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आरबीआई गवर्नर की प्रेस कांफ्रेंस से, आसान भाषा में आपके लिए काम की बातें

आरबीआई गवर्नर आए, आते ही सबसे पहले महात्मा गांधी को याद किया और देश के लिए उम्मीद जताई कि भारत अपनी इच्छाशक्ति के बल पर इस समस्या से बाहर आ जाएगा। इसके साथ ही ये अंदाज़ा होने लगा था कि गवर्नर कोई अच्छी ख़बर नहीं सुनाने वाले हैं।

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शुक्रवार की सुबह रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया ने लगभग आपातकालीन प्रेस कांफ्रेंस की। अल सुबह ही ज़्यादातर मीडिया के पास इस प्रेस कांफ्रेंस की सूचना पहुंची और मतलब साफ था कि कुछ अहम बात होने वाली है। राहत के एलानों की उम्मीद सभी को थी, आम जनता को भी, स्थानीय बाज़ार को भी और शेयर बाजार को भी। लेकिन इस प्रेस कांफ्रेंस ने कम से कम शेयर बाज़ार को झटका दे दिया है। हालांकि आम आदमी और बैंकों के लिए कुछ राहत ज़रूर हो सकती है।

आरबीआई गवर्नर आए, आते ही सबसे पहले महात्मा गांधी को याद किया और देश के लिए उम्मीद जताई कि भारत अपनी इच्छाशक्ति के बल पर इस समस्या से बाहर आ जाएगा। इसके साथ ही ये अंदाज़ा होने लगा था कि गवर्नर कोई अच्छी ख़बर नहीं सुनाने वाले हैं। शक्तिकांत दास ने आगे ग्लोबल इकॉनमी के हालात की जानकारी दी और इस बाईपास के रास्ते, भारतीय अर्थव्यवस्था पर आए। उन्होंने लॉकडाउन का नाम लेते हुए कहा कि इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व नुकसान हुआ है।

सबसे पहले तो गवर्नर शक्तिकांत ने एलान किया कि बैंको के लिए रेपो रेट घटा दी गई है। 40 बेसिस प्वाइंट्स की कटौती कर के, इसे 4.4 फीसदी से घटा कर 4 फीसदी कर दिया गया है। रिवर्स रेपो रेट नहीं बदली जाएगी, वह 3.35 ही रहेगी। इससे आपको ये फ़ायदा हो सकता है कि आपके बैंक लोन की ईएमआई कम हो सकती है क्योंकि बैंकों के लिए रेपो रेट में राहत है। लेकिन ये आपके बैंक पर निर्भर करता है कि वह क्या फैसला लेता है।

 

आरबीआई गवर्नर ने ये कहा कि घरेलू अर्थव्यवस्था पर लॉकडाउन का भीषण असर पड़ा है। जहां डिमांड तो बढ़ी है, लेकिन सप्लाई में कमी हुई है क्योंकि लॉकडाउन लगातार लागू है। इसके अलावा औद्योगिक उत्पादन घट कर 17 फीसदी और मैन्युफैक्चरिंग गतिविधि 21 फीसदी रह गई है। साथ ही कोर इंडस्ट्रीज़ का आउटपुट 6.5 फीसदी गिर गया है। इसके आपके लिए दो सीधे मतलब हो सकते हैं –

  • पहला ये कि उत्पादन घटने से सप्लाई घटेगी और महंगाई अभी और बढ़ सकती है, हालांकि आरबीआई गवर्नर ने महंगाई पर चिंता जताते हुए उम्मीद जताई है कि महंगाई अगली छमाही यानी कि जुलाई से घटनी शुरु हो जाएगी।
  • दूसरा मतलब ये हो सकता है कि बेरोज़गारी, जिसकी की कोई आपतकालीन दर या जानकारी अभी सरकार के द्वारा साझा नहीं की गई है – वह और बढ़ सकती है। यानी कि न केवल नई नौकरियां नहीं आएंगी, बल्कि छंटनी भी अभी और बढ़ेगी। 

इसके अलावा महंगाई को लेकर चिंता जताते हुए, गवर्नर ने कहा कि हाल में आपूर्ति की कमी के चलते महंगाई बढ़ी है। आरबीआई के लिए भी महंगाई, ख़ासकर दालों के दाम में महंगाई चिंता का सबब है। ये उम्मीद जताई गई कि महंगाई साल की अगली छमाही में कम होनी शुरु हो सकती है। लेकिन ये कैसे होगा, इसके बारे में कुछ ठोस नहीं कहा गया।

हालांकि आरबीआई गवर्नर ने ये भी बताया कि अनाज के उत्पादन में इस साल 3.7 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है और हमारे लिए एक बार फिर, अर्थव्यवस्था को उबारने का रास्ता देश के कृषि सेक्टर से होकर जा सकता है। लेकिन जब किसान अपनी फसल बेच ही नहीं पा रहा है, तो ऐसे में कैसे अर्थव्यवस्था – कृषि से उबरेगी, ये उन्होंने नहीं बताया।

आपके लिए राहत की एक ख़बर सिर्फ ये है कि बैंकों के लोन की रिकवरी के लिए जो मोरोटोरियम आपको 3 महीने के लिए दिया गया था, उसको 3 महीने के लिए और बढ़ा दिया गया है। यानी कि अब अगस्त 2020 तक आप अपनी बैंक लोन ईएमआई न देने का विकल्प चुन सकते हैं। लेकिन अभी ये नहीं पता है कि पिछली बार की तरह, इस बार की छुपी शर्तें क्या होंगी।

बाकी की बात ये कि आरबीआई के एलानात के साथ, शेयर मार्केट गिरना शुरु हो गया। सेनसेक्स जहां ख़बर लिखे जाने तक 300 प्वाइंट्स गिर चुका था, तो निफ्टी में 87 प्वाइंट्स की गिरावट आ चुकी थी।


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