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तांडव की रात शिव विहार में पसरा सन्नाटा चीख रहा था- ये दंगा नहीं, सुनियोजित हमला है!

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बुधवार की रात ज़िन्दगी की सबसे डरावनी रातों में से एक थी। हम अपने ही देश में अपने ही लोगों के बीच सबसे ज़्यादा डरे हुए और असहाय महसूस कर रहे थे। एक ऐसी आग लगाई गई थी कि जिसकी चपेट में हिन्दू हो या मुसलमान, किसी भी इंसान की जान जा सकती थी। 

बुधवार शाम खबर मिली कि शिव विहार में दंगा हुआ है। वहां जाना ज़रूरी था, सो हम तुरंत निकल लिए। नाले के उस पार शिव विहार का वह इलाक़ा था जहां दोपहर में भयंकर दंगा हुआ था। जैसे ही हम नाले के पास वाले पुल पर पहुंचे, रैपिड एक्शन फोर्स के एक जवान ने हमें रोक कर पूछताछ करनी शुरू कर दी। कौन हो? कहां जाना है? फिर उसने लगभग डाँटते हुए कहा,”जान प्यारी नहीं है क्या? आज ही तीन लाश नाले से बरामद की गई है।अगर आगे जा रहे हो तो अपने रिस्क पर जाओ, लेकिन अगर कोई चिल्लाये या रोके तो तुरंत रुक जाना, भागना मत नहीं तो पता है न कि क्या आदेश है? सीधा गोली मारने के आदेश हैं।”

हम जैसे ही नाला पार करके शिव विहार की मुस्लिम बहुल आबादी में पहुँचे तो एक बार को लगा कि जैसा हम सीरिया या मध्य-पूर्व के किसी देश के बारे में सुनते देखते रहे हैं, उससे रूबरू हो रहे हों। सड़कें पत्थरों, ईंट, डंडों और लोहे की सरिया के टुकड़ों से पटी पड़ी थीं। सड़क के किनारे की दुकानों और घरों में भयंकर तोड़फोड़ की गई थी। दुकानों के शटर तोड़कर सारा सामान चोरी कर लिया गया था और आग लगा दी गई थी। आगे चौराहे पर दो गाड़ियाँ धू-धू कर के जल रही थीं। पूरी सड़क पर ऐसा सन्नाटा पसरा था जैसे सारा मोहल्ला ही कहीं ग़ायब हो गया हो।

दिल्ली के जाफराबाद, सीलमपुर, भजनपुरा, शिव विहार, मुस्तफाबाद सहित तमाम इलाक़ों में साम्प्रदायिक हिंसा का क़हर इस क़दर गिरा है कि लोग डर के मारे घरों में घुसे हैं या घर छोड़कर भाग गए हैं। दंगे की आग जाफराबाद, भजनपुरा से होते हुए जौहरीपुर और शिव विहार तक पहुँच चुकी थी।  भय और हिंसा का माहौल लोगों में इस कदर था कि लोग न कुछ बोलने को तैयार थे, न कुछ सुनने को। बोलने को तैयार होने पर भी डर इतना था कि लोग अपना नाम नहीं सामने लाना चाह रहे थे।

शिव विहार इलाक़े में दुकानों में लूटपाट के बाद आगज़नी भी की गई

शिव विहार के रहने वाले आरिफ़ (बदला हुआ नाम) बताते हैं, “कल (मंगलवार) रात से ही मुस्तफाबाद से लेकर सीलमपुर और तमाम इलाक़ों में गोलीबारी और बमबारी की आवाज़ें रह रहकर सुनाई दे रही थीं। हमारे पूरे मोहल्ले के लोग पिछले तीन दिनों से घरों में घुसे रहने को मजबूर हैं। न खाने पीने का ताज़ा सामान है और न रोज़मर्रा के इस्तेमाल की चीज़ें। बताइए, हम करें तो करें क्या?”

थोड़ा आगे बढ़ने पर देखा कि चौराहे के नज़दीक फ़र्नीचर की एक दुकान फूंक दी गई थी। दुकान स्थानीय निवासी मोहम्मद जीशान की बताई जा रही है। लोगों से बातचीत करने पर पता चला कि चुन चुनकर इलाक़े में मुसलमानों की दुकानों को फूंका जा रहा है और उनमें लूटपाट की जा रही है।

