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मोदी ‘आलोचक’ इतिहासकार रामचंद्र गुहा पर ‘बैन’, फ़ोन टैपिंग का भी अंदेशा !

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मोदी सरकार की नीतियों के मुखर विरोधी इतिहासकार रामचंद्र गुहा पर सरकार की ओर से अनौपचारिक रूप से बैन लगा दिया गया है। आईएएस अकेडमी ने उन्हें बुलाना बंद कर दिया है और उनके फ़ोन भी टैप किए जा रहे हैं। यहाँ तक कि हाल ही में उन्हें जापान में सम्मानित करने के एक कार्यक्रम से भारतीय दूतावास का कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं हुआ।

यह सब किसी खोजी रपट का हिस्सा नहीं है। आज इंडियन एक्प्रसे में प्रकाशित साक्षात्कार में ख़ुद गुहा ने ये बातें कहीं हैं। उनसे पूछा गया था कि आप जिस तरह मोदी सरकार और दक्षिणपंथियों का मुखर विरोध करते हैं,क्या इसकी कोई कीमत भी चुकानी पड़ रही है?

जवाब में रामचंद्र गुहा ने कुछ चौंकाने वाली बातें बताईं। उन्होंने कहा-” मेरी स्थिति विशिष्ट है।अँग्रेज़ी में लिखता हूँ, अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा है और एक ग़ैरबीजेपी शासित राज्य में रहता हूँ। कौन जानता है कि गुजरात में रहकर गुजराती में लिखने वालों को कैसी क़ीमत देनी पड़ती है। या उन्हें जो उत्तर प्रदेश में रहकर हिंदी में लिख रहे हैं। (मुझे) ऐसी कोई क़ीमत तो नहीं देनी पड़ी लेकिन कुछ चीज़े हैं जिसमें इस सरकार की सोच झलकती है। जैसे, मुझे बताया गया कि आईएएस अकेडमी में अनौपचारिक रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है क्योंकि वहाँ के निदेशक यह सोचकर घबड़ाए हुए हैं कि कोई मोदी आलोचकर आईएएस प्रशिक्षुओं को संबोधित करे। मेरा एक कॉलेज दोस्त किसी बड़े देश में उच्चायुक्त है, उसने हमारे एक तीसरे दोस्त को बताया कि विदेश सेवा के अधिकारियों से कहा गया है कि मुझसे संपर्क न रखें। अभी हाल में जापान में, अन्य देशों के विद्वानों के साथ मुझे भी एक प्रतिष्ठत सम्मान (फुकुओका पुरस्कार) से सम्मानित किया गया। वहाँ सभी देशों के राजदूत मौजूद थे, लेकिन भारतीय दूतावास का कोई प्रतिनिधि मौजूद नहीं था। निश्चित ही मेरा फोन टैप किया जाता है। लेकिन हमारे गणतंत्र में जिस तरह लोकतंत्र और आज़ादी के लिए जूझने वालों का उत्पीड़न हो रहा है, उसे देखते हुए यह क़ीमत बेहद मामूली है।”

ग़ौरतलब है कि रामचंद्र गुहा की महात्मा गाँधी पर लिखी जीवनी का दूसरा भाग GANDHI:THE YEARS THAT CHANGED THE WORLD हाल ही में प्रकाशित हुई है ( पहली थी- GANDHI BEFORE INDIA)। इस किताब में गाँधी के साथ आरएसएस और आंबेडकर के संबंध में कुछ दिलचस्प जानकारियाँ हैं। रामचंद्र गुहा ने तमाम दस्तावेज़ों को सामने लाकर साबित किया है कि आरएसएस कैसे जीवन भर गाँधी जी का हर क़दम पर विरोध करता रहा, वहीं डॉ.आंबेडकर से हुई बहस ने गाँधी जी के विचारों को लगातार बदला।

 

फोटो इंडियन एक्स्प्रेस से साभार।