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जापानी बुखार: BJP शासित असम में 159 मामले दर्ज़, 48 मौतें, राज्य के 33 में से 29 जिले प्रभावित

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जापानी बुखार यानी चमकी बुखार ने अपनी खौफ़नाक चमक से यूपी-बिहार में सैकड़ों बच्चों की जान ले ली. इस पर खूब आलोचना, मीडिया की टीआरपी, मंत्री की नींद और चुप्पी आदि पूरे देश ने देखा. किन्तु इसका कहर अब बिहार यूपी से आगे असम तक फैल चुका है. गुरुवार, 4 जुलाई को राज्य में जापानी इंसेफेलाइटिस के कारण 48 मौतों की आधिकारिक जानकारी दी गई . असम के 33 में से 29 जिले इस बीमारी से प्रभावित हैं. केवल दीमा हसाओ, उदलगुरी, कार्बी आंगलोंग और सोनितपुर जिले प्रभावित नहीं हुए हैं.वहीं, ऊपरी असम में गुवाहाटी और जोरहाट से सटे कामरूप (ग्रामीण) सबसे ज्यादा प्रभावित जिले हैं.

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन,असम के कार्यालय के निदेशक जेवीएन सुब्रमण्यम ने बताया कि 4 जुलाई तक राज्य में जापानी इंसेफेलाइटिस से पीड़ित 159 मामले दर्ज़ किये गये हैं जिनमें से 48 की मौत हो चुकी है. क्यूलेक्स मच्छरों के द्वारा यह फ़ैल रहा है.

सुब्रमण्यम ने कहा है कि इसमें चिंता करने वाली कोई बात नहीं है, सावधानी बरतने की आवश्यकता है और निगरानी बढ़ा दी गई है.
जेवीएन सुब्रमण्यम, (निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, असम के कार्यालय) ने कहा है कि जुलाई में इस वायरस के कारण ऐसा होता है!अब याद कीजिये गोरखपुर में बीते वर्ष बच्चों की मौत पर यूपी के स्वास्थ्य मंत्री ने क्या कहा था ? उन्होंने कहा था कि अगस्त में बच्चे तो मरते ही हैं.

जोरहाट मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ अनंत नाथ ने बताया कि यह वायरस गर्मियों और बरसात के मौसमों में सबसे अधिक फैलता है,प्रकोप को रोकने और रोकने के लिए, राज्य सरकार के अधिकारियों ने एक चौबीस घंटे नियंत्रण केंद्र स्थापित किया है.सभी जिलों के अस्पतालों में नैदानिक ​​किटों की आपूर्ति की जा रही है.और गांवों में फॉगिंग की जा रही है तथा प्रभावित क्षेत्रों से खून के नमूने इकठ्ठे किये जा रहे हैं.

असम में 2018 में जापानी बुखार के 509 मामले दर्ज़ हुए थे,जिनमें 94 मौतें हुईं थीं.

ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) ने इंसेफेलाइटिस के प्रकोप से होने वाली मौतों को लेकर गुवाहाटी में राज्य के स्वास्थ्य निदेशालय के सामने अधिकारियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है.


हिन्दुस्तान टाइम्स से साभार 

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