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चिन्मयानंद केस में भाजपा पूरी निर्लज्जता से आरोपी के साथ खड़ी नज़र आती है

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पीड़िता अकेली नहीं, चिन्मयानंद के कॉलेज और आश्रम की दीवारों के पीछे कई लड़कियों के शोषण एवं निर्लज्जता की पूरी लंबी कहानी है।कहानी है। पीड़िता बेहद आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवार से आती है, उसकी हिम्मत को इस बात से हो समझा जा सकता है कि शाजहांपुर जहाँ चिन्मयानंद का रसूख़ बोलता है, वहां पीड़िता ने सिर्फ़ आवाज़ उठायी बल्कि पूरी ताकत से शोषण के खिलाफ़ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर चुकी है।वो अपनी ही नहीं बल्कि शोषण की शिकार कई अन्य लड़कियों की भी लड़ाई लड़ रही है।

SIT, पुलिस प्रशासन, सरकार सब आरोपी के साथ उसे बचाने के प्रयास में है, एसआईटी और पुलिस प्रशासन लगातार पीड़िता ले साथ न सिर्फ़ दुर्व्यवहार कर रहे हैं। बल्कि लगातार कई अरोपों को मानने का भी दबाव बना रहे हैं।

कुछ बड़े सवाल हैं, जो बड़े षड्यंत्र की ओर इशारा करते हैं।

1. शुरआत से ही सरकार और पुलिस पीड़ता के खिलाफ काम कर रही है। तभी उसे पहले राजस्थान भागना पड़ा था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही जांच शुरू हुई।

2 पीड़ता और उसके पिता ने कहा है की, वसूली का केस उसपे दबाव बनाने के लिए किया है। पूरे कांस्पीरेसी में सरकार, पुलिस और बीजेपी का हाँथ है। गिरफ्तार कर महिला और उसके परिवार पे दबाव बनाया जा रहा है।

3 कुछ ऐसा ही उन्नाव में हुआ था। पुलिस और सरकार के दबाव में पीड़ता के पिता को मारा और उसे मारने का प्रयास किया गया। जांच के बाद ये सामने आ गया है।

4 आखिर पीड़ता की शिकायत पर रेप का चार्ज क्यों नही लगाया? और चिन्मयानंद की गिरफ्तारी में क्यों देर हुई? आखिर जेल की जगह वो क्यों अस्पताल में समय बिता रहे है?

5 .आखिर वसूली का केस, पीड़ता की कंप्लेन के बाद ही क्यों? पहले क्यों नहीं? मकसद साफ है! पीड़ता की आवाज़ दबाना। उसे मीडिया से दूर रखना। और उसकी तरफ से और सुबूत को दबा देना।

6 .पीड़ता को वसूली के केस में गिरफ्तार करने में इतनी जल्दबाजी क्यों जब उसकी बेल की याचिका पे सुनवाई होने वाली थी?

7 . बीजेपी और सरकार पीड़ता को गिरफ्तार कर के समाज में बीजेपी के नेताओं दुआरा पीड़ित सभी महिलाओं को खुली चेतावनी और संदेश दे रही है। कभी भी बीजेपी के नेताओं के खिलाफ कंप्लेंट मत करना। पहली चेतावनी बीजेपी ने उन्नाव कांड में दिया था,महिला की हत्या का प्रयास कर।
बीजेपी द्वारा कानून और न्याय का मज़ाक बना दिया गया है। पीड़िता को न्याय नहीं मौत के दरवाज़े या जेल तक पहुंचा दिया जाता है।

बीजेपी नेता चिन्मयानन्द बलात्कार केस में पीड़िता अकेली नहीं, चिन्मयानंद के कॉलेज और आश्रम की दीवारों के पीछे कई लड़कियों के शोषण एवं निर्लज्जता की पूरी लंबी कहानी है।कहानी है।
पीड़िता बेहद आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवार से आती है,उसकी हिम्मत को इस बात से हो समझा जा सकता है कि शाजहांपुर जहाँ चिन्मयानंद का रसूख़ बोलता है,वहां पीड़िता ने सिर्फ़ आवाज़ उठायी बल्कि पूरी ताकत से शोषण के खिलाफ़ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर चुकी है।
वो अपनी ही नहीं बल्कि शोषण की शिकार कई अन्य लड़कियों की भी लड़ाई लड़ रही है।

