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जिंदान समेत अब तक मारे गए 72 RTI कार्यकर्ता, NAPM ने हिमाचल के सीएम को लिखा रोष-पत्र!

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हिमाचल प्रदेश के मशहूर आरटीआई कार्यकर्ता और केदार सिंह जिंदान की 7 सितंबर को हत्या कर दी गई थी। जिंदान बीएसपी के नेता तथा चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता भी थे। इस मामले में जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय (एनएपीएम) ने हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को पत्र लिखकर दोषियो ंके ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। एनएपीएम ने चिंता जताई है कि अब तक 72 आरटीआई कार्यकर्ताओ ंकी हत्या हो चुकी है। जिंदान को स्कॉर्पियो से कुचलकर मारा गया था। पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को पकड़ा है। पढ़िए एनएपीएम का पत्र-

 

 

सेवा में

श्री जय राम ठाकुर

मुख्यमंत्री, हिमाचल प्रदेश

 

विषय: सामाजिक कार्यकर्ता केदार सिंह जिंदान की हत्या के आरोपियों पर तुरंत कार्यवाही के सम्बन्ध में 

महोदय,

हम देश भर के जन आंदोलनों के कार्यकर्ता सिरमौर जिले के शिलाई ब्लाक में सामाजिक कार्यकर्ता और जुझारू नेता श्री केदार सिंह जी की दुर्दांत हत्या से बेहद आहत हैं। हम उनकी हत्या कि आलोचना और निंदा करते हैं और यह अपेक्षा करते हैं कि इस मामले की कड़ी कार्यवाही करने में हिमाचल सरकार कोई कमी नहीं छोड़ेगी।

देश में वर्तमान तक 72 आर टी आई कार्यकर्ताओं की हत्याएं हो चुकी हैं और यह अत्यंत निंदनीय और शर्मनाक है कि हिमाचल प्रदेश ने इस आंकड़े में एक और संख्या बढ़ा दी। इस हत्या को किसी भी तरह से सामान्य दर्शाए जाने का प्रयास नहीं होना चाहिए क्योंकि यह बात स्पष्ट रूप से सामने आ चुकी है कि केदार सिंह जिन्दान की हत्या के पीछे वही लोग हैं जिनका जिंदान ने कई बार भांडाफोड़ किया था। जो काम सरकार की अनेक एजेंसियां करने का सोच भी नहीं पातीं, उसे जिंदान ने सूचना के अधिकार का उपयोग करते हुए, फर्जी तरीके से बनाये गए गरीबी की रेखा के नीचे के प्रमाण पत्र से नौकरी हासिल करने वालों की समाज के सामने पोल खोली। ताकि सरकारी योजनाओं के सच्चे हकदारों को उनका हक मिल सके। यह बात उस  इलाके के सत्ताधारी लोगों को हजम नहीं हो पायी।

जिंदान पेशे से वकील होने के साथ में अपने ‘कोली’ (दलित) समाज के उत्थान के  लिए लगातार संघर्षशील थे। उनका प्रयास हमेशा यह रहा कि उनके इलाके के युवाओं को सही शिक्षा मिले और आगे बढ़ें।

जिंदान पर पहले भी हमला किया गया मगर अफसोस कि हिमाचल राज्य की पुलिस और सतर्कता गुप्तचर एजेंसियां इस पर कोई भी कार्यवाही नहीं कर पायीं। जिसका नतीजा यह हुआ कि कोली समाज के साथ-साथ हिमाचल के एक सच्चे सामाजिक कार्यकर्ता की दिन के उजाले में बेरहमी से हत्या कर दी गई।

जहां राष्ट्रीय स्तर पर आपकी पार्टी अनुसूचित जातियों के हक में होने का दावा करती है और इसके लिए कानून बना रही है वंहीं आपके राज्य में सवर्ण जातियों के बनाये समूह, राजपूत सभा इस कानून के उपयोग के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। केदार सिंह जिन्दान के हत्यारे सवर्ण समाज के थे और उन्होंने एक दलित नेता पर खुले आम हमला किया और कई बार जान से मारने की धमकी भी दे चुके थे। इसी वजह से पुलिस ने (prevention of atrocities act) की धाराएं भी इस केस में लागू की हैं – सरकार को यह सुनुश्चित करना होगा की इस मामले की कानूनी कार्यवाही जातीय हिंसा के खिलाफ बने प्रावधानों के अंतर्गत की जाये।

