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मोदी के बनारस दौरे से पहले बलि चढ़ गए दो सफ़ाई मज़दूर, पर FIR नहीं !

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वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों लोकार्पण के लिए तैयार हो रहे सीवेज ट्रीटमेंट प्लाँट की सफाई में दो मज़दूरों की जान चली गई, लेकिन बिना कोई एफआईआर के मामले को रफा दफा कर दिया गया। नगर निगम ने परिजनों को मुआवज़े का चेक थमाया और उन्हें शव के साथ बिहार भेज दिया जहाँ से वे आए थे।

प्रधानमंत्री मोदी को वाराणसी के चौकाघाट में आज दीनापुर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का लोकार्पण करना था। युद्ध स्तर पर तैयारी चल रही थी। दीवाली के महज़ तीन दिन बाद शनिवार का वाकया है। शनिवार को सीवर लाइन की सफाई के लिए उतरे  27 साल के दिनेश पासवान और उनके 18 साल के भतीजे विकास ज़हरीली गैस की चपेट में आ गए। नियमानुसार ठेकेदार को सुरक्षा के तमाम इंतज़ाम करके ही सीवर लाइन में उतारना चाहिए था, लेकिन मोदी जी के स्वागत के लिए काम पूरा करने की हड़बड़ी में किसी को कोई परवाह नहीं थी।

बिहार में भभुआ के रहने वाले दोनों चाचा-भतीजे के पास सीवर सफाई का कोई अनुभव नहीं था। न ही ठेकेदार को इस बात की परवाह थी कि सुरक्षा उपकरण के बिना मज़दूरों को सीवर लाइन में उतारना जानलेवा हो सकता है। दिनेश और  विकास अंदर ही घुटकर मर गए। बाद में उनके शव बाहर निकाले गए।

साफ़ है कि यह दुर्घटना नही है। देश भर में सीवर में जान गँवाने की घटनाएँ रोज़ाना होती हैं। ये  दुर्घटनाएँ नहीं, उस सोच का नतीजा हैं जिसमें सीवर में उतरने वाली नीच लोगों को मनुष्य ही नहीं माना जाता। वरना, चाँद छूने वाला भारत, सीवर सफाई का आधुनिक और सुरक्षित इंतज़ाम न कर सके, यह मानने की कोई वजह नहीं है।

यह मानसिकता आगे की कार्रवाई से भी झलकती है। प्रशासन की पूरी कोशिश रही कि किसी तरह दोनों मज़दूरों के शव लेकर परिजन वापस बिहार चले जाएँ। वही हुआ। नगर निगम ने परिजनों को मुआवज़े बतौर  12-12 लाख के चेक दिए और उन्हें वापस भभुआ भेज दिया गया जहाँ के वे रहने वाले हैं। दिनेश के चार बच्चे हैं वहीं विकास की पिछले साल ही शादी हुई है।

हद तो यह है कि प्रशासन इस मामले का संज्ञान भी नहीं लेना चाहता। शुरुआत में ठेकेदार को हिरासत में लिया गया था लेकिन बाद मे उसे छोड़ दिया गया। पुलिस के मुताबिक परिजनों ने कोई तहरीर नहीं दी, इसलिए ठेकेदार को छोड़ दिया गया।

सोचिए, दो जिंदा मज़दूर, देखते ही देखते लाशों में तब्दील हो गए, लेकिन पुलिस कार्रवाई के लिए परिजनों की ओर से  एफआईआर कराने का इंतज़ार कर रही है। किसी ग़रीब दलित परिवार के लिए न्याय की हद यही है कि कुछ पैसे लेकर मुँह सिल ले।

यह सीधे-सीधे हत्या का मामला है जिसमें योगी की पुलिस एफआईआर भी दर्ज नहीं कर रही है ताकि मोदी जी के जश्न में कोई बाधा न पड़ने पाए। बीएचयू के पूर्व छात्रनेता और आंबेडकर-भगत सिंह विचार मंच के संयोजक सुनील यादव ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी को माफ़ी माँगने चाहिए। उन्होंने  प्रशासन पर मज़दूरों के प्रति भीषण संवेदनहीतना बरतने का आरोप लगाते हुए मामले में जल्द एफआईआर दर्ज करने की माँग की है।