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एटलस की बंदी पर बोलीं प्रियंका-“पैकेज का प्रचार, पर रोज़गार ख़त्म कर रही है सरकार!”

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने ट्वीट कर कहा कि “कल विश्व सायकिल दिवस के मौके पर सायकिल कम्पनी एटलस की गाजियाबाद फैक्ट्री बंद हो गई। 1000 से ज्यादा लोग एक झटके में बेरोजगार हो गए। सरकार के प्रचार में तो सुन लिया कि इतने का पैकेज, इतने MoU, इतने रोजगार। लेकिन असल में तो रोजगार खत्म हो रहे हैं, फैक्ट्रियां बंद हो रही हैं। लोगों की नौकरियाँ बचाने के लिए सरकार को अपनी नीतियाँ और योजना स्पष्ट करनी पड़ेगी।“

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देश की सबसे बड़ी साइकिल निर्माता कंपनी एटलस द्वारा साहिबाबाद की फैक्ट्री बंद करने से हजारों मजदूर सड़क पर आ गए हैं। एटलस फैक्ट्री की बंदी को लेकर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने सरकार की नीतियों पर निशाना साधा है। उन्होने कहा कि सरकार सिर्फ प्रचार कर रही है लेकिन रोजगार खत्म हो रहे हैं, फैक्ट्रियां बंद हो रही हैं।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने ट्वीट कर कहा कि “कल विश्व सायकिल दिवस के मौके पर सायकिल कम्पनी एटलस की गाजियाबाद फैक्ट्री बंद हो गई। 1000 से ज्यादा लोग एक झटके में बेरोजगार हो गए।

सरकार के प्रचार में तो सुन लिया कि इतने का पैकेज, इतने MoU, इतने रोजगार। लेकिन असल में तो रोजगार खत्म हो रहे हैं, फैक्ट्रियां बंद हो रही हैं। लोगों की नौकरियाँ बचाने के लिए सरकार को अपनी नीतियाँ और योजना स्पष्ट करनी पड़ेगी।“

दरअसल देश की सबसे बड़ी साइकिल निर्माता कंपनी एटलस ने बुधवार को अपनी साहिबाबाद स्थित फैक्ट्री को बंद कर दी। जिससे हजारों मजदूर बेरोजगार हो गए हैं। जब मज़दूर काम करने पहुंचे तो उन्होंने कंपनी के बाहर एक नोटिस लगा पाया जिसमें लिखा था कि कंपनी के पास फ़ैक्ट्री चलाने का पैसा नहीं है।

एटलस कंपनी के इस फैसले के बाद हजारों कर्मचारी सड़क पर आ गए हैं। उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। फैक्ट्री बंद होने की खबर सुनते ही कर्मचारी गेट पर पहुंचे लेकिन उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया। कंपनी की नोटिस से गुस्साए कर्मचारियों ने कंपनी के गेट पर ही प्रदर्शन कर अपना विरोध जताया।

एटलस ने कंपनी के गेट पर जो नोटिस लगाई है उसमें लिखा है कि “जैसा कि सभी कर्मचारियों को भली-भांति ज्ञात है कि कंपनी पिछले कई वर्षों से भारी आर्थिक संकट से गुजर रही है। कंपनी ने सभी उपलब्ध फंड खर्च कर दिए हैं और स्थिति यह है कि कोई अन्य आय के श्रोत नहीं बचे हैं। यहां तक कि दैनिक खर्चों के लिए भी धन उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। सेवायोजक जब तक धन का प्रबंध नहीं कर लते, तब तक वे कच्चा माल खरीदने के लिए असमर्थ हैं। ऐसी स्थिति में सेवायोजक फैक्ट्री चलाने की स्थिति में नहीं हैं”।

नोटिस में आगे लिखा है कि “यह स्थिति तब तक बने रहने की संभावना है,जब तक सेवायोजक धन का प्रबंध ना कर लें। अत: सभी कर्मकार दिनांक 3 जून 2020 से बैठकी (ले-ऑफ) पर घोषित किये जाते हैं। ले-ऑफ की अवधि में कर्मकार निम्न समयानुसार प्रत्येक दिन फैक्ट्री के गेट पर आकर नियमानुसार अपनी हाजरी लगाएं, अन्यथा ये बैठकी (ले-ऑफ) प्रतिकार पाने के अधिकारी नहीं होंगे।“

एटलस की इस सबसे बड़ी फैक्ट्री में करीब एक हजार लोग काम करते थे। इसके पहले एटलस सोनीपत और ग्वालियर स्थित फैक्ट्रियों को भी बंद कर चुका है। ये एटलस कंपनी की एकमात्र फैक्ट्री थी, जिसमें हर महीने करीब 2 लाख साइकिलें बना करती थीं। साहिबाबाद की एटलस फैक्ट्री 1989 से चल रही थी।

लेकिन अब हालत ये हैं कि फैक्ट्री के मजदूरों और कर्मचारियों को मई माह का वेतन भी नहीं दिया गया है। कंपनी का कहना है कि उसके पास रोजमर्रा के खर्चे और कच्चा माल खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं। इसलिए अनिश्चितकाल के लिए काम बंद किया जा रहा है और लोगों को ले-ऑफ पर भेजा जा रहा है।


 

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