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यूपी में रामराज्य- सपा के दलित नेता की सरेआम, कैमरे के सामने गोली मार कर हत्या

यूपी के संभल ज़िले में, समाजवादी पार्टी के एक दलित नेता और उनके बेटे की दो दबंगों ने कैमरे के सामने-बिना किसी ख़ौफ़ के गोली मार कर हत्या कर दी है। इस घटना से यूपी में क़ानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं।

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उत्तर प्रदेश में हालांकि क़ानून-व्यवस्था चाक-चौबंद और क़ानून का राज होने के दावे तो पहले ही हवा हो चुके थे। लेकिन योगी आदित्यनाथ की सरकार, कोरोना काल में भी क़ानून-व्यवस्था लागू करने में नाक़ाम दिखती रही है। मंगलवार को एक वीडियो सामने आया है, जिसमें समाजवादी पार्टी के एक दलित नेता और उनके बेटे की दो दबंगों ने कैमरे के सामने-बिना किसी ख़ौफ़ के गोली मार कर हत्या कर दी है। ये घटना तब हुई जब समाजवादी पार्टी के नेता छोटेलाल दिवाकर, गांव के बाहर सड़क पर चल रहे मनरेगा के काम को देखने गए हुए थे।

ख़ौफ़ज़दा करने वाली बात ये है कि हत्यारों को इस बात का भी कोई ख़ौफ़ नहीं था कि उनका ये अपराध कैमरे में क़ैद हो रहा है। उनको अच्छी तरह अंदाज़ा था कि ये वीडियो बनाया जा रहा था। और इस तरह ये वारदाक वीडियो में क़ैद हो गई। बताया जा रहा है कि शमशोई में गांव में दलित नेता छोटेलाल दिवाकर की पत्नी ग्राम प्रधान हैं। इस गांव के बाहर मनरेगा का काम चल रहा था और सपा नेता अपने बेटे सुनील दिवाकर के साथ इस काम की प्रगति जांचने पहुंचे थे।

सूत्रों के मुताबिक मनरेगा का कार्य की जगह पर ही हमलावरों से उनकी कहासुनी हुई। वीडियो में दिख भी रहा है कि दोनों हमलावरों से पहले छोटेलाल दिवाकर की तीख़ी नोंकझोंक होती है और फिर वे आगे चले जाते हैं। लेकिन फिर वे अचानक से लौटते हैं और छोटे लाल और उनके पुत्र – दोनों को गोली मार देते हैं। गोली काफी नज़दीक से ही मारी गई और दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। हैरान करने वाली बात ये है कि उत्तर प्रदेश में क़ानून के ख़ौफ़ का दावा किया जाता है – लेकिन हत्यारों के चेहरे पर इसका कोई भय नहीं दिखता।

पुलिस ने मामले की जांच और आरोपियों की धर-पकड़ के लिए टीम्स बनाने का दावा किया है। मृतक दलित नेता, ज़िले की चंदौसी सीट से सपा के विधानसभा प्रत्याशी भी घोषित किए गए थे – लेकिन फिर वह सीट गठबंधन को चली गई थी।

सपा मुखिया अखिलेश यादव ने इस हत्याकांड के बाद हत्या आरोपियों को सत्ता का संरक्षण मिलने का आरोप लगाया है। अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी के फेसबुक पेज पर जारी एक बयान में कहा, “सत्तारूढ़ दल के समर्थक समाजवादी पार्टी के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न विगत तीन वर्षों से कर रहे हैं। लाॅकडाउन के समय राज्य में अपराधों पर कोई रोक नहीं है। निर्दोषों की हत्या भाजपा सरकार में रोज-रोज की घटना हो गयी है। भाजपा की रागद्वेश की राजनीति के कारण समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की हत्यायें हो रही हैं। इसके पूर्व भी जौनपुर और आजमगढ़ में भी हत्यायें हुई है।”

ज़ाहिर है कि पहले श्रमिकों और गरीबों की हालत के बाद इस तरह से एक दलित नेता की सरेआम हत्या ने यूपी के सीएम के रामराज्य के दावों पर पीसवाल नहीं खड़े किए हैं, बल्कि उसकी पोल खोल कर रख दी है। यूपी में पिछले 3 साल में ये पहला मौका नहीं है, जब दबंग अपराधियों ने सरेआम ऐसा कोई अपराध किया है।

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