SIT, पुलिस प्रशासन, सरकार सब आरोपी के साथ उसे बचाने के प्रयास में है। एसआइटी और पुलिस प्रशासन लगातार पीड़िता ले साथ न सिर्फ़ दुर्व्यवहार कर रहे हैं। बल्कि लगातार कई अरोपों को मानने का भी दबाव बना रहे हैं।

कुछ बड़े सवाल हैं?? जो बड़े षड्यंत्र की ओर इशारा करते हैं।

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1. शुरआत से ही सरकार और पुलिस पीड़ता के खिलाफ काम कर रही है। तभी उसे पहले राजस्थान भागना पड़ा था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही जांच शुरू हुई।

2 पीड़ता और उसके पिता ने कहा है की, वसूली का केस उसपे दबाव बनाने के लिए किया है। पूरे कांस्पीरेसी में सरकार, पुलिस और बीजेपी का हाँथ है। गिरफ्तार कर महिला और उसके परिवार पे दबाव बनाया जा रहा है।

3 कुछ ऐसा ही उन्नाव में हुआ था। पुलिस और सरकार के दबाव में पीड़ता के पिता को मारा और उसे मारने का प्रयास किया गया। जांच के बाद ये सामने आ गया है।

4 आखिर पीड़ता की कंप्लेन पे रेप का चार्ज क्यों नही लगाया? चिन्मयानंद की गिरफ्तारी में क्यों देर हुई? आखिर जेल की जगह वो क्यों अस्पताल में समय बिता रहे है?

5 .आखिर वसूली का केस, पीड़ता की कंप्लेन के बाद ही क्यों? पहले क्यों नहीं? मकसद साफ है! पीड़ता की आवाज़ दबाना। उसे मीडिया से दूर रखना। और उसकी तरफ से और सुबूत को दबा देना।

6 .पीड़ता को वसूली के केस में गिरफ्तार करने में इतनी जल्दबाजी क्यों जब उसकी बेल की याचिका पे सुनवाई होने वाली थी?

7 . बीजेपी और सरकार पीड़ता को गिरफ्तार कर के समाज में बीजेपी के नेताओं दुआरा पीड़ित सभी महिलाओं को खुली चेतावनी और संदेश दे रही है। कभी भी बीजेपी के नेताओं के खिलाफ कंप्लेंट मत करना। पहली चेतावनी बीजेपी ने उन्नाव कांड में दिया था,महिला की हत्या का प्रयास कर।
बीजेपी द्वारा कानून और न्याय का मज़ाक बना दिया गया है। पीड़िता को न्याय नहीं मौत के दरवाज़े या जेल तक पहुंचा दिया जाता है।

अखिलेश यादव जी ने महिला प्रतिनिधिमंडल को पीड़िता से मिलने भेजा था, पर डरी हुई सरकार ने पीड़िता से मिलने पर रोक लगा दी।
हम लोगों ने पीड़िता के माता-पिता से मुलाकात की।

पीड़िता के माता पिता का कहना है कि सीट दबाव बनाकर पीड़िता से बयान ले रही है। चिन्मयानंद के ही लोग षडयंत्र कर फिरौती और अन्य बेबुनियाद अरोपों को बना रहे है।

साथ ही पीड़िता के माता पिता का यह भी कहना कि जिस दिन उसको गिरफ्तार किया गया, उस दिन बड़ी संख्या में पुलिस सुबह 8 बजे उनके घर मे घुस आयी और एक बड़ी महिला पुलिस अफसर ने पीड़िता को जब वह सो रही थी बिस्तर से ही खींच लिया और बेहद अभद्रता से खींचते हुए मोहल्ले के बीच से ले गयी। उसे कपड़े तक ठीक से नहीं पहनने दिए गये।यह सब दबाव और डर बनाने के लिये किया जा रहा है और अब हम और हमारी बेटी इस लड़ाई को न्याय मिलने तक लड़ेंगे।


सपा नेता ऋचा सिंह से प्राप्त सूचना के आधार पर प्रकाशित रिपोर्ट 

 

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