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दंगाई बता ‘पिंजरा तोड़’ लड़कियों को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया, JNUTA ने की निंदा

पिंजरा तोड़ संगठन 2015 में बनाया गया था । इस संगठन में हॉस्टल और पीजी में रह रही या पूर्व में रहने वाली महिलाएं जुड़ी हुई हैं। महिला सुरक्षा के नाम महिलाओं के अधिकार छीने जाने का के विरुद्ध लगातार आवाज़ उठाई जाती है। इन दो लड़कियों और अन्य गिरफ्तार छात्रों के समर्थन में जे.एन.यू शिक्षक संघ ने एक विज्ञप्ति ज़ारी की है।

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दिल्ली में फ़रवरी 2020 में हुए दंगो का ज़िम्मेदार ठहराते हुए दिल्ली पुलिस लगातार छात्रों की गिरफ्तारियां कर रही है। पिछले महीने जामिया मीलिया के पूर्व छात्रों के संगठन के अध्यक्ष को UAPA के तहत गिरफ्तार करने के बाद अब पिंजरा तोड़ संगठन से जुड़ी दो लड़कियां नताशा नरवाल और देवांगना कलीता दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार की गयी हैं। जाफराबाद में हुए नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन में इन दो लड़कियों के शामिल होने के संबंध में ये गिरफ़्तारी हुई है। उत्तरी-पूर्वी दिल्ली पुलिस के डीसीपी वेद प्रकाश सूर्या ने बताया कि आईपीसी की धारा 186 और 353 के अंतर्गत इन दो लड़कियों को गिरफ्तार किया गया है।

दरअसल जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के पास नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में महिलाओं की भीड़ जुट गयी थी। पुलिस का कहना है कि उसके बाद ही वहां हिंसा शुरू हुई। जिसका संबंध नताशा नरवाल और देवांगना कलीता से है। पुलिस द्वारा पूछताछ करने के बाद इनको अदालत में पेश किया जाएगा।

तस्वीर- ट्विटर से साभार

पिंजरा तोड़ संगठन 2015 में बनाया गया था । इस संगठन में हॉस्टल और पीजी में रह रही या पूर्व में रहने वाली महिलाएं जुड़ी हुई हैं। महिला सुरक्षा के नाम महिलाओं के अधिकार छीने जाने का के विरुद्ध लगातार आवाज़ उठाई जाती है। इन दो लड़कियों और अन्य गिरफ्तार छात्रों के समर्थन में जे.एन.यू शिक्षक संघ ने एक विज्ञप्ति ज़ारी की है।

जे.एन.यू. शिक्षक संघ द्वारा जारी की गयी विज्ञप्ति के प्रमुख अंश 

जे.एन.यू. शिक्षक संघ के अध्यक्ष डी.के. लोबियल और सचिव सुरजीत मजूमदार ने इन दोनों लड़कियों की गिरफ़्तारी का विरोध जताते हुए उन्हें गलत आरोप में फंसा कर गिरफ़्तार करने का आरोप लगाया है। ज़ारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि जो लोग असल में दोषी हैं। जिन्हें टीवी चैनलों के कैमरों ने लगातार भड़काऊ भाषण देते और हिंसा के लिए उकसाते दिखाया, उनके ख़िलाफ़ कोई एक्शन नहीं लिया गया बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से किसी ग़ैर-संवैधानिक बात के लिए प्रदर्शन कर रहे लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है। पुलिस द्वारा जामिया के छात्रों को भी इसी क्रम में गिरफ्तार करके जामिया को टारगेट किया जा रहा था। एक ख़ास समुदाय के लोगों को निशाना बनाने वाली पुलिस उन लोगों को बचा रही है, जिनकी वजह से न जाने कितने नागरिकों की जान गयी। ये वही दिल्ली पुलिस है जो कई दिनों तक दंगों को रोकने में कामयाब नहीं रही। यहां तक कि कई जगहों पर इन दंगों में मूकदर्शक के तौर पर दिखाई दी। दिल्ली पुलिस द्वारा ये कार्रवाई वर्तमान सत्ता के विरुद्ध उठने वाली आवाज़ों को दबाने के लिए की जा रही है। महामारी के दौरान प्रवासी मजदूरों की मदद के बजाय एक के बाद एक गिरफ्तारियां सत्ता की प्राथमिकताओं को दर्शाती हैं कि किस तरह से सत्ता का क्षरण हो गया है। विरोध करने के लोकतांत्रिक अधिकारों, विचारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का जिस तरह से अपराधीकरण किया जा रहा है, उससे कोई भी सुरक्षित नहीं है। जे.एन.यू. शिक्षक संघ गलत आरोपों में गिरफ़्तार किए गए सभी जे.एन.यू. के छात्रों को तुरंत रिहा करने और इनके विरुद्ध दर्ज किये गए झूठे मुकदमों को भी हटाने की मांग करता है।

जे.एन.यू.शिक्षक संघ द्वारा जारी विज्ञप्ति 


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