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देशव्यापी तालाबंदी से MP के किसान परेशान, NAPM ने लिखा जिलाधिकारियों को पत्र

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कोरोना महामारी के कारण देशव्यापी आपात तालाबंदी से जहां आम जन-जीवन प्रभावित है, वहीं इस नाकेबंदी का सबसे बुरा असर किसान और मजदूर वर्ग पर पड़ रहा है. मध्यप्रदेश में किसानों को इस नाकेबंदी से हो रही परेशानी को लेकर नर्मदा बचाओ आंदोलन समिति ने जिलाधिकारियों को कुछ मांगों के साथ एक पत्र लिखा है. (संपादक)


महोदय,

मध्यप्रदेश में, जैसा कि देशभर, एक या दो दिन कहते अब 21 दिनों का लॉकडाउन घोषित हुआ है. बड़ी बीमारी या महामारी के डर से यह निर्णय की पूर्वपीठिका हम समझते हैं. लेकिन इस निर्णय के गंभीर असर जो विविध समुदाय भुगत रहे हैं और जिन्हें बीमार न होते हुए भी जीना ही मुश्किल हुआ है. ऐसे परिवारों के लिए मध्यप्रदेश शासन के समक्ष निम्नलिखित मांगपत्र हम आग्रह के साथ रखना चाहते हैं.

1. मध्यप्रदेश के नर्मदा घाटी के किसानों ने, जैसे अन्यत्र भी, बारिशकाल में जो डूब और अतिवृष्टि भुगती और लाखों का नुकसान सह लिया वे कुछ कर्ज़ा माफ़ होने के बावजूद आज भी कर्जदार है. खेती की सिचाई भी बहुत सी जगह किसानों के ही पैसे से ही करनी पड़ी है, मुख्यमंत्री जी कमलनाथ जी के और एमपीईबी के पहले हुए निर्णयों के बावजूद इस समृद्ध किसानी क्षेत्र में खेती, चरनोई, मवेशी पेड़ आदि की बरबादी से हाहाकार है.

आज फिर किसानों पर लॉकडाउन का बहुत बुरा असर है. केला, खरबूज, भिंडी, गिलकी, करेला, टमाटर जैसे फल–सब्जी खेत से निकालना भी नामुमकिन है. क्योंकि परिवहन पूरा बंद करने से बाहर जाकर बेचना ही संभव नहीं है न हि कोई खरीददार केला निकालने आ रहा है. इससे एक-एक किसान का फिर लाखों का नुकसान हो रहा है.

आपसे आग्रह है कि मात्र एक ड्राइवर, एक कलीनर और एक किसान का प्रतिनिधी मिलकर गाडी ले जाए, बाजार तक उसे रोकना नहीं. कम से कम रात को इस गाडीयों को निकलकर बाजार में भोर सुबह पहुंचने की मंजुरी, दोनों ओर भीड़ न होने देने की व्यवस्था के साथ करनी चाहिए. इस पर त्वरित निर्णय लिया जाना जरूरी है.

2. मंदी पूर्ण रूप से बंद रखने से अनाज, जैसा अभी निकल रहा गेहूँ, खरीदने वक्त मनमानी की जाकर, न्यूनतम समर्थन मूल्य भी नहीं और कुछ दिन पहले तक मिल रहा बाजार दाम भी नहीं दे रहे हैं व्यापारी. शासन का कोई नियंत्रण नहीं है. गेहूँ कुछ दिन पहले 2200-2500 में बेचा जाता था, समर्थन मूल्य 1840 रुपए. क्विंटल है तो भी 1500-1600 रूपये में बेचना पड़ रहा है. कृपया मंडी कुछ घंटे खुली रखकर तहसील के गांवों का भिन्न निश्चित समय देकर, भीड़ न हो, यह आयोजन करते हुए, बाजार उपलब्ध काराया जाए और शासन स्वयं खरीदने का कार्य करें और व्यापारियों को न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का सख्त आदेश दिया जाए.

3.सब्जी भी, फलों के साथ बेचने की छुट हाथ-गाड़ी तथा छोटे बाजार द्वारा बेचने के लिए भिन्न भिन्न समय पर छुट दिया जाये. शासन स्वयं बचा हुआ माल खरीदकर मध्यान्ह भोजन के अलावा, गरीब परिवारों को मनरेगा के दाम का हिस्सा मानकर यह बांटने के लिए उपयोग में लिया जाये.

4. किसानों के लिए नर्मदा का स्तर अब बहुत ही 122 मीटर से भी नीचे उतर गयी है, तब वहां पंप–पाइप लगाकर, बिजली सप्लाय की, जोड़ देने की कार्य एमपीईबी त्वरित पूरा करें. उन्हें फरवरी तक और शायद उसके बाद जो फंड प्राप्त हुआ है, उसे उपयोग में लिया जाए और अधिक का खर्च अगर सुस्थिति के किसानों से लिया तो भी उसकी रशीद देकर उसे एडवांस मानकर, बाद में वापस लौटाने का निर्णय जाहिर करे. इससे किसानों की कुछ बरबादी बचेगी.

5. पहले ही एक एकेक किसानी गांव की 200 से 300 चरनोई डूबने से मवेशी मूल संख्या के एक चौथाई या उससे भी कम बची है. उसकी भरपाई न चारा देकर हुई न ही चरनोई देकर. आश्वाशन मिले, अमल नहीं. आज फिर चारा जिले के बाहर से अपर्याप्त मात्रा में और भाव बढाकर आ रहा है. मवेशी बचना ही मुश्किल है. मवेशियों के लिए पर्याप्त चारा कम से कम दाम में उपलब्ध करने की जिम्मेदारी जिलाधिकारी और पशुपालन विभाग निभाये यह जरूरी है.

