉजिटिव और 5 नाबालिग के गर्भवती होने की खबर की पुष्टि की है।

ऐपवा ने इस पूरे मामले को प्रदेश स्तर का सवाल बनाते हुए जगह-जगह धरना दिया और अपना गुस्सा जाहिर करते हुए इसे आक्रोश दिवस के रूप में मनाया। यह कार्यक्रम पूरे प्रदेश में कोरोना महामरी के नियमानुसार किया गया और अपनी मांगों के साथ सम्बंधित जिलाधिकारी को ज्ञापन भी दिया गया।

ऐपवा प्रदेश अध्यक्ष कृष्णा अधिकारी ने होम शेल्टर मामले पर अपना गुस्सा व्यक्त करते हुए कहा कि यह मामला योगी सरकार की एक और नाकामी को बता रहा है। योगी राज में महिलाओं पर हिंसा तेजी से बढ़ रही है। मुख्यमंत्री के मंत्रीमंडल में अपराधी मंत्री बने हुए है और उन्हें सरकार का पूरा संरक्षण मिला हुआ है।

कृष्णा अधिकारी ने कहा कि कानपुर होम शेल्टर मामले में भी नाबालिग लडकियों के साथ यौन उत्पीड़न और उनमें भाजपा नेताओं की संलिप्तता की खबरे भी आ रही है, इसलिए ऐपवा इस पूरी मामले की उच्च स्तरीय स्वतंत्र/ निष्पक्ष जांच की मांग करती है जिससे सच जनता के सामने आए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जा सके।

ऐपवा की प्रदेश सचिव कुसुम वर्मा ने कहा कि कोरोना महामारी के समय योगी सरकार को अपनी जनता के स्वास्थ्य और सुरक्षा की गारंटी करनी चाहिए, लेकिन कानपुर के सरकारी शेल्टर होम का मामला दिखाता है कि खुद सरकार लड़कियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के प्रति कितनी अमानवीय है।

कुसुम वर्मा ने कहा कि अगर योगी सरकार ने अपने ही कार्यकाल में हुए देवरिया शेल्टर होम कांड से सबक लिया होता, उस समय जो तध्य सामने आए थे, उनको ध्यान में रखते हुए सभी संरक्षण गृहों की समय समय पर सामाजिक प्रतिनिधियों की मौजूदगी में मॉनिटरिंग होती, श्वेत पत्र जारी होता, तो आज कानपुर शेल्टर होम में लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न जैसी शर्मनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न होती।

ऐपवा उपाध्यक्ष आरती राय ने कहा कि योगी राज महिलाओं और बच्चियों के लिये सुरक्षित नहीं रह गया है।  वहीं अगर कोई शोषितों के लिए आवाज बुलंद करे, उन्हें न्याय दिलाने के लिए आंदोलन करे तो उन्हें सुनने के बजाय सरकार जन आंदोलनों के नेताओं को जेल में डाल देना जानती हैं।

देवरिया में ऐपवा महिला आंदोलन को आगे बढ़ा रही प्रदेश सहसचिव गीता पांडेय ने कहा कि जब तक कानपुर होम शेल्टर मामले की उच्च स्तरीय जांच नहीं हो जाती और दोषियो को सजा नहीं मिल जाती, तब तक ऐपवा अपना सँघर्ष जारी रखेगी।

लखनऊ ऐपवा की संयोजिका मीना सिंह ने कहा है कि अगर योगी सरकार देवरिया शेल्टर होम कांड के जिम्मेदार लोगों पर कड़ी करवाई की होती तो शायद आज कानपुर में इस तरह की घटना न होती।

राज्यव्यापी कार्यक्रम के जरिए ऐपवा नेताओं ने इस मामले को राज्य और राष्ट्रीय महिला आयोग से मामले को संज्ञान मे लेने की मांग की है। ऐपवा नेताओं ने मांग की है कि- कानपुर शेल्टर होम मामले की उच्च स्तरीय स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाए, ताकि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जा सके। साथ ही मांग की गई कि इस मामले की जिम्मेदारी लेते हुए राज्य की महिला व बाल विकास मंत्री के इस्तीफे दें।

ऐपवा नेताओं ने कहा कि शेल्टर होम में बच्चियों और किशोरियों के सम्मान, सुरक्षा और स्वास्थ्य की गारंटी की जाए। शेल्टर होम के लिए श्वेत पत्र जारी किया जाए। निश्चित समयावधि पर सामाजिक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में होम शेल्टर की मॉनिटरिंग को सुनिश्चित किया जाय।


 

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