एक लोकतंत्र में सिरमौर के ट्रांस गिरी क्षेत्र में आज भी ‘खुम्बडी पंचायत’ जैसी जमघट रोज़मर्रा के फैसले जातियों के आधार पर लेती है, यह दर्शाता है कि सरकार आज़ाद भारत में भी सामाजिक और आर्थिक न्याय इस इलाके तक नहीं पहुंचा पाई है। हिमाचल जैसे राज्य,जो कि अपने ‘गुड गवर्नंस के लिए पहचाना जाता है, के लिए यह शर्म की बात है।

आपकी सरकार राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ, शोषण के खिलाफ और सबका साथ देने के नारे के साथ पदासीन हुई है। ऐसे में इस तरह की योजनाबद्ध हत्या  होना  सत्ताधारी दल के लिए  एक बड़ा प्रश्न है कि क्या  संविधान की धारा 21 के तहत दिए गए जीने  के अधिकार को सुनिश्चित किया  जाएगा?

इस योजनाबद्ध  हत्या पर यदि सरकार पीड़ितों को सुरक्षा देने के लिए  कोई कार्यवाही नहीं करती और समयबद्ध न्याय प्रक्रिया के तहत दोषियों को सजा नहीं देती तो भविष्य में इस तरह के जातीय हिंसकों को शह मिलेगी। सरकार को इस समस्या के और बढ़ने से पहले ही सख्त कार्यवाही कर उस पर अंकुश लगाना चाहिए।

हमारी मांग है कि:-

– एससी एसटी एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे व हत्या के मुकदमें के लिए त्वरित न्यायालय स्थापित हो।

-अगले 3 महीने में न्यायिक प्रक्रिया  स्थापित करके केदार सिंह जिंदान के हत्यारों को सजा मिले।

– राज्य सरकार अपनी सभी योजनाओं का  पीड़ित परिवार को लाभ दे, उनको समुचित एकमुश्त सहायता के साथ जीवन यापन के लिए साधन उपलब्ध कराएं।

– सिरमौर के इस क्षेत्र में कोली समाज के सशक्तिकरण हेतु सामाजिक और आर्थिक न्याय के लिए नीतियाँ बनाई जायें। इस इलाके में और पूरे राज्य में अनुसूचित जातियों के लिए ज़मीन और आजीविका का अधिकार सुनुश्चित करने के लिए कानूनी प्रावधान और नीतियों का तुरंत क्रियान्वयन हो।

-इन सभी मुद्दों पर सचिव स्तरीय कार्यवाही व निगरानी हो।

-भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के जितने भी मामले केदार सिंह जिन्दान द्वारा दर्ज किये गए और उजागर किये गए, उसकी तय समय सीमा के अन्दर जाँच हो और इसमें लिप्त आरोपियों पर तुरंत कार्यवाही की जाए।

-2014 में पास किये गए व्हिसलब्लोअर  संरक्षण अधिनियम (Whistleblower  Protection Act) को अविलम्ब लागू किया जाए।

-सूचना के अधिकार के तहत उजागर जानकारी/ भ्रष्टाचार/फर्जीवाड़े को सरकार स्वतः ही सार्वजनिक करे।

      

