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क्‍या कवि, क्‍या फ़ादर, क्‍या वकील, क्‍या पत्रकार, एक दिन में सब गिरफ़्तार!

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फरीदाबाद थाने में सुधा भारद्वाज


गौतम नवलखा की ट्रांजिट रिमांड पर दिल्‍ली हाइकोर्ट का कल तक स्‍टे, 
बाकी गिरफ्तार


दिल्‍ली: 
मंगलवार की सुबह कई बुरी खबरें एक साथ लेकर आई। सबसे पहले सुबह साढ़े छह बजे रांची से खबर आई कि पुलिस ने सामाजिक कार्यकर्ता फादर स्‍टेन स्‍वामी के घर पर छापा मारकर उन्‍हें गिरफ्तार कर लिया है। दिन चढ़ते ऐसी खबरों का दायरा फैलता गया। दस बजे तक यह साफ़ हो गया कि छापे एक साथ कई शहरों में कई व्‍यक्तियों के घर मारे गए थे। यह काम पुणे पुलिस का था जिसने कथित रूप से भीमा कोरेगांव हिंसा की जांच के सिलसिले में ये छापे मारे।

दिन बीतते-बीतते इस मामले में कई गिरफ्तारियों की पुष्टि हो गई। इनमें तेलुगु कवि वरवरा राव, इकनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली के सलाहकार संपादक रहे गौतम नवलखा, अधिवक्‍ता सुधा भारद्वाज, सामाजिक कार्यकर्ता वर्नान गोंजाल्‍वेस, पत्रकार क्रांति टेकुला, वकील सुसन अब्राहम प्रमुख हैं। और गिरफ्तारियों की पुष्टि अभी नहीं हो पाई है।

खबर आई कि गौतम नवलखा को बिना ट्रांजिट रिमांड पर लिए और पेश किए बगैर पुलिस उन्‍हें पुणे लेकर जा रही है, तब जाकर कुछ लोगों ने दिल्‍ली हाइकोर्ट में एक हेबियस कॉर्पस पिटीशन लगाई। इस पिटीशन पर सुनवाई शाम 4 बजे हुई जिसमें अदालत ने पुणे पुलिस को उन्‍हें पुणे ले जाने से रोक दिया और मामले को कल सुबह तक के लिए टाल दिया। आज रात गौतम दिल्‍ली स्थित अपने निवास पर पुलिस के पहरे में ही रहेंगे।

गौतम नवलखा के घर से हुई जब्‍ती का विवरण

हैदराबाद में कवि वरवरा राव की बेटी अनाला और पत्रकार कुरमानाथ के घरों पर भी छापे मारे गए। इसके अलावा थोड़े दिन पहले गिरफ्तार किए गए अरुण फरेरा के घर पर भी पुलिस ने छापा मारा है।

विरसम नामक लेखक संगठन जिससे वरवरा राव जुड़े हैं, उसके सदस्‍यों कसीम और क्रांति के घर पर भी छापा मारा गया है। गोआ में दलित विचारक आनंद तेलतुम्‍बडे के घर पर भी छापा मारा गया। उस वक्‍त वे अपने घर पर नहीं थे। बताया जा रहा है कि पुणे पुलिस के साथ छापेमारी में छत्‍तीसगढ़ पुलिस भी शामिल थी।

पुलिस की गिरफ्त में वरवरा राव

गौरतल है कि कुछ दिन पहले पुणे पुलिस ने भीमा कोरेगांव मामले में पांच सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था। उस गिरफ्तारी में भी पैटर्न यही था कि तड़के सबके घरों पर एक साथ छापा मारा गया था।

पुणे पुलिस दरअसल भीमा कोरेगांव वाले मामले में दर्ज एफआइआर के बहाने दलित आंदोलन, नक्‍सल आंदोलन और बुद्धिजीवियों के बीच एक सूत्र स्‍थापित करने की कोशिश कर रही है लेकिन इस मामले में एक और एंगल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्‍या की साजिश का जोड़ दिया गया है। इसलिए ये गिरफ्तारियां काफी संगीन हो जाती हैं।

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