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‘यहूदी राष्ट्र-राज्य’ बना इज़रायल

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प्रकाश के रे

 

बुधवार को जब दुनिया नस्लभेद के खिलाफ संघर्ष के प्रतीक नेल्सन मंडेला की सौवीं जयंती मना रही थी, इजरायली संसद क्नेसेट इजरायल को यहूदी राष्ट्र-राज्य बनाने का विधेयक पारित कर रही थी. इस कानून के तहत इजरायली यहूदियों को राष्ट्रीय आत्म-निर्णय का विशेषाधिकार मिल गया है. संसद के 120 में से 62 सदस्यों ने विधेयक के पक्ष में और 55 ने विरोध में मत दिया, जबकि दो सदस्यों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया. प्रस्ताव पारित होने के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहु ने कहा कि यह जॉयोनिज्म और इजरायली राज्य के इतिहास में एक निर्णायक क्षण है. अरबी सांसदों ने इसे अल्पसंख्यकों के खिलाफ नस्लभेद और रंगभेद की संज्ञा दी है.

इजरायल की 90 लाख की आबादी में अरबी करीब 18 लाख हैं. इस कानून में अरबी भाषा को आधिकारिक भाषा की श्रेणी से हटाकर विशेष भाषा का दर्जा दिया गया है. अब सिर्फ हिब्रू राज्य की भाषा होगी तथा आधिकारिक पंचांग यहूदी कैलेंडर होगा. चूंकि 70 साल पहले बने इजरायल में हमेशा से यहूदियों को विशेषाधिकार हैं और दूसरे समुदायों, खासकर अरबी आबादी, के साथ भेदभाव और हिंसा यहूदी राज्य की मुख्य नीति रही है, इस लिहाज से यह नया कानून सांकेतिक ही है. इसने जॉयोनिज्म की आधारभूत अवधारणा को कानूनी जामा पहनाते हुए रेखांकित किया है कि ‘इजरायल यहूदी समुदाय का ऐतिहासिक जन्मभूमि है और उन्हें इसमें राष्ट्रीय आत्मनिर्णय का विशेषाधिकार है.’

इजरायल के भीतर और बाहर इस कानून का काफी विरोध हुआ है और इस विरोध में बड़े पैमाने पर यहूदियों ने भी भागीदारी की है. इस विरोध का ही नतीजा है कि सरकार को प्रस्ताव के कुछ बिंदुओं को हटाने पर मजबूर होना पड़ा है. हटाये गये प्रावधानों में सिर्फ यहूदियों की बस्तियां बसाने और अदालतों में किसी कानूनी मामले में पहले से कोई दृष्टांत न रहने पर यहूदी धर्म की मान्यताओं के हिसाब से फैसला देने के प्रावधान शामिल थे. इन पर इजरायल के राष्ट्रपति और महाधिवक्ता ने भी आपत्ति जतायी थी. अब इसमें लिखा गया है कि इजरायली राज्य की नजर में यहूदी बस्तियों का विस्तार एक राष्ट्रीय मूल्य है और राज्य इसे बढ़ावा देने और इसे स्थापित करने की दिशा में कार्य करेगा.

काफी समय से नेतन्याहु और उनकी लिकुड पार्टी तथा उनके गठबंधन में शामिल उग्र-दक्षिणपंथी पार्टियां इस कानून को पारित कराये जाने पर आमादा थीं. नेतन्याहु लगातार कहते रहे हैं कि हम इजरायली लोकतंत्र में नागरिक अधिकारों को बरकरार रखेंगे लेकिन बहुसंख्यक समुदाय के भी अधिकार हैं और वही निर्णय लेगा. नेतन्याहु की राय में बहुसंख्यक समुदाय आनेवाली पीढ़ियों के लिए राज्य के यहूदी स्वरूप को सुनिश्चित कर देना चाहता है. इस कानून में कहीं भी न तो समानता और लोकतंत्र के मूल्यों का उल्लेख है और न ही अल्पसंख्यकों के अधिकारों का. साल 1948 के इजरायली स्वतंत्रता की घोषणा में यह स्पष्ट रूप से कहा गया था कि इजरायल अपने सभी बाशिंदो के सामाजिक और राजनीतिक अधिकारों की पूरी बराबरी को सुनिश्चित करेगा, चाहे वे किसी धर्म, नस्ल या लिंग के हों तथा राज्य धर्म, चेतना, भाषा, शिक्षा और संस्कृति की स्वतंत्रता की गारंटी देगा.

विधेयक के उग्र दक्षिणपंथी समर्थकों के उन्माद का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि विधेयक में इजरायल को ‘यहूदी और लोकतांत्रिक राज्य’ लिखे जाने के संशोधन को भी खारिज कर दिया गया. कुछ विपक्षी पार्टियों- जिनमें वामपंथी मेट्ज पार्टी भी है- ने तो विधेयक के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर कहते हुए यह भी संशोधन रख दिया कि इजरायल को रुढ़िवादी यहूदियों का ही देश घोषित कर दो. ऐसे में यह अकारण नहीं है कि पारित किये गये विधेयक को इसके यहूदी और अरबी आलोचकों ने इजरायली लोकतंत्र की मौत कहा है.

इस विधेयक को पूरा यहां पढ़ा जा सकता है- https://www.jpost.com/Israel-News/Read-the-full-Jewish-Nation-State-Law-562923

पश्चिमी लोकतांत्रिक प्रणाली से संचालित होनेवाला इजरायल एकमात्र ऐसा देश है जिसके पास इसके नागरिकों के अधिकारों को रेखांकित करनेवाला संविधान नहीं है. देश एक दस्तावेज, जिसे बुनियादी कानून कहते हैं, से चलता है. इसी के हिसाब से सरकार भी चलती है और अदालतें भी. चूंकि इन कानूनों को संसद के सभी 120 सदस्यों के समर्थन से पारित किया गया है, इसलिए उन्हें बदलना या हटाना बेहद मुश्किल है.

लंबे समय से नेतन्याहु और उनका गठबंधन लगातार ऐसे नियम-कानून बना रहा है और अघोषित कदम उठा रहा है, जिनसे न सिर्फ अरबी-फिलीस्तीनी बाशिंदों को मूलभूत अधिकारों से वंचित किया जा रहा है, बल्कि यहूदी आबादी के उदारवादी आवाजों और चिंताओं का भी दमन किया जा रहा है. अंतरराष्ट्रीय कानूनों और फिलीस्तीनियों के साथ हुए समझौतों को ताक पर रख कर पानी और आवास से भी बेदखल किया जा रहा है. नयी यहूदी बस्तियां बसाने का काम जोरों पर है. गाजा पर लगातार पाबंदियां आयद की जा रही हैं और अक्सर सैनिक हमले हो रहे हैं. कुछ दिन पहले हारेट्ज में इस ‘राष्ट्र-राज्य’ विधेयक के हवाले से इजरायली अखबार हारेट्ज में ब्रेडली बर्स्टन ने लिखा था कि नेतन्याहु यहूदी राज्य की घोषणा नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे यह बता रहे हैं कि इजरायल एक फासीवादी राज्य है.