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हांगकांग की जनता सड़क पर क्‍यों है? कुछ ज़रूरी सवालों के संक्षिप्‍त जवाब

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हांगकांग की स्थानीय सरकार द्वारा मुख्य भूमि चीन को प्रत्यर्पण की अनुमति देने के प्रस्तावित कानून के खिलाफ जो प्रदर्शन शुरू हुआ था, वह अब भी जारी है. स्थानीय सरकार ने जून में बिल को निलंबित कर जुलाई में इसे “मृत” घोषित कर दिया था. उसके बाद भी हांगकांग की सड़कों पर प्रदर्शन, तोड़फोड़ और हिंसा देखने को मिली. प्रदर्शनकारी सरकार से प्रत्‍यर्पण बिल को पूरी तरह से वापस लेने की मांग कर रहे हैं.

ग्लोबल फाइनेंशियल हब में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा आंसू गैस फायरिंग के बीच सवाल उठ रहे हैं कि बीजिंग में केंद्र सरकार शहर के 7.5 मिलियन लोगों पर अपना अधिकार जताने के लिए कितना तैयार है?

एक माह से जारी हिंसक विरोध प्रदर्शन ने हांगकांग को एक खतरनाक स्थिति में धकेल दिया है. इस प्रदर्शन की आंच अब हांगकांग की अर्थव्‍यवस्‍था पर पड़ना शुरू हो गई है. इसे लेकर चीन और हांगकांग सरकार चिंतित है.

चीन का कहना है कि अगर हिंसक प्रदर्शन जारी रहा तो उसे मजबूरन सेना काे उतारना पड़ेगा. किन्तु प्रदर्शनकारियों पर चीन की यह धमकी बेअसर दिख रही है. यह हड़ताल करीब एक माह से अधिक समय से जारी है, लेकिन दस दिनों पूर्व यह आंदोलन हिंसक रूप ले लिया था. बता दें कि, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2017 में हांगकांग की यात्रा के दौरान चेतावनी दी थी कि उनके शासन के लिए चुनौतियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

भारतीय पाठकों के लिए हांगकांग में जारी विरोध प्रदर्शनों को लेकर कुछ वाजिब जिज्ञासाएं हैं जिनका जवाब हम विभिन्‍न स्रोतों का संकलन कर के संक्षेप में प्रस्‍तुत कर रहे हैं।

यह प्रदर्शन अब तक क्यों जारी है?

प्रत्यर्पण बिल को हांगकांग सरकार ने अभी निलंबित किया है जबकि लोगों की मांग है कि इस बिल को पूरी तरह वापस लेना चाहिए. जब तक सरकार इस बिल को पूरी तरह वापस नहीं लेती तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा. उधर हांगकांग की नेता और मुख्य कार्यकारी नेता कैरी लैम ने इस बिल को मृत तो घोषित कर दिया, किन्तु इसे सरकार के एजेंडे से औपचारिक रूप से वापस लेने से रोक दिया है, जिसका अर्थ है कि इसे फिर से लाया जा सकता है.

प्रदर्शनकारियों मांगे क्या हैं?

प्रदर्शनकारियों की मांगों की सूची अब लम्बी हो गई है. प्रत्यर्पण बिल को पूरी तरह वापस लेने के साथ ही लाम का इस्तीफ़ा, हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों और दंगा करने के आरोप में 10 साल की सज़ा पाए लोगों की रिहाई और पुलिस कार्यवाही की स्वतंत्र जांच की मांग शामिल हैं.

हांगकांग क्या चीन का हिस्सा नहीं है?