6. किसानों के साथ ही जुड़ा है मजदूर परिवार.जिले के अंदर के दूर के गांवों से भी मजदूरों को रोक रोककर पुलिस परेशान कर रहे हैं. गेहूं कटाई के वक्त भी मजदूर मुश्किल से पहुंच रहे हैं. उन्हें उनके स्थान पर रहते मनरेगा की न्यूनतम मजदूरी पंचायत द्वारा अकौंट में डालकर भुगतान किया जाए.

जो मजदूर खेतों में छोटे समूह में आकर दूर दूर काम कर सकते हैं, उन्हें रोका न जाए. किसान स्वयं इसकी दक्षता ले सकते हैं. इसमें पुलिसों को दिखाने के लिए किसान से टी.पी. भरकर मजदूर को देना जरूरी और संभव है. कम से कम मजदूर, किसान की जरूरत भी कम करके रोजगार पा सकते हैं.

7.विस्थापित मजदूर, जो आज टीन शेड में, अपनी पुनर्वास की पात्रता पर निर्णय और अमल की राह देखते रह रहे हैं उन्हें भी रोजगार नहीं मिल रहा है. अधिकांश समय पुलिस रोक रहे हैं.इन्हें टीन शेड में बीपीएल न हो तो भी सबको पीडीएस के ही तहत 1 यूनिट पर नियम से अधिक (प्रति युनिट 15 किलो) अनाज देकर पूर्ती की जाए.

टीनशेड में आजीविका मिशन की ओर से तत्काल, मास्क या साबुन बनाने जैसा या गेहूँ का आटा बनाने का, केला वेफर्स बनाने का रोजगार उपलब्ध किया जाए! आपके सभी कार्यालय बंद रखने से यह सब जिम्मेदारी कौन निभाएगा? महाराष्ट्र के जैसे, कम से कम कर्मचारियों के साथ कार्य और कार्यालय, जहाँ 2/4 से अधिक लोग एक साथ न बैठे, चलने दिये जाए यह जरूरी है.

8.कई जगह मजदूर अटके पड़े हैं, नहि वापस गांव जा सकते, नहि वहां मजदूरी मिल रही है, वहां पुलिस या कर्मचारी घूम घूमकर उन्हें ढूंढे निकाले और उनके रहने की, भोजन की व्यवस्था तत्काल कर दे.यह न करने पर कुपोषण और भूख से मर जाएंगे ऐसे गरीब इसे रोके.

9.अहम बात यह भी है की लॉकडाउन का अमल सख्ती से करने का मतलब, पोलिसो को मारपीट करने की छुट देना नहीं हो सकता है, कभी नहीं.

हमने चलचित्र देखे हैं और प्रत्यक्ष जाना है की पुलिस ने कइयों को बेरहमी से मारपीट कर रहे है. यह गैरकानूनी हो, न हो, अमानवीय जरुर है.

बात भी न करते,न समझाते, सफर क्यों यह न जानते हुए पुलिस बल प्रयोग करे, यह बिलकुल ही मंजूर नही हो सकता है. आप भी इसे नामंजूर करते हुए इस बलप्रयोग को सन्देश और आदेश के साथ रोकेगे यह अपेक्षा है. जिन पुलिसो ने ऐसी गलती की है उन पर कारवाई आप करे यह भी जरुरी है.

10.कोरोना से सुरक्षा के लिए पानी का अधिकतर इस्तेमाल करने का जाहिर संदेश जब की आदेश जैसा ही अधिकतम प्रचारित किया जा रहा है तब कई कई गांव में, वसाहटो में विशेषत; गरीब मोहल्लो में तथा डूब के बाद बचे गाव के हिस्सों में पिने के पानी की भी जहा गंभीर समस्या है वहा समस्या एमर्जंसी सेवा (अतिआवश्यक सेवा) मानकर ही तत्काल दूर करनी चाहिए. उदहारण के तौर पर बडवानी शहर में पाटी नाका टीनशेड में छोटा बडदा पुनर्वसाहट में, अवल्दा के जांगरवा के मूल गांव में, पानी की भयावह कमी है. अन्य गांवों में भी.

इन मुद्दों पर आप प्राथमिकता और संवेदना के साथ त्वरित कृति कार्यवाही करेगे, इस आग्रह के साथ हम अन्य मुददे सामने आते ही हम आपके ध्यान में लाएंगे जो कि हमारा कर्तव्य है.

11.हमारी मांग यह भी है कि मध्यप्रदेश शासन किसी अधिकृत स्त्रोत से ही जिलेवार और स्वास्थ्य केंद्र/अस्पतालवार हर रोज दो बार जानकारी देते जाए और अन्य लोगों को गलत या झूठी, डर फैलाने वाली आंकड़ाकीय जानकरी देने से रोक दें.

जवाब और कार्यवाही की आपेक्षा के साथ,

आपके विनीत

गुलामीर मंसूरी, कैलाश यादव, हरिओम कुमावत, गौरीशंकर भाई, देवेंद्र सोलंकी, पवन यादव, कमला यादव, मेधा पाटकर

1 COMMENT

  1. मेधा जी।
    रवीश कुमार डर नहीं फैला रहा है।
    न ही मीडिया विजिल और भाषा सिंह, सत्य हिंदी . काम

    सरकारी जुबान न बोले ।

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