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मोदी कैबिनेट ने CAB को दी मंजूरी, पूर्वोत्तर सहित पूरे देश में विरोध हुआ तेज

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मोदी कैबिनेट ने बुधवार को नागरिकता संशोधन बिल को मंजूरी दे दी है, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इसे अगले हफ़्ते सदन में पेश किए जाने की संभावना है. इसके जरिए पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है. इस बिल को लेकर विपक्षी पार्टियां और पूर्वोत्तर में कई संगठन विरोध कर रहे हैं.

सदन में इसे पारित करवाने का यह सरकार का दूसरा प्रयास है. इससे पहले भी मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान इसी वर्ष 8 जनवरी को यह लोकसभा में पारित हो चुका है.

लेकिन इसके बाद पूर्वोत्तर में इसका हिंसक विरोध शुरू हो गया, जिसके बाद सरकार ने इसे राज्यसभा में पेश नहीं किया. सरकार का कार्यकाल पूरा होने के साथ ही यह विधेयक स्वतः ख़त्म हो गया. अब संसद में इसे पेश करने से पहले ही पूर्वोत्तर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. इसका विरोध पूर्वोत्तर राज्यों, असम, मेघालय, मणिपुर, मिज़ोरम, त्रिपुरा, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश में हो रहा है.

अमित शाह ने बताया कि ‘सीएबी’ में धार्मिक उत्पीड़न की वजह से बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में आने वाले हिंदु, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों को नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है.

उन्होंने बताया कि एनआरसी के जरिए 19 जुलाई 1948 के बाद भारत में प्रवेश करने वाले अवैध निवासियों की पहचान कर उन्हें देश से बाहर करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी.

इस बिल में मुस्लिम समुदाय के लिए नागरिकता देने की बात नहीं कहीं गई है. विपक्षी पार्टियां इस बिल के विरोध में उतर आई हैं.एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन औवेसी ने इस बिल को लेकर सरकार को घेरते हुए, उनकी मंशा पर सवाल उठाए हैं.

असुदद्दीन औवेसी ने कहा कि नागरिकता (संशोधन) विधेयक बिल लाने के पीछे की सरकार की मंशा है कि वह हिंदुस्तान को एक धर्म आधारित देश बना दें. इस बिल के लागू होने के बाद हिंदुस्तान और इसराइल में अब कोई फर्क नहीं रहेगा। संविधान में धर्म के आधार पर नागरिकता देने की कोई बात ही नहीं है.

औवेसी ने कहा कि अगर मीडिया रिपोर्ट सही है कि पूर्वोत्तर राज्यों को प्रस्तावित सीएबी कानून से छूट दी जाएगी, तो यह मौलिक अधिकारों से संबंधित अनुच्छेद 14 का घोर उल्लंघन होगा क्योंकि आपके पास इस देश में नागरिकता पर दो कानून नहीं हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि यह धर्म के आधार पर नागरिकता देगा, जो हमारे संविधान के सिद्धांतों के खिलाफ है.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी ने एक फिर साफ़ कहा है कि वह जाति और धर्म पर आधारित नागरिक विधेयक को राज्य में किसी भी सूरत में लागू होने नहीं देंगी.

किरण रिजीजू ने कहा है कि अमित शाह ने उन्हें भरोसा दिया है कि पूर्वोत्तर के मूल निवासियों की चिंताओं का ध्यान रखा जायेगा.

मूल रूप से एनआरसी को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से असम के लिए लागू किया गया था. इसके तहत अगस्त के महीने में यहां के नागरिकों का एक रजिस्टर जारी किया गया. प्रकाशित रजिस्टर में क़रीब 19 लाख लोगों को बाहर रखा गया था.

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