Home ख़बर कृषि संकट के सवाल पर संसद के 21 दिन के विशेष सत्र...

कृषि संकट के सवाल पर संसद के 21 दिन के विशेष सत्र की मांग को पटना में भारी समर्थन

SHARE
प्रेस विज्ञप्ति

पटना: अपने वक्तव्य “क्यों किसान और खेतिहर मजदूर संसद के २१ दिन के विशेष सत्र की मांग कर रहे हैं?” में देश के जाने-माने पत्रकार पी. साईनाथ ने कहा कि कृषि संकट अब सिर्फ किसानों और खेतिहर मजदूरों का ही संकट नहीं है बल्कि समाज, मानवता और सभ्यता का संकट है. साईनाथ पीपल्स आर्काइव ऑफ़ रूरल इंडिया के संस्थापक हैं और अंग्रेजी अखबार द हिन्दू के ग्रामीण मुद्दों के संपादक भी रहे हैं. साईनाथ का कहना था की जिस देश में पिछले दो दशकों में २० लाख किसानों ने आत्महत्या कर लिया हो, जहाँ कृषि संकट दिन पर दिन गहराता जा रहा हो, वहां किसानों का मुद्दा सिर्फ उनका ही नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था के संकट का मुद्दा है- ऐसा संकट जिसके प्रभाव से मध्यवर्ग अछूता नहीं रह सकता.

२०११ की जनगणना के अनुसार देश में १९९१ और २०११ के बीच किसानों की संख्या में तकरीबन १.५ करोड़ की कमी आयी है. जाहिर है, कि मजदूरी और वेतन दोनों में इन दस सालों में बढ़ोत्तरी हुई है पर खेती से होने वाली आमदनी में कोई बदलाव नहीं आया है. ९४ प्रतिशत किसान आय सुरक्षा के योजनाओं के दायरे में नहीं आते. खेती से होने वाली आमदनी में कमी आयी है और खेती अब घाटे का ही नहीं बल्कि जोखिम वाला व्यवसाय हो गया है.

श्री साईनाथ के वक्तव्य को सुनने पटना के विभिन्न व्यवसायों से जुड़े लोग और बिहार के अलग अलग हिस्सों से आये किसानों एवं किसान संगठनों से जुड़े लोग आज गाँधी संग्रहालय में इकट्ठे हुए थे. कार्यक्रम की अध्यक्षता केदार दास श्रम एवं सामाजिक अध्ययन संस्थान के महासचिव प्रो. नवीन चंद्र ने की. अपने अध्यक्षीय भाषण में प्रो. चंद्र ने कहा कि कृषि संकट को पूंजीवाद के वयापक संकट से अलग नहीं किया जा सकता. इस संकट से जूझ रहे समाज के विभिन्न हिस्सों के लोगों को किसानों के साथ आगे आना होगा और मिलकर इस संकट से लड़ना होगा.

देश के 210 किसान और खेतिहर मजदूर संगठनों ने 29-30 नवंबर 2018 को संसद के समक्ष व्यापक जुटान की अपील की है। इस बार का जुटान कोई मामूली जुटान नहीं है. इस बार देश भर से लाखों किसान और खेतिहर मजदूर खेती-किसानी पर गहराते संकट के सवाल पर संसद के 21 दिन के विशेष सत्र की माँग को ले कर इकट्ठा हो रहे हैं। इस घटना पर पूर्वी भारत के लोगों को विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

इस मौके पर अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय सचिव सत्यनारायण सिंह ने दिल्ली में होने जा रहे किसान मुक्ति मार्च और संसद के 21 दिन के विशेष सत्र की माँग का पुरजोर समर्थन किया. उन्होंने कहा कि हमें कॉर्पोरेट खेती नहीं बल्कि कॉपरेटिव खेती के बारे में सोचना होगा. हमें एक जबरदस्त भूमि सुधार कार्यक्रम की जरूरत है जो कि आज के कृषि व्यवस्था में मुमकिन नहीं है.

सम्‍मेलन में डा. अनामिका प्रियदर्शिनी, श्री रविंद्रनाथ रॉय, डा गोपाल कृष्ण, श्री उज्जवल, श्री राजा राम, श्री मनोज श्रीवास्तव, डा सत्यजीत सिंह, सुश्री मोना झा, श्री प्रणव प्रकाश, श्री संजीव कुमार, श्री सुमंत एवं श्री अरुण ने अपने विचार रखे और इप्टा के महासचिव श्री तनवीर अख्तर ने धन्यवाद ज्ञापन किया.

किसानों के आंदोलन नेशन फॉर फार्मर्स और २१० किसान और खेतिहर मजदूरों के संगठनों के समर्थन में पटना के कई गैर किसान संगठनों ने अगले २९ सितम्बर को एक हस्ताक्षार अभियान का आह्वान किया है जो कि डाकबंगला चौक पर सुबह ११ से दोपहर के १ बजे तक चलेगा. सम्‍मेलन के बाद यह भी तय किया गया कि ३० सितम्बर को दोपहर २ से शाम के ५ बजे तक बुद्ध स्मृति पार्क में एक जन-संवाद और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा जिसमे नेशन फॉर फार्मर्स के कलाकार साथी अपनी कविताओं, अभिनय और संगीत के जरिये किसानों के मुद्दे पर अपनी प्रतिबद्धता जाहिर करेंगे.

यह सम्‍मेलन नेशन फॉर फार्मर्स के द्वारा आयोजित किया गया था और इस आयोजन में नेशन फॉर फार्मर्स के कई बिहारी साथी संगठनों ने साथ दिया. इन संगठनों के नाम हैं- तत्पर फाउंडेशन, इंडियन सोसाइटी फॉर कल्चरल कोपरशन एंड फ्रेंडशिप, सन्मत, जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय, समग्र शिक्षण एवं विकास संस्थान, केदार दस श्रम एवं सामाजिक अध्ययन संस्थान, चिंताहरण सामाजिक विकास ट्रस्ट, बिहार महिला समाज, किसान जिंदाबाद एवं भारतीय जान नाट्य संगठन. इन संगठनों ने किसानी पर गहराते संकट के सवाल पर संसद के 21 दिन के विशेष सत्र की माँग का समर्थन किया और आगामी २९-३० नवंबर को जब देश भर के किसान दिल्ली में इकट्ठे होकर अपनी मांग रख रहे होंगे, तब किसानों के बिहारी साथी संगठन पटना में एक हस्ताक्षार अभियान, जान संवाद और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर इस मुद्दे पर अपना समर्थन दर्ज कर रहे होंगे.

ज्यादा जानकारी के लिए कृपया इन व्यक्तियों से संपर्क करें: डॉ गोपाल कृष्णा, नेशन फॉर फार्मर्स (9818089660); श्री रविंद्र नाथ राय, इसकफ (७६३३८६१७५७); श्री अमित कुमार, तत्पर फाउंडेशन (९८३५८९३१२१); श्री अमित चौबे, सन्मत (९७९८००००९९); श्री उज्जवल, एन. ए. पी. एम. (९५३२३२६७३७).

LEAVE A REPLY

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.