भजनपुरा में किराने की दुकान चलाने वाले मोहम्मद शकील रूंधे गले से आपबीती सुनाते हुए लगभग रो पड़ते हैं। वे बताते हैं, “परसों (सोमवार) दोपहर को अचानक एक भीड़ “जय श्री राम” और “हर हर महादेव” के नारे लगाती, सड़कों पर पथराव और आगज़नी करती हुई उपद्रव मचा रही थी। सभी दुकानदार दंगे की आहट पाकर दुकानें बंद कर भाग गये थे।” दंगाइयों ने निशाना बनाकर उनकी दुकान पर हमला किया और लूटपाट की। दुकान के अंदर से क़रीब चार पाँच लाख का सामान लूट लिया और इसके बाद भी पेट नहीं भरा तो आग लगाकर पूरी दुकान को जला दिया।

शकील के परिवार में चार बच्चे, उनकी पत्नी और माँ-बाप सहित कुल सात लोग हैं जिनके बीच आय का एकमात्र साधन वह दुकान थी। शकील की सबसे बड़ी चिन्ता यही थी कि उन्माद और धर्मांन्धता की भेंट चढ़ी उनकी रोज़ी का हिसाब कौन देगा। शुक्रवार की शाम मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के जब मुआवजे की बात कही, तब जाकर उन्हें कुछ राहत मिली होगी लेकिन सवाल तब भी रह जाता है कि एक लाख के एक्स ग्रेशिया भुगतान के बाद जब उनसे दस लाख के लिए मुआवज़े के लिए कागज़ात मांगे जाएंगे तो शकील उसका इंतज़ाम कहां से करेंगे?

गोकुलपुरी में उपद्रवियों ने बस को फूँक दिया

यह संकट उन तमाम लोगों के साथ है जिनके या तो घर जला दिए गए हैं या दुकानें। शिव विहार और उससे सटे इलाक़े के लोग अपने घर छोड़कर अलग अलग जगह शरण लेने को मजबूर हैं। लोगों का कहना है कि रात को भीड़ आती है और चिन्हित (धर्म के आधार पर) घरों के दरवाज़े तोड़कर मारपीट करती है और आग लगा देती है। यमुनापार के पूरे इलाक़े में लगभग कर्फ़्यू जैसे हालात हैं। लोग घरों में तीन तीन दिन से क़ैद हैं और भय के साये में जी रहे हैं। दूध की दुकानों के बाहर लम्बी कतारें होती हैं जब शाम या दोपहर में कुछ देर के लिये वे खुलती है।

इस हिंसाग्रस्त माहौल के चलते बोर्ड परीक्षाएं प्रभावित हो रही हैं। यमुनापार इलाक़े के सभी स्कूल कालेज फिलहाल बंद हैं।

ऐसा नहीं है कि ये दंगे कोई एक दिन में भड़क गये या किसी ख़ास दिन से ही इनकी शुरुआत हो गई। 24 फ़रवरी को ये दंगे जाफराबाद और उससे सटे इलाक़ों जैसे भजनपुरा, मौजपुर में भले हिंसक हो गये हों लेकिन इनकी पृष्ठभूमि दिल्ली में बहुत पहले से तैयार हो रही थी। नागरिकता संशोधन क़ानून और एनआरसी के ख़िलाफ़ लगभग दो महीने से ज़्यादा वक्त से दिल्ली के शाहीन बाग और तमाम इलाक़ों में विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। इस क़ानून के समर्थन में भी कई दक्षिणपंथी समूहों द्वारा रैलियाँ और सभाएं हो रही थीं लेकिन कोई भी हिंसक झड़प सोमवार तक नहीं हुई थी।

शनिवार 22 फ़रवरी को जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे वाली सड़क पर महिलायें शाहीन बाग की तर्ज़ पर चक्काजाम करते हुए बैठ गईं। उनका कहना था कि इसके पहले वे मोहल्ले के अंदर बैठी हुई थीं पर कोई भी उन्हें सुनने या देखने नहीं आया था। महिलाओं के वहां सड़क घेर लेने के बाद स्थानीय लोगों ने (जिनमें भजनपुरा ,मौजपुर और सीलमपुर, जाफराबाद के लोग थे) विरोध जताना शुरू कर दिया। अगले दिन 23 फ़रवरी को भीम आर्मी के मुखिया चन्द्रशेखर आज़ाद भारत बंद बुलाते हैं जिसके केंद्र में जाफराबाद का यही इलाक़ा होता है। ठीक उसी समय भाजपा नेता कपिल मिश्रा अपने समर्थकों के साथ आते हैं और कहते हैं कि “हम दिल्ली में दूसरा शाहीन बाग नहीं बनने देंगे। पुलिस प्रशासन इन लोगों को चौबीस घंटे में हटा ले नहीं तो हम अपने तरीक़े से हटाएंगे।”

इस भड़काऊ भाषण के बाद जो हुआ, अब वह दिल्ली के इतिहास के काले पन्नों में दर्ज हो चुका है।

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