Home ख़बर प्रदेश महागठबंधन में सीटों के तालमेल में देरी जन आकांक्षा के ख़िलाफ़- माले

महागठबंधन में सीटों के तालमेल में देरी जन आकांक्षा के ख़िलाफ़- माले

भाकपा-माले पोलित ब्यूरो सदस्य धीरेन्द्र झा, वरिष्ठ माले नेता केडी यादव और पूर्व सांसद रामेश्वर प्रसाद ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि विपक्षी दलों के बीच तालमेल की अपारदर्शी व गतिरूद्ध प्रक्रिया नुकसानदेह साबित हो सकती है. विगत लोकसभा चुनाव के समय अपनायी गयी विलंबित और जटिल प्रक्रिया का नतीजा हम सबने देखा है. लोकसभा के समय के उस आत्मघाती प्रयोग को कत्तई दुबारा इजाजत नहीं दी जा सकती है. हमारी मांग है कि विपक्षी दलों के बीच तालमेल की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनाया जाए, उसमें सभी दलों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए और उसका केंद्र दिल्ली की बजाए पटना को बनाया जाए.

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भाकपा माले ने बिहार चुनाव के मद्देनजर महागठबंधन में सीटों के तालमेल में हो रही देरी पर चिंता जताई है। माले ने कहा है कि लोकसभा के समय का आत्मघाती प्रयोग फिर दुहराया न जाए. और तालमेल की पूरी प्रक्रिया का केंद्र पटना को बनाया जाए. माले ने कहा कि भाजपा-जदयू सरकार सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ लड़ने वाली धारा के बतौर राजद के बाद सबसे बड़ा ब्लॉक वामपंथ है जिसकी अभिव्यक्ति तालमेल में होनी चाहिए.

भाकपा-माले पोलित ब्यूरो सदस्य धीरेन्द्र झा, वरिष्ठ माले नेता केडी यादव और पूर्व सांसद रामेश्वर प्रसाद ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि विपक्षी दलों के बीच तालमेल की अपारदर्शी व गतिरूद्ध प्रक्रिया नुकसानदेह साबित हो सकती है. विगत लोकसभा चुनाव के समय अपनायी गयी विलंबित और जटिल प्रक्रिया का नतीजा हम सबने देखा है. लोकसभा के समय के उस आत्मघाती प्रयोग को कत्तई दुबारा इजाजत नहीं दी जा सकती है. हमारी मांग है कि विपक्षी दलों के बीच तालमेल की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनाया जाए, उसमें सभी दलों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए और उसका केंद्र दिल्ली की बजाए पटना को बनाया जाए.

माले नेताओं ने बताया कि बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर विपक्षी दलों से वार्ता के लिए गठित भाकपा-माले की वार्ता कमिटी की बैठक विगत 10 सितंबर को पटना में हुई. बैठक में इस बात पर चिंता जाहिर की गई कि परिस्थिति की मांग और जनाकांक्षा के अनुरूप विपक्षी दलों के भीतर तालमेल को लेकर अपेक्षित गति अब तक नहीं आ सकी है, जिसके कारण जनता में गलत संदेश जा रहा है और पूरे बिहार में भाजपा-जदयू सरकार की जनविरोधी नीतियों की असफलताओं के खिलाफ जनता का जनता का चरम आक्रोश होने के बावजूद नीचे के स्तर पर सामाजिक-राजनीतिक-सांगठनिक ध्रुवीकरण की प्रक्रिया को गति नहीं मिल रही है.

#BiharElection2020महागठबंधन में सीटों की तालमेल की विलंबित प्रक्रिया जनता की उम्मीदों के विपरीत #CPIML#pressconference

Posted by CPIML Liberation, Bihar on Friday, September 11, 2020

उन्होंने कहा कि बिहार में भाजपा के खिलाफ वैचारिक से लेकर जमीन पर चलने वाली लड़ाइयों में भाकपा-माले और वामपंथी दल अगली कतार में हैं. भाजपा-जदयू सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ लड़ने वाली धारा के बतौर राजद के बाद सबसे बड़ा ब्लॉक वामपंथ का है. इसलिए तालमेल की पूरी प्रक्रिया में वामपंथी दलों को शामिल किया जाना चाहिए और सीटों के तालमेल में उसकी अभिव्यक्ति भी होनी चाहिए.

भाकपा माले नेताओं ने कहा कि आगामी 16 सितंबर को पटना में भाकपा-माले की बिहार राज्य कमिटी की बैठक आयोजित है. इस बैठक से भाकपा माले अपने चुनाव अभियान को निर्णायक स्वरूप प्रदान करेगी. बैठक में भाकपा-माले महासचिव काॅ. दीपंकर भट्टाचार्य भी उपस्थित रहेंगे.


 

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