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ये कहाँ आ गए हम.. मेट्रो के सुरक्षाकर्मी टिफ़िन में चिकेन ले जाने से रोकने लगे !

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(प्रभात उपाध्याय)

यह घटना आज (26 नवंबर 2018) की है. मैं वैशाली मेट्रो स्टेशन पर सिक्योरिटी चेक करवा रहा था तभी दो लोगों पर नज़र पड़ी. उम्र 30-35 के बीच रही होगी. एक शख़्स सुरक्षा जांच के बाद एंट्री गेट की तरफ खड़ा था और उसका साथी दूसरी तरफ, यानी बाहर था. उसके हाथ में टिफिन नुमा कोई चीज़ थी और वह भी अंदर आने का प्रयास कर रहा था, लेकिन सुरक्षाकर्मी उसे घुसने नहीं दे रहे थे. बार-बार हड़का रहे थे.

मैंने उसके साथी से पूछा कि आखिर माज़रा क्या है, उसके साथी को अंदर क्यों नहीं आने दे रहे हैं? उसने जो बताया वह सुनकर शायद आप भी चौंक जाएंगे. दरअसल, बाहर खड़े शख़्स के हाथ में टिफिन ही थी और वह हापुड़ से दिल्ली के अस्पताल में भर्ती अपने परिजन के लिए खाना लेकर जा रहा था, लेकिन सुरक्षाबलों का कहना था कि टिफिन में चिकेन है, इसलिये नहीं जाने दिया जा रहा है. एकबारगी मुझे लगा कि शायद कच्चा चिकेन हो, इसलिये उन्हें आपत्ति हो सकती है. मैंने शख़्स से दोबारा तस्दीक की तो उसने बताया कि पका हुआ चिकेन है. पका चिकेन है…फिर क्यों नहीं ले जाने दे रहे हैं? ऐसा तो कोई नियम है नहीं. शख़्स ने कहा, आप ही पूछिये न…मुझे तो धमका रहे हैं.

मैं सामने खड़े सिक्योरिटी इंचार्ज (सीआईएसएफ कर्मी) के पास गया और इस बारे में पूछा तो उसने छूटते ही कहा कि मांस है न…इसलिये दिक्कत है. मैंने जब थोड़ा अलग लहजे में पूछा कि क्या दिक्कत है, कहां लिखा है कि चिकेन नहीं ले जा सकते हैं? कोई कुछ खाए/ले जाए…आपको क्या समस्या है? इस पर सिक्योरिटी इंचार्ज महोदय (तीन स्टार) ने पहले तो थोड़ा टाल-मटोल वाली बात की और फिर कहा कि अगर ढंग से पैक है तो ले जा सकते हैं. इसके बाद वह शख़्स अंदर आ सका. यह कोई एक घटना नहीं है, बल्कि समूची विचारधारा है. मेट्रो स्टेशन पर चेंकिंग कर रहे उन सुरक्षाकर्मियों और उन जैसे तमाम लोग इसकी ‘चपेट’ में आए हैं और रोग बढ़ रहा है.

प्रदूषण से दो-दो हाथ कर रही दिल्ली के दमघोंटू माहौल में पिछले दिनों खब़र पढ़ी कि चीन ने दुनिया का सबसे बड़ा एयर प्यूरिफायर बना लिया है…कृत्रिम चंद्रमा लगाने जा रहा है…और फिर आज की घटना. आप ख़ुद फर्क करें कि हम किस रास्ते पर हैं…कहां आ गए हैं…और इस रास्ते की मंजिल क्या है.

 

लेखक पत्रकार हैं।

 



 

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