Home Corona लॉकडाउन 4- दिल्ली के दिल को कितना धड़कने की इजाज़त होगी?

लॉकडाउन 4- दिल्ली के दिल को कितना धड़कने की इजाज़त होगी?

देश के सबसे बड़े राजनैतिक और शिक्षण नगर के अलावा ये करोड़ों प्रवासियों का घर भी थी। लेकिन अब सड़कों पर कामगार, अपने घरों के लिए लौट रहे हैं। ऐसे में दिल्ली की अर्थव्यवस्था को दोबारा चालू करना, बेहद अहम है पर लॉकडाउन में कितना धड़केगा दिल्ली का दिल, मीडिया विजिल का, सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर आकलन पढ़िए।

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दिल्ली देश की राजधानी तो है ही, दरअसल देश के किरदार की पहचान भी रही है। भीड़ से भरी, भ्रमित, अधीर और शिकायत करती हुई। लेकिन दो महीने होने वाले हैं और दिल्ली की सड़कों पर सन्नाटा है। देश के सबसे बड़े राजनैतिक और शिक्षण नगर के अलावा ये करोड़ों प्रवासियों का घर भी थी। लेकिन अब सड़कों पर कामगार, अपने घरों के लिए लौट रहे हैं। ऐसे में दिल्ली की अर्थव्यवस्था को दोबारा चालू करना, बेहद अहम है पर लॉकडाउन में कितना धड़केगा दिल्ली का दिल, मिल सकती हैं कितनी रियायतें मिल सकती हैं – पढ़िए हमारी ये स्टोरी;

कैब कब चलेगी?

केंद्र की गाइडलाइंस में यात्री वाहन चलाने का फैसला राज्य सरकारों पर छोड़ दिया गया है। ये प्लान सोमवार शाम तक आ जाने की संभावना है। दिल्ली वालों की बड़ी समस्या है कैब, क्योंकि बड़ी संख्या में काम पर जाने वाले लोग – कैब्स का इस्तेमाल भी करते हैं। खासकर संक्रमण के ख़तरे में लोग बस या मेट्रो में सफर से गुरेज़ कर सकते हैं। इस श्रेणी में ऑटो, टैक्सी, ग्रामीण सेवा, फटफट सेवा, मैक्सी कैब, ई- रिक्शा वगैरह सभी पर सोमवार को ही शाम तक फैसला हो सकता है। सरकार पहले ही केंद्र को भेजी अपनी सिफारिशों में ऑटो, ई- रिक्शा, साइकल रिक्शा में एक सवारी की सिफारिश कर चुकी है।। लेकिन कैब में केवल दो यात्री हो सकते हैं। यानी कि चालक को मिला कर 3 लोग। ये ही नियम, निजी वाहनों पर भी लागू किया जा सकता है। इन कैब सेवाओं में कार पूलिंग और कार शेयरिंग की सेवा को अनुमति नहीं मिलेगी। इसके लिए रविवार को जारी, केंद्र की गाइडलाइंस को भी आधार बनाया जाएगा।

डीटीसी का दरवाज़ा खुलेगा या नहीं?

DTC बसें फिर चलेंगी…

दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत के मुताबिक, इस पर विमर्श चल रहा है। दिल्ली सरकार अपने प्रस्ताव में पहले ही कह चुकी है कि राजधानी में बस, ऑटो और टैक्सी चलनी चाहिए। हालांकि एक बस में 20 से ज्यादा सवारी नहीं रखने और हर बस में दो बस मार्शल होने का फैसला हो सकता है। बस स्टैंड पर बस मार्शल यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग भी कर सकते हैं।

दो विकल्पों पर विचार किया जा रहै है, पहला ये है कि शुरु में ही 100 प्रतिशत बस चला दी जाएं जिससे कि 20 यात्री होने के बावजूद भी इस नियम का पालन भी होता रहे और बसें कम भी न पड़ें। लेकिन अगर 100 फीसदी बसों के लिए पर्याप्त यात्री नहीं होते हैं, तो इस नियम में संशोधन किया जा सकता है। हालांकि दूसरा विकल्प वही है, जो पहले विकल्प का प्लान बी है कि 50 ही फीसदी बसों के साथ शुरुआत हो और अगर मांग बढ़ती है, तो बसें धीरे-धीरे बढ़ाई जाएं। शुरुआती वक़्त में लंबे रूट्स को प्राथमिकता मिलेगी, बस कम स्टॉप्स पर रुकेंगी और वही स्टॉप्स रखे जाएंगे, जहां आवश्यकता अधिक होगी।

दिल्ली वालों के बाज़ारों का क्या?

तस्वीर सौजन्य – New York Times

दिल्ली में बाज़ार केवल कोई खरीददारी का मामला नहीं हैं, दिल्ली की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा हैं। दिल्ली से पलायन कर रहे प्रवासी मज़दूरों की बड़ी आबादी, इन्हीं बाज़ारों में काम करती है। माना जा रहा है कि दिल्ली के बाज़ारों को खोलने की योजना लगभग तैयार है। केंद्र की गाइडलाइंस को ध्यान में रखते हुए, अब ये राज्य के हाथ में है कि वह स्थानीय अर्थव्यवस्था के आधार-बाज़ार को लेकर क्या सोचते हैं। तो संभावना है कि दिल्ली के बाज़ार, सशर्त खोल दिए जाएंगे। संभव है कि थोक बाज़ारों में ऑड-ईवन के आधार पर दुकानें खोलने की छूट मिल जाए और रिटेल में सभी दुकानें खोलने की इजाज़त मिले। दिल्ली सरकार सभी बाज़ारों में भी ऑड-ईवन सिस्टम लागू कर सकती है। हालांकि जिन दुकानों को अभी छूट मिली है, वह जारी रहेगी।
कंटेनमेंट जोन को छोड़कर बाकी दिल्ली में मॉल्स खोले जाने की सिफारिश है, जो दिल्ली सरकार ने केंद्र से की थी। इसको लेकर काफी कड़ी शर्तें होने की संभावना है।

क्या अभी भी बंद रहेगा

धार्मिक संस्थान, शैक्षिक संस्थान, सिनेमा, स्विमिंग पूल, जिम आदि बंद रहेंगे।

नॉन एसेंशियल एक्टिविटीज के लिए शाम 7 से सुबह 7 की पाबंदी बदल कर, इसमें कुछ घंटे की ढील दी जा सकती है।

सशर्त खोलने की इजाज़त

रेस्टोरेंट, ईटिंग पॉइंट, स्वीट शॉप, बेकरी शॉप खोली जा सकती हैं, लेकिन वहां बैठ कर खाया नहीं जा सकेगा। डिलीवरी और टेक अवे के लिए इनको खोला जा सकता है। सादी भाषा में किचन ऑपरेशनल करने की इजाज़त रहेगी। निजी दफ्तरों में 50 फीसदी स्टाफ आ सकेगा।

हालांकि कंटेनमेंट ज़ोन में रियायतें मिलने की उम्मीद अभी भी नहीं है। इसके अलावा राज्य सरकार को दिल्ली-नोएडा सीमा को लेकर भी विचार करना होगा क्योंकि बड़ी आबादी, दिल्ली से नोएडा काम करने जाती है। साथ ही, इंतज़ार इस फैसले का भी है कि अंतर्राज्यीय बस सेवाएं चालू होंगी या नहीं।

दिल्ली को उम्मीद है कि आज शाम तक, कुछ ऐसे एलान होंगे कि दिल्ली का दिल धीरे-धीरे ही सही धड़कना शुरु करेगा।


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