हांगकांग चीन का हिस्सा होने के बाद भी एक अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र (semi-autonomous region) है. यह 156 वर्षों तक ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन रहा. उस दौरान यह वैश्विक व्यापार केंद्र के रूप में विकसित हुआ. 1984 के संयुक्त घोषणा-पत्र में ब्रिटिश सरकार ने 1997 में इसे चीन को सौंपने का फैसला इस शर्त पर किया था कि वह इसे 50 वर्षों तक यानी 2047 तक इसकी स्वायत्तता को बरकरार रखेगा जिसमें एक देश दो प्रणाली व्यवस्था के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, बाज़ार और पूंजीवाद की आज़ादी और अंग्रेजी कानून के तहत न्याय व्यवस्था कायम रहेगी. ऐसे में हांगकांग की स्थानीय सरकार ने चीन के इशारे पर 2019 में ‘प्रत्‍यर्पण विधेयक’- जिसके तहत अगर कोई व्‍यक्ति चीन में अपराध करके हांगकांग में शरण लेता है तो उसे जांच प्रक्रिया में शामिल होने के लिए चीन भेज दिया जाएगा- लाकर लोगों को सड़क पर उतरने को मजबूर कर दिया है. अगर ये कानून पास हो जाता है तो इससे चीन को उन क्षेत्रों में संदिग्‍धों को प्रत्‍यर्पित करने की अनुमति मिल जाएगी, जिनके साथ हांगकांग का समझौता नहीं है. उदाहरण के तौर पर संबंधित अपराधी को ताइवान और मकाऊ प्रत्‍यर्पित किया जा सकेगा. बता दें कि हांगकांग एक एक स्‍वायत्‍त द्वीप है. चीन इसे अपने संप्रभु राज्‍य का हिस्‍सा मानता है. इसके चलते हांगकांग और चीन के बीच कोई प्रत्‍यर्पण सिंध नहीं हुई है.

चीन क्‍या कहता है?

चीन के हांगकांग और मकाउ मामलों के कार्यालय ने पुलिस और शहरी सरकार का बचाव करते हुए हांगकांग के निवासियों से प्रदर्शनों के पीछे मौजूद आपराधिक तत्‍वों से अपनी धरती को बचाने का आह्वान किया है। चीनी अधिकारियों और राजकीय मीडिया ने इसमें विदेशी हाथ होने की बात कही है और साफ़ तौर से अमेरिका का नाम लिया है।

यह प्रकरण कितना बुरा हो सकता है?

यह चीन पर निर्भर करता है। 1997 से ही जनमुक्ति सेना की टुकडि़यां हांगकांग में तैनात हैं लेकिन दै‍नंदिन मामलों में उनका खास दखल नहीं रहता। चिंताएं जतायी जा रही हैं कि सैनिकों को कानून व्‍यवस्‍था की बहाली का काम दिया जा सकता है। सोशल मीडिया पर दंगा नियंत्रण का अथ्‍यास करते सैनिकों के वीडियो आए हैं। कई लोग तियानमेन चौक पर हुए दमन जैसे कदम का अंदेशा जता रहे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि शायद ऐसा होने पर अमेरिका व्‍यापार और आर्थिक मामलों में हांगकांग को मिला विशेष दर्जा छीन लेगा।

प्रत्‍यर्पण में दिक्‍कत क्‍या है?

विरोधियों का कहना है कि इससे किसी को भी गिरफ्तार कर के चीन प्रत्‍यर्पित करने का रास्‍ता खुल जाएगा जिससे राजनीतिक विरोधियों और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं पर दमन बढ़ेगा। 

हांगकांग की सरकार का क्‍या कहना है?

उसका कहना है कि हांग‍कांग को अपराधियों का अड्डा बनने से रोकने के लिए बिल की ज़रूरत है।


फोटो और वीडियो: हांगकांग से शैलेन्‍द्र चौबे

2 COMMENTS

  1. उमेश चंदोला

    1956 में सोवियत संघ में और 1976 में चीन में पूंजीवाद की पुनर्स्थापना होने को के बाद वहां की सरकारें मजदूर किसान विरोधी हो गई । चाहे अपने देश के अंदर की जनता की बात करें चाहे हांग कांग जैसे अर्ध स्वायत्त प्रदेश की ।

  2. हॉन्गकॉन्ग के प्रदर्शन के दबदबे को तो देख सकते हैं पर कश्मीर को नहीं ! ‘पूँजीवादी’ भारत और पाकिस्तान के कश्मीर पर रवैय्ये को लेकर भी ऐसी रिपोर्ट्स होंगी पर भारतीय ‘राष्ट्रभक्त’ स्वीकार्यता देख कहना होगा कि क्या चीन में “अंध राष्ट्रवादी” ‘जनमत’ को राजकीय संगरक्षण मौजूद होगा ?
    ज़्यादा दिलचस्प यह देखना होता है कि अपने को जनता की युद्ध से हाफ़िज़ समझने वाले फ़ौज़ी अतिवादी कार्यवाही के समय क्या रुख़ अपनाते हैं !!

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