मेधा पाटकर, नर्मदा बचाओ आन्दोलन व जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय (एनएपीएम); अरुणा रॉयनिखिल डे व शंकर सिंह, मजदूर किसान शक्ति संगठन (एमकेएसएस), नेशनल कैम्पेन फॉर पीपल्स राइट टू इनफार्मेशन व एनएपीएम; पी. चेन्निया, आंध्र प्रदेश व्यवसाय वृथिदारुला यूनियन (एपीवीवीयू), नेशनल सेंटर फॉर लेबर व एनएपीएम (आंध्र प्रदेश); रामकृष्णम राजू, यूनाइटेड फोरम फॉर आरटीआई व एनएपीएम (आंध्र प्रदेश); प्रफुल्ला सामंतरा, लोक शक्ति अभियान व एनएपीएम (ओड़ीशा); लिंगराज आज़ादसमाजवादी जन परिषद, नियमगिरि सुरक्षा समिति, व एनएपीएम (ओड़ीशा); कविता श्रीवास्तव, पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयुसीएल) व एनएपीएम; संदीप पाण्डेय, सोशलिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (उत्तर प्रदेश); रिटायर्ड मेजर जनरल एस. जी. वोम्बत्केरे, एनएपीएम (कर्नाटक); गेब्रियल दिएत्रिच, पेन्न उरिमय इयक्कम, मदुरई व एनएपीएम (तमिलनाडु); गीथा रामकृष्णन, असंगठित क्षेत्र कामगार फेडरेशन, एनएपीएम (तमिलनाडु); डॉ. सुनीलम व आराधना भार्गव, किसान संघर्ष समिति व एनएपीएम,  राजकुमार सिन्हा (मध्य प्रदेश); अरुल डोस, एनएपीएम (तमिलनाडु);  अरुंधती धुरु व मनेश गुप्ता, एनएपीएम (उत्तर प्रदेश); ऋचा सिंह, संगतिन किसान मजदूर संगठन, एनएपीएम (उत्तर प्रदेश); विलायोदी वेणुगोपाल प्रो. कुसुमम जोसफसरथ चेलूर  एनएपीएम (केरल); मीरा संघमित्रा  एनएपीएम (तेलंगाना व आंध्र प्रदेश);गुरुवंत सिंह, एनएपीएम, पंजाब; विमल भाई, माटू जनसंगठन, एनएपीएम (उत्तराखंड); जबर सिंह, एनएपीएम (उत्तराखंड); सिस्टर सीलिया,डोमेस्टिक वर्कर्स यूनियन व एनएपीएम (कर्नाटक); आनंद मज्गओंकर, कृष्णकांत, स्वाति देसाई , पर्यावरण सुरक्षा समिति व एनएपीएम (गुजरात); कामायनी स्वामी व आशीष रंजन, जन जागरण शक्ति संगठन व एनएपीएम (बिहार); महेंद्र यादव, कोसी नवनिर्माण मंच व एनएपीएम (बिहार); सिस्टर डोरोथीउज्जवल चौबे  एनएपीएम (बिहार);दयामनी बारला, आदिवासी मूलनिवासी अस्तित्व रक्षा समिति व एनएपीएम;बसंत हेतमसरिया, अशोक वर्मा  (झारखंड); भूपेंद्र सिंह रावत, जन संघर्ष वाहिनी व एनएपीएम (दिल्ली); राजेन्द्र रविमधुरेश कुमारअमित कुमारहिमशी सिंहउमा, एनएपीएम (दिल्ली); नान्हू प्रसाद, नेशनल साइकिलिस्ट यूनियन व एनएपीएम (दिल्ली); फैज़ल खान, खुदाई खिदमतगार व एनएपीएम (हरियाणा); जे. एस. वालिया, एनएपीएम (हरियाणा); कैलाश मीना,एनएपीएम (राजस्थान); समर बागची व अमिताव मित्रा, एनएपीएम (पश्चिम बंगाल); सुनीति एस. आर.सुहास कोल्हेकरव प्रसाद बागवे, एनएपीएम (महाराष्ट्र);गौतम बंदोपाध्याय, एनएपीएम (छत्तीसगढ़); अंजलि भारद्वाज,अमृता जोहरी नेशनल कैंपेन फॉर पीपल्स राइट टू इनफार्मेशन व एनएपीएम; कलादास डहरिया, रेला व एनएपीएम (छत्तीसगढ़); बिलाल खान, घर बचाओ घर बनाओ आन्दोलन व एनएपीएम।